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सच्चिदानंद जोशी और चंद्र प्रकाश द्विवेदी 'दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार' से सम्मानित

'दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार' के लिए हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सच्चिदानंद जोशी और चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध चंद्रप्रकाश द्विवेदी को चयनित किया है.

'दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार' के लिए हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सच्चिदानंद जोशी और चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध चंद्रप्रकाश द्विवेदी को चयनित किया है.

हिंदी सेवा सम्मान योजना की शुरूआत वर्ष 1989 में हुई थी और वर्ष 2017 तक विभिन्न श्रेणियों में कुल 451 विद्वान सम्मानित किए जा चुके हैं.

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    KHS Hindi Sevi Awards: केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने अपने हिंदी सेवी पुरस्कार 2018 के लिए चुने गए हिंदी विद्वानों के नामों की घोषणा कर दी है.

    केंद्रीय हिंदी संस्थान ने ‘दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार’ (Deendayal Upadhyay Puraskar) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक तथा पटकथा लेखक चंद्रप्रकाश द्विवेदी को दिए जाने का ऐलान किया है.

    केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा (Kendriya Hindi Sansthan Agra) के उपाध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा जोशी (Anil Kumar Sharma Joshi) ने बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहे 26 विद्वानों को वर्ष 2018 के लिए विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा.

    सच्चिदानंद जोशी और चंद्र प्रकाश द्विवेदी को ‘दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार’
    केंद्रीय हिंदी संस्थान ने ‘दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार’ के लिए हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सच्चिदानंद जोशी और चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध चंद्रप्रकाश द्विवेदी को चयनित किया है.

    सच्चिदानंद जोशी (Sachchidanand Joshi) हिंदी के प्रकाण्ड विद्वान, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं. प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित सच्चिदानंद जोशी की पुस्तकें पलभर को पहचान, कुछ अल्प विराम और सच्चिदानंद जोशी की लोकप्रिय कहानियां काफी चर्चित रही हैं. एक कविता-संग्रह ‘मध्यांतर’ बहुत चर्चित हुआ है. पत्रकारिता के इतिहास पर इनकी दो पुस्तकें आ चुकी हैं. उनकी नई पुस्तक ‘पुत्रिकामेष्टि’ सामयिक प्रकाशन से छपकर आई है.

    चंद्रप्रकाश द्विवेदी (Chandraprakash Dwivedi) एक भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक हैं. चंद्रप्रकाश द्विवेदी चाणक्य (Chankya) के नाम से प्रसिद्ध हैं. इन्होंने वर्ष 1991 में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक चाणक्य का निर्देशन किया था. द्विवेदी ने इस धारावाहिक में चाणक्य की मुख्य भूमिका भी निभाई थी. वर्ष 2003 में चंद्रप्रकाश द्विवेदी की दूसरी प्रमुख फिल्म पिंजर थी. यह फिल्म अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित भारत के विभाजन के दौरान हिंदू-मुस्लिम तनावों के बीच एक दुखद प्रेम कहानी है.

    द्विवेदी का जन्म वर्ष 1960 में राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था. उनकी पूर्व पत्नी मंदिरा द्विवेदी के साथ उनकी एक बेटी नयनिका द्विवेदी है. द्विवेदी एक डॉक्टर हैं जिन्होंने भारतीय साहित्य में गहरी रुचि के कारण अपना पेशा छोड़ दिया और इसके बजाय थिएटर में काम करना शुरू किया.

    अनंत विजय और हेमंत शर्मा को ‘गणेश संकर विद्यार्थी’ सम्मान
    वरिष्ठ लेखक तथा पत्रकार अनंत विजय को भी केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा ने ‘गणेश संकर विद्यार्थी’ सम्मान (Ganesh Shankar Vidyarthi Puraskar) से सम्मानित किया है. अनंत विजय ने भागलपुर विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स (इतिहास) किया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट, बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की शिक्षा प्राप्त की. उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘प्रसंगवश’, ‘कोलाहल कलह में’, ‘लोकतंत्र की कसौटी’, ‘बॉलीवुड सेल्फी’ और ‘अमेठी संग्राम’ आदि काफी चर्चित रही हैं.

