• Home
  • »
  • News
  • »
  • literature
  • »
  • राष्ट्रीय पुस्तक मेला: नाथ सम्प्रदाय पर आधारित अरुण कुमार त्रिपाठी की पुस्तकों पर चर्चा

राष्ट्रीय पुस्तक मेला: नाथ सम्प्रदाय पर आधारित अरुण कुमार त्रिपाठी की पुस्तकों पर चर्चा

लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में देशभर से लेखक, प्रकाशक और पुस्तक प्रेमी जुटे हैं.

लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में देशभर से लेखक, प्रकाशक और पुस्तक प्रेमी जुटे हैं.

वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित लेखक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी की नयी पुस्तकें 'नवनाथ', 'नाथ सम्प्रदाय : दर्शन कथा नाथपन्थ की', और 'नाथ सम्प्रदाय : युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ' का लोकार्पण व परिचर्चा का आयोजन हुआ.

  • Share this:

    National Book Fair: लखनऊ में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) की नित नई इबारतें लिखी जा रही हैं. देशभर से लेखक, प्रकाशक और पुस्तक प्रेमी इस मेले में जुटे हुए हैं. यहां का मंच वरिष्ठ साहित्यकारों के उद्बोधन से गुंजायन रहता है. रोजाना पुस्तकों, सामाजिक चेतना के विषयों और विसंगतियों पर चर्चा होती है.

    इस कड़ी में वाणी प्रकाशन (Vani Prakashan) के बैनर तले सजे मंच पर चर्चा हुई नाथपन्थ और नाथ संप्रदाय पर. वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित लेखक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी की नयी पुस्तकें ‘नवनाथ’, ‘नाथ सम्प्रदाय : दर्शन कथा नाथपन्थ की’, और ‘नाथ सम्प्रदाय : युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ’ का लोकार्पण व परिचर्चा का आयोजन हुआ.

    परिचर्चा में उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष तथा बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी और स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आरएन बनर्जी उपस्थित रहे.

    प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि नाथपन्थ पर केंद्रित इन पुस्तकों के माध्यम से लेखक ने ना सिर्फ़ नाथपन्थ सम्प्रदाय को प्रतिस्थापित किया है बल्कि मनीषियों और योगियों के इस ज्ञान संसार को वर्तमान युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य भी किया है.

    वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि भारत दर्शन का मेला है. ‘नाथ सम्प्रदाय’, ‘सनातन दर्शन’, ‘वैष्णव दर्शन’, ‘भक्ति साहित्य’, ‘सूफ़ी साहित्य’, ‘अघोरी पन्थ’, ‘किन्नर समुदाय’, ‘यक्ष दर्शन’, ‘सिख दर्शन’, ‘पारसी गूढ़ प्रश्न’, ‘नवनाथ’ समेत तमाम सम्प्रदाय अपने आप में ज्ञान का सागर हैं.

    उन्होंने कहा कि समाज में शांति की स्थापना और शिष्य, गुरु का उद्धार करने का सामर्थ्य रखे, यह नाथ सम्प्रदाय में ही विद्यमान है. यह अनोखा लोकतंत्र है जिसे भारतीय युवाओं को समझना चाहिए.

    ‘नवनाथ’ पुस्तक के बारे में
    नाथपन्थ के सिद्धों का चरित्र आध्यात्मिक शुचिता एवं मानवीय संचेतना का पर्याय है. नाथपन्थ में प्रमुखतया नवनाथ एवं चौरासी सिद्धों की मान्यता एवं व्याप्ति है फिर भी इनके अतिरिक्त भी अनेक सिद्धों एवं योगियों का उल्लेख भी प्राप्त होता है. नाथ-परम्परा (नाथधारा) आज भी नैरन्तर्य पूर्ववत गतिमान है. प्रस्तुत प्रणीत ग्रन्थ में नवनाथों के जीवन चरित्र, उनके उपदेश, उनके ग्रन्थों और उनके प्रति लोकास्था का संक्षिप्त विवरण प्रकाशित करने का प्रयास किया गया है. ऐसी पन्थिक-प्रसिद्धि है कि सृष्टि के आरम्भ में नवनाथ हुए और इन्होंने ही नाथपन्थ का प्रवर्तन किया.

    vani prakashan

    नवनाथों की सूची के सन्दर्भ में नाथपन्थी विद्वानों के मत अलग-अलग हैं. अतएव संगामी सहमत हेतु प्रविद्वानों के वैचारिक-मतों पर दृष्टिपात करना अतीव आवश्यक है. योगिसंप्रदायविष्कृति (योगिसंप्रदायाविष्कृति, चन्द्रनाथ योगी, अहमदाबाद, 2019, पृ. 11-14) में नवनारायणों का नवनाथों के रूप में अवतरित होने की कथा का वर्णन किया गया है.

