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स्वामी रामभद्रचार्य, रस्किन बॉन्ड और विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी फेलोशिप

साहित्य अकादमी ने फेलोशिप  की घोषणा कर दी है.

साहित्य अकादमी ने फेलोशिप की घोषणा कर दी है.

मराठी के विख्यात लेखक डॉक्टर भालचंद्र नेमाडे, मलयालम लेखिका एम. लीलावती सहित आठ लेखकों का साहित्य अकादमी फेलोशिप के लिए चयन किया गया है.

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Sahitya Akademi: साहित्य अकादमी ने फेलोशिप (Sahitya Akademi Fellowship) की घोषणा कर दी है.

साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के श्रीनिवासराव (Dr. K. Sheenivasarao) ने बताया कि साहित्य अकादमी फेलोशिप के लिए हिंदी में वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल, अंग्रेजी में रस्किन बॉन्ड, मराठी में डॉ. भालचंद्रा नेमडे, बंगाली में शीर्षेन्दु मुखोपाध्याय, पंजाबी के लिए डॉ. तेजवंत सिंह गिल, संस्कृत के लिए स्वामी रामभद्राचार्य, मलयालम लेखिका एम. लीलावती और तमिल साहित्य के लिए इंदिरा पार्थसारथी को चुना गया है.

शीर्षेन्दु मुखोपाध्याय (Shirshendu Mukhopadhyay)
शीर्षेन्दु मुखोपाध्याय बंगाली भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं. इनके द्वारा रचित एक उपन्यास मानव जमीन के लिए उन्हें सन् 1989 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्होंने अपने करियर की शुरूआत एक अध्यापक के रूप में की थी, लेकिन बाद में वे पत्रकार बन गए और आनंद बाजार पत्रिका समूह के लिए पत्रकारिता करने लगे. उन्होंने दो बार आनंद पुरस्कार, विद्यासागर पुरस्कार आदि से सम्मानित किया जा चुका है.

साहित्य अकादमी ने शीर्षेन्दु मुखोपाध्याय को वर्ष 2020 की फेलोशिप के लिए चुना है.

रस्किन बॉन्ड (Ruskin Bond)
अंग्रेजी के प्रख्यात लेखक रस्किन बॉन्ड भी साहित्य अकादमी फेलोशित 2020 के लिए चुने गए हैं. 1999 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था. उनकी कई रचनाओं पर फिल्में भी बन चुकी हैं. वर्ष 2014 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. अॅवर ट्रीज़ स्टिल ग्रो इन देहरा के लिए रस्किन बॉन्ड को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. अब उन्हें साहित्य अकादमी की फेलोशिप के लिए चुना गया है.

विनोद कुमार शुक्ल (Vinod Kumar Shukla)
विनोद कुमार शुक्ल हिंदी के प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार हैं. उनका पहला कविता संग्रह 1971 में ‘लगभग जय हिन्द’ नाम से प्रकाशित हुआ. 1979 में ‘नौकर की कमीज़’ नाम से उनका उपन्यास आया. इस उपन्यास पर मणिकौल ने इसी से नाम से फिल्म भी बनाई थी. उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए वर्ष 1999 में उन्हें ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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विनोद कुमाल शुक्ल की कहानियां ‘आदमी की औरत’ और ‘पेड़ पर कमरा’ पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन में फिल्म का निर्माण किया. ये फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 में ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ से सम्मानित हो चुकी हैं.

स्वामी रामभद्राचार्य (Swami Rambhadracharya)
जगद्गुरु रामभद्राचार्य एक प्रख्यात विद्वान्, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरु हैं. आप चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं.

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जगद्गुरु रामभद्राचार्य दो मास की आयु में नेत्र की ज्योति से रहित हो गए थे और तभी से प्रज्ञाचक्षु हैं. अध्ययन या रचना के लिए उन्होंने कभी भी ब्रेल लिपि का प्रयोग नहीं किया है. वे बहुभाषाविद् हैं और 22 भाषाओं बोलते हैं. उन्होंने 80 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है, जिनमें चार महाकाव्य (दो संस्कृत और दो हिन्दी में), रामचरितमानस पर हिन्दी टीका, अष्टाध्यायी पर काव्यात्मक संस्कृत टीका और प्रस्थानत्रयी (ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता और प्रधान उपनिषदों) पर संस्कृत भाष्य सम्मिलित हैं. उन्हें तुलसीदास पर भारत के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों में गिना जाता है.

भालचंद्र नेमाडे (Bhalchandra Nemade)
भालचंद्र नेमाडे प्रसिद्ध मराठी लेखक, उपन्यासकार, कवि, समीक्षक तथा शिक्षाविद हैं. केवल 25 वर्ष की आयु में प्रकाशित ‘कोसला’ नामक उपन्यास से उन्हें अपार सफलता मिली. सन 1991 में टीकास्वयंवर कृति के लिए भालचंद्र नेमाडे को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2014 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनकी प्रमुख कृतियों में ‘कोसला’ और ‘हिन्‍दू’ उपन्‍यास शामिल हैं.

साहित्य अकादमी ने अनुवाद के लिए भी पुरस्कारों की भी घोषणा कर दी है. साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं की 24 पुस्तकों को चुना है.

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