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सच्चिदानंद जोशी के नए कहानी संग्रह 'पुत्रिकामेष्टि' का लोकार्पण

सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित सच्चिदानंद की पुस्तक 'पुत्रिकामेष्टि' तेरह कहानियों का संकलन है.

सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित सच्चिदानंद की पुस्तक 'पुत्रिकामेष्टि' तेरह कहानियों का संकलन है.

सच्चिदानंद जोशी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव हैं. उनकी कहानी, कविता, नाटक, व्यंग्य और ललित निबन्ध पर अनेक किताबें प्रकाशित हैं.

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    Book Release: हिंदी के सुप्रसिद्ध कहानिकार, कवि और पत्रकार सच्चिदानंद जोशी (Sachchidanand Joshi) के नए कहानी संग्रह ‘पुत्रिकामेष्टि’ (Putrikameshti) का लोकार्पण कांस्टीट्यूशन क्लब संपन्न हुआ.

    सामयिक प्रकाशन (Samayik Prakashan) द्वारा प्रकाशित इस कहानी संग्रह में तेरह कहानियां शामिल हैं. पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानन्द मिश्र, कवि और मीडिया विशेषज्ञ लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, कथाकार बलराम और कथाकार महेश दर्पण सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार ममता किरण ने किया.

    इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पुत्रिकामेष्टि (Putrikameshti) कथा कहने के लिए साहस चाहिए. समाज में जिन विषयों पर सोचना भी वर्जित है, वहां सहजता से उस बात को लिख जाना, एक धारा के विपरीत रचते लेखक के बस की ही बात है.

    सुप्रसिद्ध कवि और मीडिया विशेषज्ञ लक्ष्मी शंकर वाजपेयी (Laxmi Shankar Bajpai) ने कहा कि सच्चिदानंद जोशी की कहानियां गुदगुदाती हैं, व्यंग्य कसती हैं और अंत में पाठकों की आंखें नम कर देती हैं. उन्होंने कहा कि जोशी की कहानियां सिर्फ समाज का चेहरा नहीं दिखाती बल्कि धारा के विपरीत जाकर चेहरे को साफ करने की गुजारिश भी करती हैं.

    Laxmi shankar bajpayee

    वरिष्ठ कथाकार महेश दर्पण (Mahesh Darpan) ने कहा कि सच्चिदानंद जोशी की कहानियां किसी शिल्प के चमत्कार की मोहताज नहीं हैं. वे बिना किसी लाग लपेट के हैं और उनका सीधा-सपाट होना चेखव की याद दिलाता है.

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    प्रसिद्ध कथाकार बलराम (Balram) ने कहा कि आज हिंदुओं के पास हिंदू साहित्यकार है और मुसलमानों के पास मुसलमान लेखक मौजूद हैं लेकिन सच्चिदानंद जोशी की कहानी ‘नमाज’ बताती है कि लेखक किसी धर्म और धारा से बंधा नहीं होता वह सिर्फ अपने समय का होता है.

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अच्युतानंद मिश्र (Achyutanand Mishra) ने कहा कि सच्चिदानंद युवाओं की भाषा और उनका मन पढ़ते हैं यही कारण है कि उनके पूर्व प्रकाशित कहानी संग्रह युवाओं द्वारा सराहे गए.

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    उन्होंने कहा कि जोशी की लेखन शैली में अदभुत किस्सागोई है, वह कथाकार ही नहीं बहुत अच्छे कवि और पत्रकारिता के बहुत अच्छे जानकार हैं, उनका रंगमंच से भी बहुत गहरा नाता है, उनकी खासियत हैं कि वह हमेशा अनेक विधाओं में सक्रिय रहते हैं.

    सच्चिदानंद जोशी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव हैं. वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलसचिव तथा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति भी रहे हैं. सच्चिदानंद जोशी की कहानी, कविता, नाटक, व्यंग्य और ललित निबन्ध पर अनेक किताबें प्रकाशित हैं.

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