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वॉक्स पॉपुली पार्लियामेंटेरियन डिबेट में शामिल होंगे राजनीतिक गलियारों के दिग्गज


वॉक्स पॉपुली पार्लियामेंटेरियन डिबेट का फाइल फोटो

वॉक्स पॉपुली पार्लियामेंटेरियन डिबेट का फाइल फोटो

इस वर्ष की चर्चा के पैनलिस्टों में सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी (भाजपा), विवेक कृष्ण तन्खा (कांग्रेस), संत बलबीर सीचेवाल (आम ...अधिक पढ़ें

‘वैली ऑफ वर्ड्स’ अंतरराष्ट्रीय कला और लिटरेचर फेस्टिवल का मानना है कि साहित्य, कला, विचार-विमर्श के प्रयासों में दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की शक्ति है.

इस लिटरेचर फेस्टिवल का एक महत्वपूर्ण और देखा जाने वाला खंड वॉक्स पॉपुली पार्लियामेंटेरियन डिबेट रहा है जिसका संचालन डॉ. आमना द्वारा किया गया. इस वर्ष यह डिबेट 13 नवंबर को व्यापक प्रसार के लिए ‘वैली ऑफ वर्ड्स लिटरेचर फेस्टिवल’ के दौरान प्रसारित की जाएगी. इस डिबेट में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति आदि के महत्व पर एक स्वतंत्र चर्चा करने के लिए शामिल होते हैं.

इस वर्ष बहस का विषय है कि “दो अंकों की वृद्धि दर केवल शहरीकरण से ही संभव है”. यह एक ऑनलाइन सत्र होगा जिसे दुनियाभर के एनडीएलआई और फेयर ऑब्जर्वर प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाएगा.

इस वर्ष की चर्चा के पैनलिस्टों में सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी (भाजपा), विवेक कृष्ण तन्खा (कांग्रेस), संत बलबीर सीचेवाल (आम आदमी पार्टी), प्रो. मनोज कुमार झा (राजद), डॉ. अमर पटनायक (बीजद), के. राव (टीआरएस), डॉ. वी. शिवदासन (सीपीआईएम), और लवू श्री कृष्ण देवरायलु (वाईआरएससी) के साथ देशबंधु समाचार पत्र और देशबंधु लाइव समूह के संपादक राजीव रंजन श्रीवास्तव शामिल हैं.

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इस वर्ष की बहस को शिक्षाविद, लेखक, सामाजिक उद्यमी डॉ. आमना ने क्यूरेट किया है. डॉ. आमना ने कहा कि हमारे जीवन को रचनात्मक चर्चाओं की जरूरत है और आज हमारी समझ के क्षेत्र में जन प्रतिनिधियों के विचारों ने नए आयाम जोड़े हैं. इन वाद-विवाद के कार्यक्रमों में सभी सांसदों के विचार रचनात्मक दृष्टिकोण पेश करते हैं जो कि सार्वजनिक क्षेत्र में मुद्दों को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

इस फेस्टिवल के संचालक, इतिहासकार और विश्लेषक डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा कि इस फेस्टिवल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि अपने विचार साझा करने व सार्थक संवाद के लिए सांसदों का ऐसा विविध पैनल

हमारी बोर्ड ऑफ गवर्नर डा. आमना अपने प्रायसों से साथ लेकर आई है. शहरीकरण और वृद्धि दर के विषय पर चर्चा के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है और इसके लिए यह वो क्षण है जो भारत की स्वतंत्रता के अमृत काल को चिन्हित करेगा.

Tags: Literature, Literature and Art

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