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महात्मा गांधी, नाम नहीं एक पूरी दुनिया... घर बैठे आप लीजिए इसका अनुभव, पर इतना कुछ है यहां कि उम्र कम पड़ जाए!

महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े तमाम रोचक फैक्ट्स एक जगह सुरक्षित किए जा रहे हैं.

महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े तमाम रोचक फैक्ट्स एक जगह सुरक्षित किए जा रहे हैं.

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श्रीमदभगवद्गीता के सार अनुवाद को भी जोड़ लें, तो महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में कुल 8 किताबें लिखीं. इसका मतलब है कि छपे हुए करीब 5000 पेज. फिर उनके पत्रों और जीवन भर इधर-उधर छपे लेखों को भी जोड़ लीजिए तो और इतने ही पृष्ठ. लेकिन महात्मा की महान विरासत को एक पोर्टल पर पूरी शिद्दत के साथ संजोया गया है, जहां 30 लाख डिजिटल पन्नों में एक विराट् जीवन बिखरा पड़ा है. यही नहीं, हर साल इस पोर्टल पर 1 लाख नये पन्ने जुड़ रहे हैं. इस महाजीवन को खंगालने के लिए पूरी दुनिया से तथ्य जुटाकर 100 खंडों में एक कोश तैयार किया गया, ‘कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी’, ये सभी खंड एक जगह सुरक्षित हैं. साहित्य अध्येता, शोधार्थी और गांधी प्रेमियों को शायद और कहीं भटकने की ज़रूरत न पड़े इसलिए इस पोर्टल और भी ऐसी सुविधाएं हैं, जो आपको चौंका भी सकती हैं.

वेबसाइट या पोर्टल जैसे शब्द आते ही पहली प्रतिक्रिया यह हो सकती है कि तकनीक विषयक कोई चर्चा है. साहित्य, संस्कृति और धरोहर का संरक्षण करने के अर्थ में इसे आधुनिक पुस्तकालय के तौर पर समझा जाना चाहिए. गांधी की विरासत को सहेज रहा यह पोर्टल वास्तव में पुस्तकालय से भी अधिक संग्रहालय और दर्शनालय भी है. क्या यह आपको किसी चमत्कार से कम नहीं लगता कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठे हों, साबरमती आश्रम, गुजरात विद्यापीठ, मणि भवन, सदाकत आश्रम या सेवाग्राम जैसी क़रीब 28 जगहों को आप लाइव घूम सकते हैं! ये वो जगहें हैं, जहां से गांधी जी का गहरा ताल्लुक रहा और इसी पोर्टल पर आप यहां टूर या भ्रमण कर सकते हैं और वह भी एक-एक कोने का.

कैसे करें लाइव टूर?

पोर्टल पर दिए गए गांधी हेरिटेज साइट्स वर्टिकल पर जाएं और जिस स्थान को आप देखना चाहते हैं, उसे चुन लें. इसके बाद आपके सामने वह स्थान मुख्य द्वार से खुल जाएगा और दिशा, लोकेशन व कक्ष विशेष आदि की सूचना देने वाले चिह्नों की मदद से आप बिल्कुल इस तरह घूम सकते हैं, जैसे आप सच में उसी स्थान पर हों. इस लाइव टूर में कई तरह की सुविधाएं हैं. यहां आप एक खास किस्म की ऐनक लगाकर आप वह थ्रीडी अनुभव तक कर सकते हैं, जो लगभग वास्तविक होता है.

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महात्मा गांधी से जुड़े दुर्लभ साहित्य का भंडार सहेजा गया है. (चित्र- साभार गांधी हेरिटेज पोर्टल)

शब्दों का भंडार कितना है?

लाखों पृष्ठ पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं. गांधी जी के लिखे शब्दों के साथ ही उनके बारे में लिखे गए तमाम महत्वपूर्ण शब्दों को यहां सहेजा जा रहा है. सबसे बड़ा कारनामा शायद यही है कि यहां 100 खंडों वाला वह संपूर्ण ग्रंथ डिजिटल आर्काइवल संस्करण के तौर पर मौजूद है, जो आपको शायद ही अन्यत्र मिले. यह सूचना प्रसारण मंत्रालय ने गांधी की विरासत को सहेजने के लिए एक खास योजना के तहत प्रकाशित किया था. 1956 से 1994 के बीच ये 100 खंड प्रकाशित किए गए और तमाम देशों को एक अप्रतिम भेंट के रूप में दिए भी गए. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों को भारत यह उपहार दे चुका है. इन ग्रंथों में दुनिया भर से गांधी जी के बारे में तमाम जानकारियां और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के साथ ही संस्मरण आदि जुटाए जाने का दावा है.

कहां-कहां से मिलता है साहित्य?

