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Hindi Literature: तीन धाराओं से बनी संजय कुंदन की किताब 'ज़ीरो माइल पटना'

Hindi Literature: तीन धाराओं से बनी संजय कुंदन की किताब 'ज़ीरो माइल पटना'

ज़ीरो माइल एक ऐसी सीरीज़ है, जो हमारे चिर-परिचित शहरों को एक नयी नज़र से देखती है.

ज़ीरो माइल एक ऐसी सीरीज़ है, जो हमारे चिर-परिचित शहरों को एक नयी नज़र से देखती है.

संजय कुंदन छात्र जीवन से ही थियेटर और साहित्य-लेखन से जुड़ हुए हैं. उन्होंने ‘अंतत:’ नाम से अपना नाट्य दल बनाया और शहरों-गांवों में घूम-घूमकर नुक्कड़ और मंच नाटक किए. कई नाटक लिखे और अनेक में अभिनय और निर्देशन किया. उनके कई कहानी संग्रह और उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं.

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    Hindi Sahitya News: जिस तरह पटना तीन नदियों से घिरा है उसी तरह संजय कुंदन की किताब भी कहानी, उपन्यास और कविताओं से मिलाकर बनी है. यह कहना है सुपरिचित कथाकार और विचारक प्रेम कुमार मणि का. प्रेम कुमार पटना कॉलेज में आयोजित संजय कुंदन की पुस्तक ‘ज़ीरो माइल पटना’ के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे.

    उन्होंने कहा कि पटना में एक साथ उदारता और रूढ़िवादिता के तत्व रहे हैं. लेकिन यह शहर कुल मिलाकर सभी तरह के विचारों को जगह देता है. ‘ज़ीरो माइल पटना’ इस शहर पर और भी किताब लिखने को प्रेरित करेगी.

    प्रसिद्ध रंगकर्मी जावेद अख़्तर खां ने कहा कि संजय कुंदन की किताब पटना शहर को नए नजरिए से देखती है. यह संस्मरण की शैली में लिखी गई है लेकिन यह उससे आगे जाती है. यह उसके वर्तमान और भविष्य को भी टटोलती है. यह किताब बताती है कि यह शहर किस तरह हिंदी के अलावा बांग्ला, उर्दू, मैथिली और संस्कृति का भी केंद्र है.

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    ‘ज़ीरो माइल पटना’ किताब में कवि-कथाकार संजय कुंदन ने शहर के बुनियादी चरित्र को पहचानने की कोशिश करते हुए इसके जनजीवन की एक झांकी पेश की है. उन्होंने शहर में आ रहे बदलावों को रेखांकित किया है और इसकी कुछ स्थायी समस्याओं की चर्चा भी की है. ‘ज़ीरो माइल पटना’ पुस्तक न तो शहर का इतिहास है, न संस्मरण, न ही समाजशास्त्रीय विवेचन, लेकिन इसमें इन तीनों की ताक़त और रोचकता समाहित है. ज़ीरो माइल पटना उस शहर को लिखा एक प्रेम पत्र है – और हर प्रेम पत्र की तरह इसमें प्यार भी है, शिकायत भी, दुलार भी है, अनबन भी.

    पत्रकार ऋतु रोहिणी ने कहा कि यह किताब पटना शहर के आयामों को खोलती है. इसे पढ़कर पटना के सामाजिक विकास का पता चलता है. इससे नई पीढ़ी को अपने शहर के इतिहास से परिचित होने का अवसर मिलेगा.

    संजय कुंदन ने किताब के लिखे जाने की पृष्ठभूमि में कहा कि पटना उनके दिल में बसा हुआ है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वाम प्रकाशन विभिन्न शहरों पर ऐसी और भी किताबें लाने जा रहा है. कार्यक्रम की शुरुआत में प्रियदर्शी मातृशरण ने इंद्रधनुष संस्था का परिचय दिया और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. इस कार्यक्रम में अरुण कमल, तरुण कुमार, संतोष दीक्षित, शिव दयाल, अनिल विभाकर समेत अनेक कवि-लेखक, पत्रकार, संस्कृतिकर्मी, और रंगकर्मी उपस्थित थे.

    Tags: Hindi Literature, Literature, News18 bihar, Patna City

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