शिव'राज' में मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला, टॉयलेट निर्माण में मिली गड़बड़ियां

शौचालय निर्माण में घोटाला

सुसनेर के नए बस स्‍टैंड के पास कला बाई और उसका परिवार खुले में शौच के लिए जाता था. नगर परिषद ने अभियान के तहत 1350 रूपए की राशी जमा करा कर उसके घर शौचालय का निर्माण तो कराया लेकिन उसे अधूरा ही छोड़ दिया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालय लापरवाही के कारण स्‍वच्‍छता को मुंह चिढ़ा रहे है. अभियान के तहत बनाए जा रहे शौचालय अब शौच की जगह नहीं रहे बल्कि लकड़ी रखने वाली अलमारियों में तब्‍दील हो गए है. यह चौंकाने वाला मामला आगर मालवा जिले के सुसनेर का है. जिससे स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत बनाएं गए शौचालय के औचित्‍य पर ही सवाल खड़े हो गए है. इसके पीछे वजह सरकारी लापरवाही और निर्माण में घोटाला सामने आया है.

स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत आगर मालवा जिले में भी खुले में शौच जाने से मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रूपए खर्च कर कई तरह के जतन किए गए है. बता दें कि आगर मालवा जिले को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा 31 मई 2017 को ओडीएफ भी घोषित किया जा चुका है. लेकिन जिले की सुसनेर नगर परिषद क्षेत्र में मोदी का यह अभियान अनदेखी के चलते अधूरा दिखाई दे रहा है.

दरअसल, जिले के सुसनेर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगरीय क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण में जमकर धांधलियां की गई है. शौचालयों को निर्धारित मापदंड के अनुसार न बनाते हुए छोटे और अधूरे ही बना दिए गए है. कई जगह शौचालयों को बनाएं बिना ही पुराने शौचालयों को नया बताकर ठेकेदार और अधिकारियों द्वारा राशी निकाल ली गई, तो कहीं गड्ढों को अधुरा छोड़ दिया गया तो कहीं शौचालयो में शीट नहीं लगाई गई और निर्माण के लिए दी जाने वाली पूरी राशी निकाल ली गई.

सुसनेर के नए बस स्‍टैंड के पास कला बाई और उसका परिवार खुले में शौच के लिए जाता था. नगर परिषद ने अभियान के तहत 1350 रूपए की राशी जमा करा कर उसके घर शौचालय का निर्माण तो कराया लेकिन उसे अधूरा ही छोड़ दिया. यही वजह रहीं कि उसके यहां बनाएं गए शौचालय में लकड़ी और कंडे सहित अटाला रख दिया गया.

सुसनेर में बनाए गए कुल 617 शौचालयों के लिए 13 हजार 500 रूपए प्रति शौचालय की दर से ठेकेदार को भुगतान किया गया है. इस हिसाब से कुल 83 लाख 29 हजार 500 रूपए की राशि खर्च करके शौचालय बनाए गए है. सूत्रो के अनुसार इनमें से कम से कम 200 शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ियां की गई है.

लगातार शिकायतों के बाद जिला कलेक्‍टर द्वारा मामले की जांच डिप्‍टी कलेक्‍टर मनीष जैन को सौंपी है. ऐसे में सवाल उठाना लाजमी है कि जब जिले में आज भी कई घरों में शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है लोग खुले में शौच जाने को मजबूर है तो जिला ओडीएफ कैसे घोषित हो गया.

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