आजादी के 72 साल बाद रोशन हुआ मध्य प्रदेश का यह गांव, छलके खुशी के आंसू

मध्यप्रदेश के धामनिया गांव में 72 साल पहुंची बिजली

मध्यप्रदेश के धामनिया गांव में 72 साल पहुंची बिजली

धामनिया गांव में जब बिलजी पहुंची तो ग्रामीणों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. गांव के लोग पहली बार अपने घर में बैठकर टीवी पर स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय कार्यक्रम देख रहे हैं.

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मध्य प्रदेश का एक गांव ऐसा भी है, जहां साल 2018 का स्वतंत्रता दिवस की खुशियां लंबे समय से फैले अंधेरे को दूर कर फैले उजाले में मनाई जा रही है. मालवा जिले के धामनिया गांव में करीब दो माह पहले सौभाग्य लक्ष्मी योजना के तहत 72 सालों में पहला बल्ब जला.

धामनिया गांव में जब बिलजी पहुंची तो ग्रामीणों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. गांव के लोग पहली बार अपने घर में बैठकर टीवी पर स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय कार्यक्रम देख रहे हैं. सालों तक अंधेरे में रहने के बाद जब इस गांव में रोशनी पहुंची को अब बच्चों का भविष्य भी संवरता दिखाई दे रहा है.

इस गांव की आबादी कभी हजारों की संख्या में थी, लेकिन बिजली व मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण ग्रामीण शहरों और कस्बों की तरफ पलायन कर गये. आज इस गांव की कुल जनसंख्या करीब 200 ही बची है, लेकिन लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार बिजली यहां पहुंची. अब ग्रामीणों को यहां के हालात बदलने की उम्मीद दिखाई दे रही है.



बिजली के अभाव में चिमनी की रोशनी में बच्चों को पढ़ता देख गरीब माता-पिता दुखी होते रहे, लेकिन अपनी जमीन और गांव छोड़कर शहरों की तरफ नहीं जा पाए. बिजली के कारण ही गांव के कई युवकों की शादियां नहीं हो पाईं. देश को कई दशकों पहले आजादी मिल गई, लेकिन इस गांव को सही मायनों में अपने स्वतंत्रता दिवस का अहसास हो रहा है.

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