    इस ग्रन्थ के अनुसार कविनारायण ने मत्स्येन्द्रनाथ करभाजन नारायण ने गहिनिनाथ, अन्तरिक्षनारायण ने ज्वालेन्द्रनाथ अर्थात् जालन्धरनाथ, प्रबुद्धनारायण ने करणिपानाथ अर्थात कानिपा, आविर्होत्रनारायण ने सम्भवतः नागनाथ, पिप्पलायन नारायण ने चर्पटनाथ, चमसनारायण ने रेवानाथ, हरिनारायण ने भर्तनाथ अर्थात् भर्तृहरि, द्रुमिलनारायण ने गोपीचन्द्रनाथ नाम से अवतार लिया. ग्रन्थ में गोरक्षनाथ का अवतार किस नारायण ने लिया और आविर्होत्रनारायण ने किस नारायण का अवतार धारण किया इसका भी उल्लेख नहीं प्राप्त होता है परन्तु ग्रन्थ की भूमिका में जिन दस सिद्ध-आचार्यों का नामोल्लेख है उनमें नागनाथ का नाम भी है.

    ‘नाथ सम्प्रदाय : युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ’ पुस्तक के बारे में
    प्रस्तुत ग्रन्थ में युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ का वर्णन सात अध्यायों में एवं परिशिष्ट के माध्यम से किया गया है. इसके प्रथम अध्याय में गुरु गोरखनाथ द्वारा बताये गये हठयोग का वर्णन आदित्यनाथ जी के ग्रन्थ ‘हठयोग : स्वरूप एवं साधना’ की सहायता से किया गया है. इसमें योग और प्राणायाम के द्वारा स्वस्थ एवं मुक्ति मार्ग प्राप्त करने का वर्णन है. दूसरे अध्याय में संस्कारिक शिष्यों श्री गोरखनाथ एवं कानिफानाथ के द्वारा श्री मत्स्येन्द्रनाथ एवं जालन्धरनाथ की मुक्ति की कथा का वर्णन किया गया है.

    तीसरे अध्याय में कौल ज्ञान का वर्णन किया गया है. चौथे अध्याय में जालन्धरनाथ एवं कानिफानाथ के कापालिक मत का वर्णन किया गया है. पांचवें अध्याय में भर्तृहरि (विचारनाथ) के उपदेशों का संकलन किया गया है. छठे अध्याय में नाथपन्थ के संसिद्धि के विचार तथा बाह्य आडम्बर के विरोध का वर्णन संगृहीत है.

    सातवें अध्याय में कुण्डलिनी जागरण के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति का वर्णन किया गया है. परिशिष्ट में विविध विषयों का वर्णन किया गया है. यह पुस्तक युवाओं के लिए तो अत्यन्त उपयोगी है ही साथ-ही-साथ नाथपन्थ के सिद्धान्तों के जिज्ञासुओं की पिपासा भी शान्त करने की क्षमता रखती है.

    ‘नाथ सम्प्रदाय : दर्शन कथा नाथपन्थ की’ पुस्तक के बारे में
    नाथ सम्प्रदाय भारत का एक हिंदू धार्मिक पन्थ है. मध्ययुग में उत्पन्न इस सम्प्रदाय में बौद्ध, शैव तथा योग की परम्पराओं का समन्वय दिखायी देता है. यह हठयोग की साधना पद्धति पर आधारित पंथ है. गुरु गोरखनाथ ने इस सम्प्रदाय के बिखराव और इस सम्प्रदाय की योग विद्याओं का एकत्रीकरण किया, अतः इसके संस्थापक म माने जाते हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज