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8 जनवरी से दिल्ली में लगेगा 'वर्ल्ड बुक फेयर', NBT ने किया विश्व पुस्तक मेला का ऐलान

30वें पुस्तक मेला का अतिथि देश फ्रांस हैं और इस बार मेले की थीम 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' रखी गई है.

30वें पुस्तक मेला का अतिथि देश फ्रांस हैं और इस बार मेले की थीम 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' रखी गई है.

30वें पुस्तक मेला का अतिथि देश फ्रांस हैं और इस बार मेले की थीम 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' रखी गई है.

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    World Book Fair 2022: नेशनल बुक ट्रस्ट यानी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (National Book Trust) ने विश्व पुस्तक मेला 2022 की तारीखों का ऐलान कर दिया है. कोरोना महामारी के चलते यह पुस्तक मेला दो साल बाद आयोजित होने जा रहा है. नई दिल्ली के प्रगति मैदान (Pragati Maidan) में 8 से 16 जनवरी तक विश्व पुस्तक मेला (Vishv Pustak Mela) का आयोजन किया जाएगा.

    नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक (Yuvraj Malik) ने बताया कि कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पुस्तक मेला का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बुक फेयर (Book Fair) प्रगति मैदान के न्यू हॉल में आयोजित किया जाएगा.

    उन्होंने बताया कि 30वें पुस्तक मेला का अतिथि देश फ्रांस हैं और इस बार मेले की थीम ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ रखी गई है.

    युवराज मलिक ने बताया कि पुस्तक मेला में हर बार की तरह तमाम भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व होगा और युवाओं पर खासा ध्यान केंद्रित किया गया है. इसके लिए पुस्तक मेला में युवा कॉर्नर आकर्षण का विशेष केंद्र होगा. बच्चों के लिए भी अलग से पंडाल और कॉर्नर होगा. विदेशी साहित्य को भी अलग से स्थान दिया जाएगा.

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    वर्ल्ड बुक फेयर की घोषणा से पाठक, लेखक और प्रकाशकों में उत्साह है. वाणी प्रकाशन (Vani Prakashan) की प्रमुख अदिति माहेश्वरी ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते प्रकाशन जगत को बहुत नुकसान हुआ है. निश्चित ही विश्व पुस्तक मेला का आयोजन प्रकाशन जगत में फिर ऊर्जा का संचार करने का काम करेगा.

    National Book Trust

    अदिति ने बताया कि लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला से भी उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. पुस्तक मेला जहां पाठकों और साहित्यकारों को आपस में संवाद करने का मंच प्रदान करने का काम करता है वहीं प्रकाशकों को पाठकों का रुझान जानने और अपनी पुस्तकों को सीधे पाठकों तक पहुंचाने में मदद करता है.

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    हिंदी अकादमी, दिल्ली (Hindi Akademi Delhi) के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने बताया कि कोरोना की वजह से लंबे समय से साहित्यिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ी हुई हैं. एनबीटी के इस फैसले पर उन्होंने प्रसन्नता प्रकट की.

    डॉक्टर भट्ट ने बताया कि साहित्य समाज में ऊर्जा का संचार करता है. कोरोना काल में जब लोग घरों में कैद थे, ऐसे में साहित्य ने ही लोगों को अवसाद से बचाने और नई सोच तथा ऊर्जा के साथ महामारी से संघर्ष करने की प्ररेणा दी.

    बता दें कि इस साल महामारी के चलते वर्चुअल तरीके विश्व पुस्तक मेला का आयोजन किया गया था.

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