MP by Election 2020 : आगर सीट पर इस बार दो युवा उम्मीदवारों में होगा मुकाबला

विपिन वानखेड़े के मुकाबले मनोज ऊंटवाल राजनीति में बिलकुल नये हैं.
विपिन वानखेड़े के मुकाबले मनोज ऊंटवाल राजनीति में बिलकुल नये हैं.

माना जा रहा है कांग्रेस प्रत्याशी (Congress candidate) वानखेड़े को पिछले चुनाव में इसी सीट से लड़ने के कारण अनुभव का फायदा मिलेगा.वहीं मनोज ऊंटवाल को प्रदेश में बीजेपी (BJP) सरकार होने का.

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आगर-मालवा.मध्यप्रदेश (MP) में होने जा रहे उपचुनाव में आगर विधानसभा ( 166 ) सीट पर रोचक मुकाबला होने जा रहा है. इस सीट (Seat) पर दो युवा उम्मीदवारों की टक्कर होने जा रही है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने युवाओं पर भरोसा जताया है. बीते चुनाव में स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल जैसे अनुभवी नेता से मात्र 2490 वोटों से हारे कांग्रेस के विपिन वानखेड़े का मुकाबला इस बार मनोहर ऊंटवाल के बेटे मनोज उर्फ बंटी ऊंटवाल से होगा. NSUI नेता विपिन के मुकाबले मनोज अभी राजनीति में नये हैं.

जानिए विपिन के बारे में
इंदौर के रहने वाले 32 वर्षीय विपिन वानखेड़े ने राजनीति की शुरूआत एनएसयूआई से की. एनएसयूआई से दो बार इंदौर के जिला अध्यक्ष और दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे. इस वजह से छात्रों में उन्होंने अलग पेठ बनाई.2018 में आगर विधानसभा से कांग्रेस से चुनाव लड़ा और स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल जैसे दिग्गज बीजेपी के नेता से मात्र 2490 वोटो के अंतर से हार गए.

ऊर्जावान नेता और अच्छी छवि
विपिन युवा और ऊर्जावान नेता है. उनकी छवि अच्छी है और वो लगातार इलाके में मेहनत कर रहे हैं. हारने के बाद भी वो क्षेत्र में सक्रिय रहे. बड़ी युवा टीम उनके साथ है. और वो कांग्रेस के असंतुष्टों को भी लगातार साध रहे हैं.विपिन दिग्विजय सिंह के बेटे और कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे जयवर्धन सिंह के काफी करीबी हैं. जयवर्धन सिंह लगातार विपिन को साथ लेकर क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं. फिलहाल कोरोना काल में भी रोजाना क्षेत्र में गांव गाँव घूमकर सतत संपर्क कर रहे हैं. आगर विधानसभा के लगभग सभी गांवों का वो इस दौरान 4 से 5 बार दौरा कर चुके हैं. अधिकांश मतदाताओं से एक एक बार संपर्क कर चुके हैं. इस लिहाज से प्रचार में वो बीजेपी से काफी आगे हैं.



ये हैं चुनौती
विपिन के बारे में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस सरकार के दौरान क्षेत्र के सरपंचों और ग्राम सचिवों पर अनावश्यक दबाव बनाने की चर्चा जोरों पर रही. इंदौर निवासी होने के कारण स्थानीय बाहरी का मुद्दा भी इनके चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है. स्थानीय दावेदारों की नाराज़गी दूर करना भी पिछले चुनाव की तरह चुनौती पूर्ण होगा. पिछली बार 2018 के विधानसभा चुनाव में विपिन वानखेड़े को बाहरी होने के कारण स्थानीय दावेदारों के समर्थकों का विरोध झेलना पड़ा था.

मनोज ऊंटवाल
मनोज उर्फ बंटी ऊंटवाल का यह पहला चुनाव है. करीब 34 वर्षीय बंटी ऊंटवाल मूल रुप से धार के रहने वाले हैं. इनके पिता स्व.मनोहर ऊंटवाल आलोट, आगर से विधायक और देवास से सांसद रहे हैं. पिता संगठन में बड़े पदों पर रहे हैं. साथ ही सीएम शिवराज के करीबी रहे हैं. 2008 में इनके पिता नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री भी रहे. मनोज आलोट में खासे लोकप्रिय हैं. दो भाइयों में मनोज ऊंटवाल बड़े हैं और पिता की सियासत को आगे बढ़ा रहे हैं. अपने पिता का पूरा काम मनोज ही संभालते थे. मनोज ने ग्वालियर से बीई किया है. वो अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं. शिवराज के करीबी होने के कारण इन्हें टिकिट मिला है. बीजेपी की सरकार होने और बीजेपी की परंपरागत सीट होने का फायदा मनोजको मिल सकता है.

ये होंगी चुनौती
मनोज राजनीति में बिलकुल नये हैं. कांग्रेस उम्मीदवार विपिन वानखेड़े इनके अनुभवी पिता को 2018 के चुनाव में कड़ी टक्कर दे चुके हैं. इस बार दिवंगत मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद फरवरी से लगातार विपिन वानखेड़े क्षेत्र में सक्रिय हैं और मतदाताओं से लगातार संपर्क कर रहे हैं. इनके साथ पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह भी लगातार क्षेत्र में लगभग सभी गांव में कई दिन से दौरा कर रहे हैं. मनोज ऊंटवाल को बाहरी होने के कारण स्थानीय नेताओं की अंदरूनी नाराज़गी झेलना पड़ सकती है. उन्हें मनाना खासी चुनौती होगी. साथ ही कम समय में पूरे क्षेत्र में हर मतदाता तक पहुचना कठिन होगा.
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