• Home
  • »
  • News
  • »
  • madhya-pradesh
  • »
  • आगर : BJP के गढ़ में इस बार प्रचार और प्रत्याशी चयन में बाज़ी मार ले गयी कांग्रेस

आगर : BJP के गढ़ में इस बार प्रचार और प्रत्याशी चयन में बाज़ी मार ले गयी कांग्रेस

आगर सीट बीजेपी विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन से खाली हुई है

आगर सीट बीजेपी विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन से खाली हुई है

अजा वर्ग के लिए आरक्षित ये सीट भाजपा (bjp) का गढ़ रही है. वर्ष 2014 के उपचुनाव सहित अब तक हुए 16 चुनाव में कांग्रेस (ongress) को अभी तक केवल 3 बार ही जीत का मौका मिला है.

  • Share this:
आगर. आगर विधानसभा सीट (Assembly seat) के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है. बीजेपी का गढ़ रही इस सीट पर प्रचार और प्रत्याशी चयन में इस बार कांग्रेस (Congress)  बाज़ी मार ले लगी है. कांग्रेस ने  विपिन वानखेड़े को फिर इस बार अपना प्रत्याशी बनाया है.  युवा नेता विपिन ने पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में बीजेपी के मनोहर ऊंटवाल को कड़ी टक्कर दी थी. ऊंटवाल सिर्फ 2490 वोट से जीत पाए थे. ऊंटवाल के निधन के कारण ही इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है. कांग्रेस को भरोसा है कि विपिन वानखेड़े इस बार विजय पताका लहराएंगे.आगर मालवा में कांग्रेस का वार रूम बनकर तैयार है और प्रचार प्रसार भी जारी है.

इधर बीजेपी में आगर के लिए प्रत्यशियों के चयन में अभी तक घमासान मचा हुआ है. एक दर्जन से अधिक नेता टिकट की दौड़ में दिखाई दे रहे हैं. हालांकि दोनो ही दलों के बड़े नेताओं के दौरे इस सीट के लिए पिछले दिनों हो चुके हैं. प्रत्याशी चयन और प्रचार के मामले में तो कांग्रेस को बढ़त होती दिखाई दे रही है लेकिन आगे क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा की आखिरी बाजी कौन जीतेगा.

विपिन वानखेड़े, कांग्रेस प्रत्याशी, आगर


अजा वर्ग के लिए आरक्षित
आगर मालवा जिले की अजा वर्ग के लिए आरक्षित आगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान होने के बाद चुनाव के लिए दोनों ही प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में फिर से जुटने लगे है. आगर विधानसभा सीट बीजेपी विधायक मनोहर ऊँटवाल के आकस्मिक निधन के बाद रिक्त हुई है. वैसे तो फरवरी से ही इस सीट पर चुनावी तैयारियां दिखने लगी थीं लेकिन कोरोना की वजह से बीच में तैयारियां ठंडी पड़ गयी थीं. अब फिर से धीरे धीरे चुनावी माहौल दिखने लगा है.


बीजेपी का गढ़ रहा है आगर
आगर सीट पर पहले एक नजर डाल लेते है. जनसंघ के जमाने से आगर विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है. वर्ष 2014 के उपचुनाव सहित अब तक हुए 16 चुनाव में कांग्रेस को अभी तक केवल 3 बार ही जीत का मौका मिला है. बाहरी नेताओं का भी इस सीट पर बोलबाला रहा है. भाजपा के शासनकाल के दौरान 2013 में आगर जिला बना, इसलिए बीजेपी की यहां पकड़ और मज़बूत हो गयी. विगत 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मनोहर ऊंटवाल 2490 वोट से एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े से जीते थे. विधानसभा चुनाव 2013 में भी इस सीट से मनोहर उंटवाल चुनाव जीते थे, लेकिन बाद में वह लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बन गए, उसके बाद खाली हुई सीट पर गोपाल परमार कांग्रेस के प्रत्‍याशी राजकुमार गौरे से उपचुनाव में करीब 27 हजार मतों से जीत हासिल कर विधायक बने थे. इस सीट पर वैसे तो ज्यादातर बीजेपी चुनाव में अच्छे वोटों जीत हासिल करती आई है लेकिन 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी विपिन वानखेड़े ने खासी टक्कर दी और इस सीट पर जीत का अंतर मात्र 2400 पर ला दिया.

