आगर मालवा की हरसिद्धि मंदिर में लगा भक्तों का तांता, हर मन्नत पूरी करती हैं देवी

आगर मालवा के बीजानगरी गांव की प्रसिद्ध मां हरसिद्धि देवी की मूर्ति.
आगर मालवा के बीजानगरी गांव की प्रसिद्ध मां हरसिद्धि देवी की मूर्ति.

आगर मालवा (Agar Malwa) के बीजानगरी स्थित मां हरसिद्धि देवी के मंदिर (Harsiddhi Temple) में नवरात्रि (Navratri 2019) को लेकर बढ़ी चहल-पहल. पौराणिक मान्यताओं वाले मंदिर से जुड़ी है भक्तों की आस्था.

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आगर मालवा. जिला मुख्‍यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित बीजानगरी में मां हरसिद्धि मंदिर में इन दिनों नवरात्रि के कारण चहल-पहल ज्यादा है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, लगभग 2000 साल पहले स्थापित इस मंदिर में आज भी अखंड ज्योत जल रही है. यह ज्योति कभी नहीं बुझती. बीजानगरी और आसपास के इलाकों के लोगों की आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर के बारे में लोग बताते हैं कि राजा विक्रमादित्य के भांजे विजय सिंह ने इसे बनवाया था. विजय सिंह मां हरसिद्धि के बड़े भक्त थे. देवी ने उन्हें सपने में आकर मंदिर बनवाने का आदेश दिया था.

चमत्कारों की कहानी से बढ़ी आस्था
आगर मालवा जिले के ग्राम बीजानगरी में स्थित मां हरसिद्धि देवी के मंदिर के बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि मंदिर में कई प्रकार के चमत्‍कार होते रहते हैं. हरसिद्धि माता के इस मंदिर में मां हरसिद्धि के साथ-साथ मां अन्नपूर्णा और कालका माता विराजित हैं. मंदिर के अंदर बाबा भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है. गांव के बुजुर्गों के अनुसार यहां पर लगभग 2000 वर्षों से अखण्‍ड ज्‍योत प्रज्‍वलित है. मंदिर में आने वाले भक्तों को दिन में माता के 3 रूप दिखाई देते हैं. मां की मूर्ति में भक्तों को सुबह में बचपन का, दोपहर में युवावस्था और शाम में बुढ़ापे का रूप नजर आता है. मंदिर के पंडित रामचंद्र व्यास बताते हैं कि नवरात्रि और अन्‍य त्‍योहारों के मौके पर मंदिर में भक्‍तों का तांता लगा रहता है. यह भी कहा जाता है कि राजा विजय सिंह मंदिर में दर्शन किए बिना कभी भी भोजन नहीं करते थे. इन कहानियों से मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ गई है.

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नवरात्र के दिनों में मां हरसिद्धि देवी के मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है.

हर महीने डेढ़ क्विंटल तेल की खपत


ग्रामीणों के अनुसार मां हरसिद्धि देवी के मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योत जल रही है. इसे जलाए रखने के लिए हर महीने कुल डेढ़ क्विंटल तेल लगता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में तेल की खपत बढ़ जाती है. इन 10 दिनों में लगभग 10 क्विंटल तेल लगता है. मान्‍यता है कि भक्‍त कोई मन्‍नत मांगते हैं तो वे गोबर से उल्‍टा सातियां बनाते हैं. मन्नत पूरी होने के बाद भक्‍त मंदिर में दोबारा आकर उसे सीधा बनाते हैं. नवरात्र में घटस्‍थापना के बाद से यहां पर नारियल नहीं फोड़ा जाता है. महा-अष्‍टमी की पूजा के बाद ही नारियल फोड़ा जाता है.

खुदाई के दौरान मिली थीं मूर्तियां
स्थानीय लोगों के अनुसार बीजानगरी गांव में स्थित इस मंदिर की मूर्तियां कई साल पहले खुदाई के दौरान मिली थीं. इस मंदिर को मध्‍यप्रदेश पुरातत्‍व विभाग ने अपने अधीन रख रखा है, लेकिन रखरखाव के अभाव में मंदिर और यहां स्थापित मूर्तियां खराब हो रही हैं. पुरातत्‍व विभाग के अधीन होने के कारण स्थानीय ग्रामीण इस मंदिर का विकास कार्य नहीं करा पा रहे हैं. इसको लेकर लोगों ने अफसोस जताया. लोगों ने बताया कि गांव में कुएं या घरों की खुदाई के दौरान भी अब भी कई बार पुरातात्विक महत्व की प्राचीन मूर्तियां निकलती हैं.

(रजनीश सेठी की रिपोर्ट)

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