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99 वर्ष के हुए रामदरश मिश्र, 'साहित्य मार्तंड सम्मान' से विभूषित

99 वर्ष के हुए रामदरश मिश्र, 'साहित्य मार्तंड सम्मान' से विभूषित


राजकमल प्रकाशन ने रामदरश मिश्र की कहानियों और कविताओं के संग्रह प्रकाशित किए हैं.

राजकमल प्रकाशन ने रामदरश मिश्र की कहानियों और कविताओं के संग्रह प्रकाशित किए हैं.

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र का 15 अगस्त को जन्मदिवस था. वे आयु के 99वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं. मिश्रजी को कुछ समय पहले ही वर्ष 2021 के सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया था.

    नई दिल्ली: यह एक विरल अवसर था जब हिंदी वरिष्ठ लेखक प्रो. रामदरश मिश्र ने आजादी के अमृत महोत्सव 15, अगस्त 2022 को अपना 99वां जन्मदिवस आत्मीय लेखकों के बीच अपने घर पर ही मनाया. इस अवसर पर उनकी रचनाओं और उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर केंद्रित कई पुस्तकों और पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया. सर्वभाषा ट्रस्ट दिल्ली की ओर से डॉ. रामजन्म मिश्र, डॉ. ओम निश्चल और केशव मोहन पाण्डेय ने उन्हें “साहित्य मार्तंड सम्मान” से विभूषित किया.

    हिंदी के प्रतिष्ठित रचनाकार रामदरश मिश्र ने 15 अगस्त को घर पर ही अपने परिवार और मित्रजनों के साथ अपना जन्मदिन मनाया. रामदरश जी के साथ उनकी पत्नी सरस्वती विराजमान थीं. इस अवसर पर हिंदी के सुपरिचित रचनाकार डॉ. प्रेम जनमेजय, डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण, प्रताप सहगल, डॉ शशि सहगल, अनिल शर्मा जोशी, डॉ. पवन माथुर, डॉ. राहुल, डॉ. जसवीर त्यागी, डॉ. वेदमित्र शुक्ल, शशिकांत, ताराचंद शर्मा नादान, हरिविष्णु गौतम (बरेली), हरिशंकर राढ़ी, अनिल मीत, नरेश शांडिल्य, अलका सिन्हा और प्रो. स्मिता मिश्र सहित उनके प्रशंसक मौजूद थे.

    जन्मदिन के इस खास मौके पर रामदरश मिश्र जी ने अपनी कुछ कविताएं, गजल और मुक्तक सुनाए. रामदरश जी ने अपने गुरुवर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी करते हुए उनसे जुड़े हुए कई संस्मरण सुनाए.

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    रामदरश मिश्र जी ने कहा- ‘मैं स्रष्‍टा का आभारी हूं कि उसने इतना लंबा जीवन दिया. अभी भी मैं हाथ से लिखता हूं. आसानी से पढ़ लेता हूं. बहुत कुछ दिया है ईश्‍वर ने. मैं धीरे-धीरे चलने वाला लेखक हूं. मेरे साथ नियति कुछ खेल खेलती रही है पर जिसके परिणाम बाद में सुखद ही रहे.’

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    डॉ. ओम निश्चल ने कहा कि समस्त हिंदी जगत के लिए रामदरश मिश्र प्ररेणा हैं. इस उम्र में भी वह निरंतर साहित्य साधना में रमे हुए हैं. उन्होंने बताया कि मिश्र जी ने विभिन्न मंत्रालयों की अलग-अलग समितियों में महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में काम किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए.

    यह भी पढ़ें- रेणु और प्रेमचन्द के बाद की पीढ़ी के ग्रामीण रचनाकार हैं रामदरश मिश्र- ओम निश्चल

    इस अवसर पर राजकमल प्रकाशन से छपकर आईं उनकी पुस्तकें ‘प्रतिनिधि कहानियां’ और ‘प्रतिनिधि कविताएं: रामदरश मिश्र’ का लोकार्पण किया गया. इन दोनों ही पुस्तकों का संपादन प्रसिद्ध गीतकार और आलोचक ओम निश्चल ने किया है. इन पुस्तकों के अलावा लौट आया हूं मेरे देश (सर्वभाषा ट्रस्ट, दिल्ली), स्मृतियों के छंद (प्रलेक, मुंबई), कवि के मन से (नेटबुक्स, दिल्ली), रामदरश मिश्र : एक मूल्यांकन (हंस प्रकाशन), गांव की आवाज (हंस प्रकाशन) का भी रामदरश मिश्र जी के करकमलों से लोकार्पण किया गया.

    Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature, Poem

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