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उपचुनाव का विश्लेषण: अजीत जोगी ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल, डमी कैंडिडेट-नोटा भी बना हार की वजह

Pradesh18
Updated: November 22, 2016, 11:10 PM IST
उपचुनाव का विश्लेषण: अजीत जोगी ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल, डमी कैंडिडेट-नोटा भी बना हार की वजह
नोटबंदी के बाद मध्यप्रदेश में हुए पहले चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. पार्टी को शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने पटखनी देते हुए राज्य में क्लीप स्वीप किया.

नोटबंदी के बाद मध्यप्रदेश में हुए पहले चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. पार्टी को शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने पटखनी देते हुए राज्य में क्लीप स्वीप किया.

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नोटबंदी के बाद मध्यप्रदेश में हुए पहले चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. पार्टी को शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने पटखनी देते हुए राज्य में क्लीप स्वीप किया.

नोटबंदी, कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक, पिता की मौत पर सहानुभूति फैक्टर और शिवराज का सुशासन सहित भाजपा के पास इस चुनाव में तमाम मुद्दे रहे, फिर भी कांग्रेस को उम्मीद थी कि चुनावों में नतीजे उसके पक्ष में जा सकते हैं. लेकिन मंगलवार को आए जनादेश ने पार्टी की सारी उम्मीदों को एक झटके में ध्वस्त कर दिया.

कांग्रेस के लिए शहडोल की हार सबसे ज्यादा दर्द देने वाली साबित हो रही है. पार्टी को उम्मीद थी कि राजीव गांधी कैबिनेट में मंत्री रहे स्वर्गीय दलबीर सिंह की बेटी और युवा चेहरा हिमाद्री सिंह रतलाम लोकसभा उपचुनाव की तरह शहडोल में भी कांग्रेस को खुशी मनाने का एक मौका देगी. नतीजे आए तो हिमाद्री सिंह 60 हजार से ज्यादा वोटों से हार गई.

प्रदेश18 ने हिमाद्री सिंह के हार की वजहों को तलाशा तो संकेत साफ हैं कि कांग्रेस की यह उम्मीदवार विपक्षी पार्टी भाजपा से कम अपनी पार्टी के नेताओं और कभी कांग्रेस का हिस्सा रहे अजीत जोगी की वजह से ज्यादा हारी है.

अजीत जोगी ने बिगाड़ा खेल

कांग्रेस की हिमाद्री सिंह 60833 वोटों से यह चुनाव हारी हैं. वहीं, तीसरे नंबर पर रहे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार हीरा सिंह मरकाम को 55306 वोट मिले हैं. मरकाम के लिए कभी कांग्रेस का हिस्सा रहे और अब अलग पार्टी बनाने वाले अजीत जोगी ने प्रचार किया था.

अजीत जोगी के चुनावी समर में उतरने से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को काफी बल मिला और उसके उम्मीदवार ने अप्रत्याक्षित 55 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए. प्रदेश18 के स्थानीय संवाददाता सौरभ पांडे बताते हैं कि गोंडवाना पार्टी ने कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाई. वहीं, जोगी के प्रचार करने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने अप्रत्यक्ष तरीके से कांग्रेस का दामन छोड़कर गोंडवाना पार्टी की मदद की.इंडिपेंडेंट कैंडिडेट्स से हुआ नुकसान

दरअसल, भाजपा ने यह चुनाव बेहद प्लानिंग के साथ लड़ा था. पार्टी को पता था कि, कुछ इलाकों में हिमाद्री सिंह को अच्छा सपोर्ट मिल सकता है. खासतौर पर बैगा समुदाय भाजपा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता था. ऐसे में बैगा समुदाय के चार उम्मीदवार के स्वतंत्र चुनाव लड़ने का भी पार्टी को फायदा हुआ.

चार बैगा उम्मीदवारों ने करीब 30 हजार वोट हासिल किए, जिसकी वजह से भी कांग्रेस को खास नुकसान झेलना पड़ा. यह भी कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह बनकर उभरा है. वहीं 15 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया.

ये भी रहीं हार की वजह

-कांग्रेस छह गुटों में बंटी हुई थीं. सिंधिया, कमलनाथ, अरुण यादव के अलाव विवेक तन्खा, अजय सिंह और विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह खेम के नेताओं और कार्यकर्ताओं की खेमेबाजी अंत में पार्टी को ले डूबी.

-दलपत सिंह परस्ते के निधन के बाद आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पोलिंग बूथ लेवल पर अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया, जिसका नतीजा भारी मतदान के रूप में सामने आया.

-हिमाद्री सिंह ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक बार भी भाषण नहीं दिया. इस वजह से उनका नजरियां मतदाताओं के सामने नहीं आ सका.

-भाजपा ने मोदी, शिवराज, कमल और ज्ञान (ज्ञान सिंह उम्मीदवार) को आगे रखकर चुनाव लड़ा. पार्टी का जो भी नेता इस लाइन से बाहर गया, उसे पार्टी ने घर बैठाकर चुनाव से दूर कर दिया.

-सोशल मीडिया पर भी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिससे युवा मतदाताओं का रुझान भाजपा के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई.

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First published: November 22, 2016, 8:19 PM IST
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