    माधव कौशिक और बालस्वरूप राही को ‘सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार’
    साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi) के उपाध्यक्ष और प्रसिद्ध साहित्यकार माधव कौशिक (Madhav Kaushik) को केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने ‘सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार’ (Subramania Bharati Puraskar) से सम्मानित किया है. हरियाणा के भिवानी में जन्में माधव कौशिक ने साहित्य की हर विधा में लेखन किया है. उनके खंड काव्य ‘सुनो राधिका’ और ‘लौट आओ पार्थ’ काफी चर्चित रहे हैं.

    ‘सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार’ के लिए हिंदी के प्रसिद्ध कवि बालस्वरूप राही (Bal Swaroop Rahi) का भी चयन किया गया है. बालस्वरूप राही हिंदी कवि और गीतकार हैं. उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों के लिए कई गीत लिखे हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रमुख के रूप में काम किया है.

    जिन हिंदी विद्वानों को पुरस्कार के लिए चुना गया है, वे इस प्रकार हैं-

    गंगा शरण सिंह पुरस्कार
    1- के. श्रीलता (केरल)
    2- बलवंत जानी (गुजरात)
    3- एल. वी. के. श्रीधरन (तमिलनाडु)
    4- राजेन्द्र प्रसाद मिश्र (ओडिशा)

    गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार
    1- अनंत विजय (बिहार)
    2- हेमंत शर्मा (बनारस, उत्तर प्रदेश)

    आत्माराम पुरस्कार
    1- कृष्ण कुमार मिश्र (जौनपुर, उत्तर प्रदेश)
    2- प्रेमव्रत शर्मा (गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश)

    सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार
    1- बालस्वरूप राही (दिल्ली)
    2- माधव कौशिक (हरियाणा)

    महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार
    1- नर्मदा प्रसाद उपाध्याय (मध्य प्रदेश)
    2- जयप्रकाश (चंडीगढ़)

    डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार
    1- हाइंस वरनर वैसलर (जर्मनी)
    2- शरणगुप्त वीरसिंह (श्रीलंका)

    पद्मभूषण डॉ. मोटूरी सत्यनारायण पुरस्कार
    1- स्वामी संयुक्तानंद (फीजी)
    2- मृदुल कीर्ति (अमेरिका)

    सरदार वल्लभ भाई पटेल पुरस्कार
    1- जीत सिंह जीत (दिल्ली)
    2- रवींद्र सेठ (गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश)

    दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार
    1- सच्चिदानंद जोशी (मध्य प्रदेश)
    2- चंद्र प्रकाश द्विवेदी (राजस्थान)

    स्वामी विवेकानंद पुरस्कार
    1- मनोज कुमार श्रीवास्तव (मध्य प्रदेश)
    2- सरोज बाला (पंजाब)

    पंडित मदन मोहन मालवीय पुरस्कार
    1- अतुल कोठारी (राजस्थान)
    2- राजकुमार भाटिया (दिल्ली)

    राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार
    1- रमेश चंद्र नागपाल (गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश)
    2- शैलेंद्र कुमार अवस्थी (लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

    केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा (Kendriya Hindi Sansthan Agra)
    केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा जोशी (Anil Kumar Sharma Joshi) ने बताया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग (भाषा प्रभाग) के अंतर्गत केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा विदेशी भाषा के रूप में हिंदी के शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान और बहुआयामी विकास के लिए कार्यरत एक शैक्षिक संस्था है. इसका संचालन स्वायत्त संगठन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल द्वारा किया जाता है.

    संस्थान के हिंदी सेवा सम्मान योजना (Hindi Sevi Samman Yojna) के अंतर्गत 12 पुरस्कार श्रेणियों में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 26 हिंदी सेवी विद्वानों को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है. पुरस्कृत विद्वानों को 5 लाख रुपये, शॉल तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है.

    हिंदी सेवा सम्मान योजना की शुरूआत वर्ष 1989 में हुई थी और वर्ष 2017 तक विभिन्न श्रेणियों में कुल 451 विद्वान सम्मानित किए जा चुके हैं.

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