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साहित्य संसार: पाठक ही सबसे बड़ा आलोचक है और यह युग पाठकीय आलोचना का है

साहित्य संसार: पाठक ही सबसे बड़ा आलोचक है और यह युग पाठकीय आलोचना का है

साहित्यिक संस्था 'रचयिता' ने अपना पहला साहित्योत्सव नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में मनाया.

साहित्यिक संस्था 'रचयिता' ने अपना पहला साहित्योत्सव नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में मनाया.

शशिकांत मिश्र (Author Shashikant Mishra) ने 'नई हिंदी' पर बात करते हुए कहा कि आज की आलोचना नई हिंदी को नाट्यशास्त्र के पैमाने पर परखना चाहती है, जबकि नई हिंदी इसे तोड़ती है. सत्र की वक्ता रहीं अणुशक्ति सिंह (Author Anushakti Singh) ने कहा कि आज हम पॉपुलर कल्चर से अधिक वायरल कल्चर में जी रहे हैं.

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    Sahitya Sansar: साहित्यिक संस्था ‘रचयिता’ (Rachiyata) ने अपना पहला साहित्योत्सव नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान (Gandhi Shanti Pratishthan) में मनाया. चार सत्र के साथ इस एकदिवसीय कार्यक्रम में कई प्रसिद्ध रचनाकारों और पत्रकारों ने शिरकत की.

    पहला सत्र ‘पॉपुलर साहित्य, उसकी चुनौतियां और संभावनाओं’ पर था. इस सत्र के वक्ता नवीन चौधरी (Author Naveen Chaudhary) ने पॉपुलर साहित्य के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि पॉपुलर साहित्य वह साहित्य है जो लोकप्रिय है, जो लोगों से जुड़ा हुआ है.

    शशिकांत मिश्र (Author Shashikant Mishra) ने ‘नई हिंदी’ पर बात करते हुए कहा कि आज की आलोचना नई हिंदी को नाट्यशास्त्र के पैमाने पर परखना चाहती है, जबकि नई हिंदी इसे तोड़ती है. सत्र की वक्ता रहीं अणुशक्ति सिंह (Author Anushakti Singh) ने कहा कि आज हम पॉपुलर कल्चर से अधिक वायरल कल्चर में जी रहे हैं.

    दूसरा सत्र ‘गांधी और टैगोर के शिक्षा चिंतन के आईने में आज का भारत’ विषय पर रहा. जिसमें रामेश्वर राय (Author Rameshwar Rai) ने अपने संवाद में कहा कि गांधी, टैगोर और टॉलस्टाय की बुनियादी चिंता यह थी कि हमारी शिक्षा का जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं बन पा रहा है. गांधी को उल्लेखित करते हुए उन्होंने कहा कि आपके ज्ञान की जवाबदेही आपके आचरण के प्रति भी है.2

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    गरिमा श्रीवास्तव (Garima Srivastav) ने अपने संवाद में कहा कि शिक्षा पर व्यवस्थित ढंग से विचार करने वाले भारतीय टैगोर ही हैं. प्रवीण कुमार ने टैगोर के गोरा उपन्यास को उल्लेखित करते हुए कहा कि हमारी शिक्षा पद्धति में जो छेद है उसे ‘गोरा’ उपन्यास हमारे सामने लाता है.

    तीसरा सत्र, ‘आलोचना की परंपरा और पक्षधरता’ विषय पर था. इस सत्र में काफी गहमागहमी रही. सुजाता (Author Sujata) और राजीव रंजन गिरि (Rajiv Ranjan Giri) के बीच सहमति-असहमति की लंबी बहस चली. सुजाता ने अपने संवाद में कहा कि पाठक ही सबसे बड़ा आलोचक है और यह युग पाठकीय आलोचना का है.

    Hindi Sahitya

    चौथा सत्र और आखिरी सत्र काव्य पाठ का था, जिसमें हिंदी के बड़े और महत्वपूर्ण कवि विष्णु नागर (Kavi Vishnu Nagar), मदन कश्यप (Kavi Madan Kashyap) और कवयित्री रश्मि भारद्वाज (Kavi Rashmi Bhardwaj) और अनुपम सिंह (Kavi ANupam Singh) ने अपनी कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया. सुंदर कविताओं के साथ इस साहित्योत्सव का समापन हुआ.

    गांधी शांति प्रतिष्ठान का पूरा हॉल साहित्यिक पाठकों से भरा हुआ था. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में चारों सत्रों के संचालकों- साक्षी जोशी, साहिल कैरो, असीम अग्रवाल और ताजवर बानो का प्रमुख सहयोग रहा. धन्यवाद ज्ञापन लौह कुमार ने किया. कार्यक्रम के अंत में ‘रचयिता’ के संस्थापक पीयूष पुष्पम ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन कर ‘रचयिता’ द्वारा पुनः इस तरह के साहित्यिक कार्यक्रमों को कराए जाने की बात की.

    इस आयोजन में ‘राजपाल’ (Rajpal and Sons) और ‘राजकमल’ (Rajkamal Prakashan) की पुस्तक प्रदर्शनी भी लगी हुई थी जिसने पाठकों को अपनी ओर आकर्षित किया.

    Tags: Books, Hindi Literature

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