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रानी लक्ष्मीबाई से लेकर सुभाष बोस, शहीदों के बलिदान की साक्षी मिट्‌टी का संग्रहालय, जानें खासियत

Bhopal News: प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. नारायण ने बगैर सरकारी मदद के इस अनूठे संग्रहालय की स्थापना की है.

Bhopal News: प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. नारायण ने बगैर सरकारी मदद के इस अनूठे संग्रहालय की स्थापना की है.

Bhopal Unique Museum: देश की आजादी के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वाले महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के जन्म व ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

झांसी की रानी लक्ष्मी बाई से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कुल 150 महापुरुषों के जन्म-बलिदान स्थलों की माटी का अनूठा संग्रह है.
डा. व्यास 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर संग्रहालय में बलिदानियों के जन्म स्थल व बलिदान स्थलों की माटी की प्रदर्शनी लगाएंगे.
'इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान' के नाम से अभियान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से शुरू किया जाएगा.

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शहीदों के जन्मस्थानों और बलिदान स्थलों की माटी लाकर एक संग्रहालय बनाया है. भोपाल के कोलार क्षेत्र की फाइन एवेन्यू कॉलोनी में बगैर सरकारी मदद के इस संग्रहालय को पुरातत्वविद डॉ. नारायण ने स्थापित किया है. वह कहते हैं कि इस मिट्‌टी में शहादत और मातृभूमि के प्रति प्रेम की खूशबू है. यहां रानी लक्ष्मीबाई और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कुल 150 महापुरुषों के जन्म-बलिदान स्थलों की माटी का संग्रह है.

डॉ. व्यास ने बताया कि वे सालभर से महापुरुषों से संबंधित जानकारी एकत्रित कर रहे हैं. उनके जन्म व बलिदान स्थलों की मिट्टी अलग-अलग बॉक्स में भरकर अपने घर में बने निजी संग्रहालय में रख लेते हैं. डॉ. व्यास 26 जनवरी को इन माटियों की प्रदर्शनी लगाएंगे.

प्रदेश के शहीदों को दी प्रमुखता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म भूमि कटक, डॉ. भीमराव आंबेडकर की महू, रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान स्थल ग्वालियर, लाल बहादुर शास्त्री के जन्म स्थल बनारस, चंद्रशेखर आजाद का बलिदान स्थल प्रयागराज आजाद पार्क से मिट्‌टी लाई गई है. साथ ही भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए छतरपुर के दशरथ जैन, शुजालपुर से पंडित लीलाधर जोशी, राणा बख्तावर सिंह का समाधि स्थल इंदौर, कुंवर चैन सिंह की छतरी सीहोर, तात्या टोपे स्मारक शिवपुरी आदि जगह से भी प्रदेश के शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों से सम्बंधित जगहों से की मिट्‌टी लाई गई है.

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पाषाण काल के औजारों से लेकर डाक टिकटों का है संग्रह
डॉ. व्यास पुरातत्व अधीक्षक रहे हैं. 2009 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पाषाण काल के पत्थरों के औजारों का संग्रह करना शुरू किया है. डाक टिकटों, सिक्कों सहित कई अनूठी वस्तुओं का संग्रह भी शुरू किया. वे बताते हैं कि एक साल पहले लोगों को अमर बलिदानियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जानकारी देने का ख्याल आया. चूंकि मिट्‌टी या मातृभूमि से सबका लगाव होता है तो उनके जन्म व बलिदान स्थल की मिट्टी से सबको जोड़ने के लिए काम करना शुरू कर दिया.

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‘इस मिट्‌टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान की’
डॉ. व्यास ने बताया कि बलिदानियों के जन्म व बलिदान स्थलों की माटी लोगों दिखाने का अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा. ‘इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान’ के नाम से अभियान अभी भोपाल से 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से शुरू किया जाएगा.

Tags: Freedom fighters, Freedom Movement, Indian Government, Republic day

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