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    आगर: BJP के प्रभाव वाली वो सीट, जहां कांग्रेस प्रत्याशी को नकुलनाथ ने की जमाई बनाने की मांग

    आगर सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है.
    आगर सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है.

    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आगर विधानसभा उपचुनाव 2020 (Assembly Election 2020) के मैदान में उतरे 8 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मंगलवार को ईवीएम (EVM) में कैद हो जाएगा.

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    आगर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आगर विधानसभा उपचुनाव 2020 (Assembly Election 2020) के मैदान में उतरे 8 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मंगलवार को ईवीएम (EVM) में कैद हो जाएगा. आगर विधानसभा सीट के इतिहास पर नजर डाली जाए तो यहां पर हमेशा से कांग्रेस और भाजपा में ही मुख्य मुकाबला देखने को मिला है. इस बार भी दोनों ही प्रमुख पार्टियों में मुख्य मुकाबला देखने को मिला है. कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए गए विपिन वानखेड़े के प्रचार की इस बार कमान कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के मंत्री रहे जयवर्धन सिंह ने संभाल रखी थी.

    जयवर्धन सिंह विपिन वानखेड़े के साथ लगातार क्षेत्र के ग्रामों में दौरे किए, परंतु प्रचार के अंतिम दिनों में जयवर्धन सिंह कोरोना के शिकार हो गए, जिसके चलते उन्हें चुनाव प्रचार से दूरी बनानी पड़ी. उनके अलावा कांग्रेश की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए दो बार सभाएं की. इसके अलावा कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह, नकुल नाथ, आचार्य प्रमोद कृष्णन, सचिन पायलेट, जीतू पटवारी, सज्जन सिंह वर्मा ने भी कांग्रेस के लिए चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

    बीजेपी से भी युवा प्रत्याशी
    आगर से विधायक रहे स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद बीजेपी ने उनके बेटे मनोज ऊंटवाल को मैदान में उतारा. मनोज ऊंटवाल के प्रचार की कमान उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने संभाल कर रखी. भाजपा ने अपनी परंपरागत सीट पर पूरी एड़ी से चोटी का जोर लगा कर रखा. भाजपा ने लगातार इस सीट पर एक के बाद एक नेताओं की सभाएं की. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 बार सभा की व आगर में रोड शो भी किया. उनके अलावा भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, थावरचंद गहलोत, वीडी शर्मा, नरेंद्र सिंह तोमर, मोहन यादव, ओमप्रकाश सकलेचा, पारस जैन ने भी इस सीट के लिए चुनावी सभाओं को संबोधित कर मतदाताओ से वोट की अपील की.
    इसलिए याद किया जाएगा उपचुनाव


    आगर उपचुनाव इस बार बयानों के मामलों में भी याद किया जाएगा. एक के बाद एक दोनों ही पार्टियों के नेताओ की ताबड़तोड़ सभाओं में कई विवादित बयान भी सामने आए. भाजपा के सांसद महेंद्र सोलंकी ने एक सभा में अपने संबोधन में स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल की मौत के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार बता दिया तो कांग्रेस के लिए आखिरी सभा मे संबोधन के दौरान कांग्रेस नेता नकुलनाथ ने कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े को दूल्हा बताते हुए क्षेत्र की जनता से उन्हें अपना जमाई बनाने की अपील कर दी. इसके अलावा चुनावी सभा मे अपने भाषणों में राम रावण से लेकर महाभारत के पात्रों को भी भुनाकर नेताओ ने एक दूसरे पर जमकर शब्दो के बाण चलाए.

    ये हैं प्रमुख मुद्दे
    आगर विधानसभा की इस सीट पर किसान, बेरोजगारी, फोरलेन सड़क व रेल का मुद्दा इस बार भी दिखाई दिया. यातायात के भारी दबाव व दुर्घटनाओं के कारण लगातार वर्षो से उज्जैन से चवली मार्ग को फोर लेन में बदलने की मांग क्षेत्र की जनता कर रही है. इसके अलावा क्षेत्र के विकास के लिए रेल लाइन की मांग भी इस बार भी दिखाई दी. किसानों को रिझाने के लिए कांग्रेस ने कर्ज माफी के मुद्दे को जमकर भुनाने की कोशिश की तो भाजपा ने भी इस मुद्दे को यह कहकर की वादे के बावजूद कांग्रेस ने कर्ज माफ नहीं किया जमकर भुनाने की कोशिश की। दोनो ही पार्टियों ने किसानों को रिझाने की हर संभव कोशिश की.

    आगर विधानसभा सीट का इतिहास
    आगर विधानसभा में 15 आम चुनाव हो चुके हैं, जबकि 2013 के बाद इस बार दूसरा उपचुनाव हो रहा हैं. दोनों ही उपचुनाव पूर्व मंत्री व सांसद मनोहर ऊंटवाल के कारण 2014 में उपचुनाव हुआ था, तब उन्होने विधानसभा से इस्तीफा दे कर सांसद का चुनाव लड़ा था. इस बार का उपचुनाव मनोहर ऊंटवाल के निधन के कारण हो रहा है. आगर विधानसभा सीट ऐसी हैं जहां से स्व. मदनलाल भंड़ारी को छोड़ कर कोई भी व्यक्ति लगातार दूसरा चुनाव नहीं जीत पाया. स्व. भुरेलाल फिरोजिया को आगर से दुसरी बार विधायक बनने के लिए 8 तो गोपाल परमार को 16 इंतजार करना पड़ा.

    मात्र 4 बार जीते हैं यहा से कांग्रेस प्रत्याशी
    आगर विधानसभा सीट को जनसंघ व भाजपा का गढ़ माना जाता है. सन् 1952 में कांग्रेस के सौभाग्यमल जैन के चुनाव जीतने के 20 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई थी, तब मधुकर मरमट यहां से चुनाव जीते थे तो सन 1985 में शकुंतला चैहान व 1998 में रामलाल मालवीय ने जीत दर्ज की थी. सन् 2003 से यह सीट लगातार भाजपा के कब्जे में हैं.
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