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"सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज" पुस्तक का लोकार्पण

"सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज" पुस्तक ऐतिहासिक एवं प्रामाणिक साक्ष्यों को प्रस्तुत करती है जिनसे सुभाषचन्द्र बोस नेताजी सुभाष बने.

"सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज" पुस्तक ऐतिहासिक एवं प्रामाणिक साक्ष्यों को प्रस्तुत करती है जिनसे सुभाषचन्द्र बोस नेताजी सुभाष बने.

"सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज" पुस्तक सुभाषचन्द्र बोस के जीवन के अनेक अनसुलझे पहलुओं को सुलझाती है. उनके विवाह और म ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली : सुभाषचंद्र बोस की 126वीं जयंती के अवसर पर कल शाम आईटीओ स्थित सुरजीत भवन सभागार में अशोक तिवारी की किताब “सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज” के लोकार्पण किया गया. पुस्तक का लोकार्पण आलोचक गोपाल प्रधान, बीपी पांडेय और साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित नासिरा शर्मा ने किया. कार्यक्रम का संचालन आलोक मिश्र ने किया.

इस अवसर पर लेखक अशोक तिवारी ने कहा कि उन्हें याद है 1997 की एक शाम जब डॉ. ललित शुक्ल ने इस किताब पर काम करने जिम्मेवारी सौंपी थी. उसके बाद फ्रीडम मूवमेंट को पढ़ने और लिखने का सिलसिला दर सिलसिला शुरू हुआ तो होता ही चला गया. और अब वह अध्ययन एक किताब के रूप में आप सभी के सामने है.

शिक्षाविद बी.पी. पांडेय के बारे में कहा कि इसे एक बार में पढ़ा जाना और उसे एक बार में ही समझ पाना मुश्किल है जब तक आप इसका विश्लेषण नहीं करेंगे, आप समझ नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा, बराबरी से देखो, सुभाष से सीखो.

वरिष्ठ आलोचक गोपाल प्रधान ने कहा कि वाल्टर बेंजामिन ने लिखा “फैसिस्टो से जितना खतरा है उससे ज्यादा खतरा मृतकों से हैं.” उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों को सही रूप से सामने लाया जाना चाहिए जिसके लिए यह किताब बहुत महत्वपूर्ण है.

अब ना रावण की कृपा का भार ढोना चाहता हूं, आ भी जाओ राम मैं मारीच होना चाहता हूं

वरिष्ठ लेखिका नसिरा शर्मा ने कहा कि हमारी तारीख ऐसी नहीं थी की हम लड़ सकें क्योंकि तब लोग सिर्फ हड्डी के ढांचे के समान थे. सुभाष चंद बोस तब एक हिम्मत बन के आए. आज के बच्चे इस किताब को पढ़कर सुभाष को करीब से जानेंगे. उन्होंने कहा कि जितना मुझे पता है कि आज के बच्चे सुभाष को इतना ज्यादा नहीं जानते होंगे जिसके बीच यह पुस्तक एक पुल का काम करेगी.

अशोक तिवारी की पुस्तक “सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज” का संपादन मोनिका मिश्रा और अंशु चौधरी ने किया है. यह पुस्तक प्रभाकर प्रकाशन से छपकर आई है.

पुस्तक के बारे में
सुभाषचंद्र बोस के जीवन की तमाम गुत्थियों और मनोभावों को उजागर करती हुई यह पुस्तक भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी कहती है. जीवन के प्रति आध्यात्मिक दृष्टिकोण से लेकर सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों तक सुभाष सदैव वैज्ञानिक एवं तार्किक फलसफे के हामी रहे. समाजवाद के पक्षधर सुभाष का आई.सी.एस. के लिए ब्रिटेन जाने से लेकर आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने तक एकमात्र सपना था- आज़ाद भारत. यह पुस्तक उन सभी ऐतिहासिक और प्रामाणिक साक्ष्यों को प्रस्तुत करती है जिनसे सुभाषचन्द्र बोस नेताजी सुभाष बने.

Tags: Books, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature

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