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Shree Krishna Nazmein: 'सब अपने हैं नहीं कोई भी बेगाना कनहैया का...' पढ़ें श्रीकृष्ण पर लिखी गईं मशहूर नज़्में

Shree Krishna Nazmein: 'सब अपने हैं नहीं कोई भी बेगाना कनहैया का...' पढ़ें श्रीकृष्ण पर लिखी गईं मशहूर नज़्में

श्री कृष्ण पर लिखी गईं नज़्में

श्री कृष्ण पर लिखी गईं नज़्में

Shree Krishna Nazmein: न सिर्फ भारत, बल्कि विदेश में भी कृष्ण भगवान के भक्त हैं. कान्हा हर किसी को बहुत प्यारे हैं. उनकी लीला और किस्से सबका मन मोह लेते हैं. हिंदू धर्म की मानयता के अनुसार, श्रीकृष्ण हर मुश्किल घड़ी में अपने भक्तों का साथ देते हैं और उनका ख्याल रखते हैं. पढ़ें, कृष्ण जी पर लिखी गईं मशहूर नज़्में

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    Shree Krishna Nazmein In Hindi: श्रीकृष्ण का जिक्र करते हुए कई बृज गीत, कविताएं और कहानियां तो आपने पढ़ी या सुनी होंगी लेकिन क्या आपने उनके ऊपर लिखी गईं नज्में पढ़ी हैं? कुछ साहित्य प्रेमियों ने बहुत खूबसूरती से कान्हा की लीलाओं और उनके किस्सों का बखान किया है. 

    आपको बता दें कि कृष्ण भगवान न सिर्फ भारत, बल्कि विदेश में पूजनीय हैं. उनके लाखों-करोड़ों प्रशंसक हैं. आज पढ़ें चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी, जूलियस नहीफ़ देहलवी और कँवल एम ए की नज़्में

    भगवान कृष्ण पर लिखी गईं नज़में (Lord Krishna Nazmein)

    श्री-कृष्ण– चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

    हैं जसोधा के लिए ज़ीनत-ए-आग़ोश कहीं
    गोपियों के भी तसव्वुर से हैं रू-पोश कहीं
    द्वारका-जी का बसाना तो मुबारक लेकिन
    कर न दें ब्रिज की गलियों को फ़रामोश कहीं
    खा के तंदुल कहीं ए’ज़ाज़ सुदामा को दिया
    साग ख़ुश हो के ‘बिदुर-जी’ का किया नोश कहीं
    ख़ुद बचन दे के ‘जरा’ सिंध से रन में भागे
    रहे बद-गोई-ए-शिशुपाल पे ख़ामोश कहीं
    द्वारका-धीश कहीं बन के मुकुट सर पे रखा
    काली कमली रही जंगल में सर-ए-दोश कहीं
    गोपियाँ सुन के मुरलिया हुईं ऐसी बेताब
    गिर गए हार कहीं रह गई पा-पोश कहीं
    मध-भरे नैन से आँखें न मिलाओ ‘कैफ़ी’
    लोग मशहूर न कर दें तुम्हें मय-नोश कहीं

    कृष्ण-कनहैया– जूलियस नहीफ़ देहलवी

    जो सुन लेता है गोश-ए-दिल से अफ़्साना कनहैया का
    वो हो जाता है सच्चे दिल से दीवाना कनहैया का
    नज़र आती है जिस को ख़्वाब में वो सूरत-ए-दिलकश
    वो अपना दिल बना लेता है काशाना कनहैया का
    सुरूर-ओ-कैफ़ की मिलती है उस को लज़्ज़त-ए-दाइम
    लगा लेता है होंटों से जो पैमाना कनहैया का
    तुम अपना हाथ फैलाओ ज़रा साक़ी की महफ़िल में
    कि बाँटा जा रहा है आज पैमाना कनहैया का
    किसी पर बंद होने का नहीं मय-ख़ाना-ए-उलफ़त
    चले आओ खुला रहता है मय-ख़ाना कनहैया का
    कनहैया की मोहब्बत में जो जाँ पर खेल जाता है
    उसे सब लोग कह देते हैं दीवाना कनहैया का
    ‘नहीफ़’ अपने पराए सब इसी के दिल में रहते हैं
    सब अपने हैं नहीं कोई भी बेगाना कनहैया का

    भगवान ‘कृष्ण’ की तस्वीर देख कर– कँवल एम ए

    मुझे तेरे तसव्वुर से ख़ुशी महसूस होती है
    दिल-ए-मुर्दा में भी कुछ ज़िंदगी महसूस होती है
    ये तारों की चमक में है न फूलों ही की ख़ुश्बू में
    तिरी तस्वीर में जो दिलकशी महसूस होती है
    तुझे मैं आज तक मसरूफ़-ए-दर्स-ओ-वा’ज़ पाता हूँ
    तिरी हस्ती मुकम्मल आगही महसूस होती है
    ये क्या मुमकिन नहीं तू आ के ख़ुद अब इस का दरमाँ कर
    फ़ज़ा-ए-दहर में कुछ बरहमी महसूस होती है
    उजाला सा उजाला है तिरी शम-ए-हिदायत का
    शब-ए-तीरा में भी इक रौशनी महसूस होती है
    मैं आऊँ भी तो क्या मुँह ले के आऊँ सामने तेरे
    ख़ुद अपने-आप से शर्मिंदगी महसूस होती है
    तख़य्युल में तिरे नज़दीक जब मैं ख़ुद को पाता हूँ
    मुझे उस वक़्त इक-तरफ़ा ख़ुशी महसूस होती है
    तू ही जाने कहाँ ले आई मुझ को आरज़ू तेरी
    ये मंज़िल अब सरापा बे-ख़ुदी महसूस होती है
    ‘कँवल’ जिस वक़्त खो जाता हूँ मैं उस के तसव्वुर में
    मुझे तो ज़िंदगी ही ज़िंदगी महसूस होती है(साभार-रेख़्ता)

    Tags: Books, Literature, Lord krishna

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