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आसमान से बरसी आफत ने चौपट कर दी सोयाबीन की फसल, कर्ज़ में डूबे किसान

Rajneesh Sethi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 18, 2019, 1:24 PM IST
आसमान से बरसी आफत ने चौपट कर दी सोयाबीन की फसल, कर्ज़ में डूबे किसान
इस बार सोयाबीन की 70 फीसदी से ज़्यादा फसल चौपट हो चुकी है

इलाके में इस साल करीब 72 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है जो सामान्य से दोगुना है. ज़िले में अब तक 16 मौतें हुईं. कई मकान ढह गए. फसलें चौपट हो गईं.

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आगर मालवा. मध्य प्रदेश (MADHYA PRADESH)में इस बार आफत बनकर (Heavy rain)आयी बारिश ने फसल चौपट (crop) कर दी हैं. खेत अब तालाब बन गए हैं. बीज सड़ गए हैं. पौधे गल गए हैं और फल टूट गए हैं. किसानों के सामने कर्ज़ चुकाने की समस्या खड़ी है. आगर मालवा (agar malwa)में भी यही हाल है. सोयाबीन और मक्का की फसल चौपट हो चुकी है. किसान कह रहे हैं उन्हें सरकारी मदद नहीं मिली है.

कुछ डूबे हुए पौधे, गली हुई पत्तियां और बिखरे पड़े फूल और फल. आगर मालवा सहित मध्य प्रदेश के तमाम इलाकों में खेतों का अब यही सीन है. सोयाबीन की फसल लहलहा रही थी. फलियां आ चुकी थीं. लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया. फसल ख़राब होने के साथ ही किसानों की उम्मीद भी टूट गयी है. खेत पानी में कुछ इस तरह डूब गए मानो यहां तालाब हों.

जयादा बारिश के कारण सोयाबीन के दाने सड़ गए हैं


अब क्या करेंगे सिद्धू सिंह

ऐसे ही एक किसान हैं-सिद्धू सिंह. उनके सिर पर 50 हजार रुपए का कर्ज़ है.सोयाबीन की फसल बोने में सब खर्च कर दिया. दवाई, बीज, खाद और मजदूरी सब कुछ लगाया लेकिन बारिश ने किए-धरे पर पानी फेर दिया. पूरा खेत पानी में डूब गया सोयाबीन के पौधे करीब 2 फीट तक पानी में डूबे हुए हैं. अब सिद्धू सिंह के सामने परेशानी यह है कि अपना पुराना कर्ज़ वो कैसे चुकाएगा. जिस फसल से उम्मीद थी वो भी अब नहीं दिख रही और बाकी कसर सिस्टम ने पूरी कर दी जो मुआवजा और बीमा का सर्वे का काम भी पूरा नहीं कर पाया.
कनीराम भी परेशान हैं
सिद्धू सिंह के खेत से कुछ ही दूरी पर कनीराम का खेत है. उन्होंने अपनी 18 बीघा जमीन में सोयाबीन लगाई थी लेकिन सब पानी में डूब गयी. कनीराम को उम्मीद थी कि पुराना कर्ज भी चुकता हो जाएगा और फसल आने से घर का हिसाब किताब भी जम जाएगा. मगर नियति को कुछ और ही मंज़ूर था. उसने सारे सपने चूर कर दिए. अब उम्मीद सरकार से है कि वो उसको मुआवजा दिलाए और बीमे का फायदा भी.
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कनीराम बेबस आंखों से कभी आसमान को देखते हैं तो कभी फसल को


हर किसान परेशान
ये कहानी केवल इन एक दो किसानों की नही बल्कि सभी किसानों की है. किसानों का आरोप है कि सरकार बैंक से कर्ज़ के वक़्त बीमा की प्रीमियम राशि तो काट लेती है मगर उचित बीमा नही देती. अभी शासन का नुमाइंदा खेतों का सर्वे करने नहीं पहुंचा है.
72 इंच बारिश
इलाके में इस साल करीब 72 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है जो सामान्य से दोगुना है. ज़िले में अब तक 16 मौतें हुईं. कई मकान ढह गए. फसलें चौपट हो गईं. प्रशासन का दावा है सर्वे का काम अपनी गति से चल रहा है हर एक किसान को उसका हक दिलाया जाएगा.
आंदोलन की तैयारी
आगर मालवा ज़िले में इस साल सिंचाई का रकबा लगभग 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर है. चूंकि मामला प्रदेश के सबसे बड़े वोट बैंक किसानों से जुड़ा है तो राजनीति भी लाजिमी है. किसानों को खराब फसलों की भरपाई हो इसके लिए आरोपो के साथ भाजपा आंदोलन की तैयारियों में जुट गई है.

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First published: September 18, 2019, 1:11 PM IST
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