साबरमती आश्रम की लाइब्रेरी में करीब 55 हज़ार किताबें हैं, लेकिन पोर्टल पर सिर्फ गांधीजी केंद्रित किताबों को ही अपलोड किया जा रहा है. इसके अलावा देश और दुनिया में अनेक लाइब्रेरियों और संग्रहालयों से पोर्टल संपर्क कर महत्वपूर्ण किताबों व सामग्री को डिजिटल रूप में सहेज रहा है. गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, बंगाल जैसे करीब दर्जन भर राज्यों के प्रमुख केंद्रों और गांधी के अध्येताओं के साथ पोर्टल जुड़कर प्रामाणिक सामग्री प्राप्त करता है.

साउथ अफ्रीका से कैसे मिला साहित्य?

गांधी जीवन में दक्षिण अफ्रीका का समय बेहद महत्वपूर्ण रहा है. यहां गांधीजी की गतिविधियों, आंदोलन, चेतना और उनका कर्म परिष्कृत हुआ था. निसंदेह दक्षिण अफ्रीका में आज भी गांधीजी से जुड़ा बहुमूल्य साहित्य सुरक्षित है. जब पोर्टल को यह साहित्य चाहिए था, तब विदेश मंत्रालय के ज़रिये संपर्क किया गया. अफ्रीका ने भौतिक रूप से तो किताबें देने में असमर्थता जताई लेकिन पुराने ऐतिहासिक ग्रंथ व दस्तावेज़ों से जुड़े करीब 25000 पेज पोर्टल को डिजिटल रूप में सौंपे.

और क्या है जो सुखद आश्चर्य हो?

1. आप इस पोर्टल पर गांधी जी की आवाज़ की ओरिजनल रिकाॅर्डिंग्स सुन व देख सकते हैं, जो उनके चुनिंदा भाषणों या वक्तव्यों आदि की क्लिप्स हैं.

2. सूचनाओं को इस तरह से बारीकी से संजोया गया है कि शोध के लिए तमाम साक्ष्य और प्रिंट के लिए हर तरह की सहूलियत रहे.

3. यहां गांधी जी के जीवनकाल में छपे चुनिंदा कार्टून्स भी हैं और वो भी उनसे जुड़े संदर्भों के साथ.

4. कई यादगार, ऐतिहासिक और रोचक तस्वीरें इस पोर्टल पर सुरक्षित हैं. गांधीजी के समय के कई महत्वपूर्ण पत्र, पत्रिकाएं, दस्तावेज़ और उनकी हस्तलिखित पुस्तक भी यहां है.

5. यह भी अहम है कि यह पोर्टल कंटेंट को भले ही अंग्रेज़ी, हिन्दी और गुजराती में प्राथमिक तौर पर उपलब्ध करवा रहा है, लेकिन इस पोर्टल को एक दर्जन से ज़्यादा भाषाओं में आप संचालित कर सकते हैं.

आने वाले समय में उपयोगिताएं कैसे बढ़ेंगी?

चाहे गांधीजी की हस्तलिखित पुस्तक हो या और भी तमाम पुस्तकें, इस पोर्टल पर अभी पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं. जल्द ही इन्हें सुना जा सकेगा. ऑडियो बुक की सुविधा पहले अंग्रेज़ी में यहां उपलब्ध करवाई जाएगी और उसके बाद हिन्दी व गुजराती में. अंग्रेज़ी में यह प्रोजेक्ट लगभग तैयार है और अगले कुछ ही हफ्तों में इसे लाॅन्च किया जा सकता है.

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एक सहपाठी के साथ गांधी जी का यादगार चित्र. (साभार गांधी हेरिटेज पोर्टल)

अब आप यह चित्र देखकर कैसे पता लगाएंगे कि गांधीजी कौन हैं? मान लीजिए कि चित्र की जानकारी भी आपको दे दी जाए कि अपने सहपाठी शेख महताब के साथ मोहनदास बैठे हुए हैं. अब क्या आप पहचान सकेंगे? वास्तव में यह एक अनूठा चित्र है, जब दोनों सहपाठियों ने एक-दूसरे की टोपी पहनकर तस्वीर खिंचवाई थी. और भी कई समूह चित्र हैं, जिनमें यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन व्यक्ति चित्र में कहां है. इस दुविधा को दूर करने के लिए अब चित्रों में टैगिंग की जा रही है. यानी चित्र में हर चेहरे पर उंगली या कर्सर रखते ही आपको नाम दिख जाएगा. और भी कई तकनीकी फीचर जोड़े जा रहे हैं ताकि गांधी जीवन, साहित्य और सरोकार से जुड़ी ये तमाम धरोहर हर वर्ग, वर्ण, देश-काल और हर रुचि के व्यक्ति के लिए सहजता, सरलता से सदा उपलब्ध रहे.

(यह लेख उन तथ्यों पर आधारित, जो अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम परिसर में गांधी हेरिटेज पोर्टल के आईटी प्रमुख विराट कोठारी ने एक विशेष संवाद करते हुए भवेश दिलशाद के साथ साझा किए.)

Tags: Gandhi Jayanti, Mahatma gandhi

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