मनोज ऊंटवाल


.एक नज़र इधर
अजा बाहुल्य आगर विधानसभा क्षेत्र 166, पिछले 5 चुनाव से भाजपा के कब्जे में रही है. सन 2003 में भाजपा की रेखा रत्नाकर ने कांग्रेस के विधायक रहे रामलाल मालवीय को 24 हजार 916 मतों से पराजित किया था. रेखा रत्नाकर के बाद सन् 2008 में भाजपा के लालजी राम मालवीय ने कांग्रेस के प्रत्याशी रमेश सूर्यवंशी को 16 हजार 734 मतों से हरा कर सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा था. सन् 2013 में शाजापुर से पृथक होकर आगर जिला बना तब लालजीराम मालवीय ही आगर के विधायक थे. 2013 के अन्त में हुए चुनाव में भाजपा ने पूर्व नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री मनोहर ऊंटवाल को आलोट के बजाय आगर से प्रत्याशी बनाया था. ऊंटवाल ने कांग्रेस के मधु गेहलोत को 28 हजार 859 मतों से पराजित किया था. करीब 4 माह बाद भाजपा ने ऊंटवाल को देवास, शाजापुर संसदीय क्षेत्र के लिए अपना प्रत्याशी बनाया. इसमें ऊंटवाल विजयी हुए. ऊंटवाल ने सांसद बनने के बाद विधानंसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इस वजह से आगर में पहली बार 2014 में उपचुनाव हुए. इसमें पार्टी ने 1993 से 1998 तक विधायक रहे गोपाल परमार को अपना प्रत्याशी बनाया. विधायक परमार की बेदाग और जुझारू छवि के कारण मतदाताओं ने उन पर अपना पुनः विश्वास जताया और गोपाल परमार इस उपचुनाव में कांग्रेस के राजकुमार गौरे से 27 हजार 702 मतो के भारी अंतर से चुनाव जीते.

बीजेपी-कांग्रेस में टक्कर
आगर विधानसभा सीट पर हमेशा से ही कांग्रेस और भाजपा का ही मुख्य मुकाबला रहा है. अन्य कोई भी पार्टी यहां पर अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाई है. उपचुनाव को लेकर इस बार भी कांग्रेस और बीजेपी दोनों दल प्रचार में जुट गए हैं.

बाहरी का विरोध
आगर सीट पर बीजेपी के लिहाज से स्थानीय ओर बाहरी मुद्दे को देखा जाए तो यहां पिछली बार भी मनोहर ऊंटवाल को मौका दिया था जो कि आलोट क्षेत्र से थे.इसलिए शुरुआती दौर में टिकट मिलने के पहले स्थानीय कार्यकर्ताओ का भारी विरोध देखने को मिला था. इसका असर भी चुनाव में दिखा जब जीत का अंतर मामूली रह गया. इस बार भी मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद उनके बेटे मनोज उर्फ बंटी ऊंटवाल की दावेदारी सशक्त मानी जा रही है. शायद सहानुभूति की लहर का फायदा उठाने के चक्कर मे पार्टी उन पर दांव खेल भी सकती है. वहीं उज्जैन से सांसद रहे और भाजपा में प्रदेश प्रवक्ता चिंतामणी मालवीय भी टिकट के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं. इसके अलावा सोनकच्छ निवासी गोपाल वर्मा, बेटमा के मधु गहलोत भी अपनी दावेदारी को लेकर क्षेत्र में सक्रिय हैं. वहीं स्थानीय नेता और पूर्व विधायक द्वय रेखा रत्नाकर और गोपाल परमार भी अपनी अपने आपको बाकी दावेदारों से बेहतर मानते हैं. ये भी यही मानते हैं कि स्थानीय व्यक्ति को ही मौका मिलना चाहिए, क्योंकि स्थानीय व्यक्ति ही आम लोगों से जुड़ा हुआ है. आयतित उम्मीदवार उनकी मेहनत का फायदा उठा जाते हैं.

विपिन वानखेड़े ने दी थी कड़ी टक्कर
अब बात कांग्रेस की करते है, तो स्थानीय और बाहरी का मुद्दा तो कांग्रेस पार्टी में भी जमकर उठा.कांग्रेस ने सभी को दरकिनार करते हुए एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े पर विश्वास दिखाया है और उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है, क्योंकि उन्होंने मनोहर ऊंटवाल जैसे बीजेपी के अनुभवी नेता को पिछली बार चुनाव में पसीना ला दिया था. विपिन वानखेड़े को वैसे अब तक दिग्विजय सिंह के बेटे और कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे जयवर्धन सिंह का काफी साथ मिला है. जयवर्धन सिंह इस सीट के लिए प्रभारी बनाए गए हैं और लगतार वे गाँव गाँव जाकर विपिन के पक्ष में कांग्रेस के लिए वोट मांग रहे हैं.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज