दूषित पानी पीने को मजबूर संरक्षित बैगा जनजाति के 23 परिवार
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दूषित पानी पीने को मजबूर संरक्षित बैगा जनजाति के 23 परिवार
दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

बैगा जनजाति संरक्षित जनजातियों में से है. पुष्पराजगढ़ जनपद के गिरारी खुर्द गांव में इस जनजाति के मात्र 23 परिवार बचे हैं. गिरारी खुर्द में पीने के पानी के लिए ना तो कोई सरकारी व्यवस्था है और ना ही कोई इस और ध्यान दे रहा है. इस जनजाति के लोगों को गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर गड्ढे से पीने का पानी लाना पड़ रहा है.

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प्रदेश के अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में बैगा जनजाति को आज भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. गिरारी खुर्द गांव के बैगन टोला में 23 बैगा संरक्षित जनजाति के परिवार निवास करते हैं. इन ग्रामीणों को 2 किलोमीटर का सफर तय कर गांव से दूर एक गड्ढे से पीने का पानी लाना पड़ता है. इस गांव में न तो कुंआ है और ना की को हैंडपंप, जिसके चलते सर्दी, गर्मी और बरसात में ये ग्रामीण गड्ढे का पानी पीने के लिए मजबूर हैं.

बैगा जनजाति संरक्षित जनजातियों में से है. पुष्पराजगढ़ जनपद के गिरारी खुर्द गांव में इस जनजाति के मात्र 23 परिवार बचे हैं. गिरारी खुर्द में पीने के पानी के लिए ना तो कोई सरकारी व्यवस्था है और ना ही कोई इस और ध्यान दे रहा है. इस जनजाति के लोगों को गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर गड्ढे से पीने का पानी लाना पड़ रहा है. इन लोगों का कहना है कि पानी के रूप में इन्हें जहर पीना पड़ रहा है.

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ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी गांव में पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. जनपद से नेता और अधिकारी गांव में आते हैं और पानी, बिजली व सड़क के वादे तो कर जाते हैं लेकिन आज तक कोई काम नहीं हुआ. ग्रामीणों का कहना है कि जो पानी गांव में जानवर पीते हैं उसी पानी को इंसान पीते है, जिससे कई बार बीमार पड़ने से मौत तक हो जाती है.
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ग्रामीणों ने बताया कि जिस गड्ढे से वे पानी लाते हैं वहां इतना पानी नहीं होता, जिससे 23 परिवारों की प्यास बुझ सके. उन्होंने बताया कि गड्ढे से सभी को पानी नहीं मिलता और जिन्हें पानी नहीं मिलते उनके घर चूल्हा भी नहीं जलता. इस मामले में शहडोल संभाग आयुक्त जे के जैन ने कहा कि मामला अभी संज्ञान में आया है, ग्रामीणों की समस्या का जल्द ही समाधान किया जाएगा.

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