पिता का अस्पताल प्रबंधन पर आरोप- ऑक्सीजन नहीं मिलने से उसके बच्चे की गई जान
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पिता का अस्पताल प्रबंधन पर आरोप- ऑक्सीजन नहीं मिलने से उसके बच्चे की गई जान
जिला अस्पताल अनूपपुर में ऑक्सीजन नहीं मिलने से मासूम ने दम तोड़ा

जिला चिकित्सालय अनूपपुर में सोमवार को शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती 2 वर्षीय मासूम को ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हो गई.

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जिला चिकित्सालय (district hospital) अनूपपुर में सोमवार को शिशु गहन चिकित्सा इकाई ( Infant Intensive Care Unit) में भर्ती 2 वर्षीय मासूम को ऑक्सीजन (oxygen) नहीं मिलने से मौत हो गई. 2 वर्षीय मासूम रामकृपाल केवट को सुबह 11 बजे जिला चिकित्सालय के शिशु गहन चिकित्सा इकाई में पिता कल्लू केवट द्वारा भर्ती कराया गया था. उस समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक बृजेश पटेल ने दवाइयां लिखीं व ग्लुकोज  चढ़ाने के साथ ही बच्चे को ऑक्सीजन लगाया. लेकिन कुछ ही देर बाद पाइप लाइन के माध्यम से जाने वाले ऑक्सीजन ने जब बुलबुले छोड़ना बंद कर दिए तो बच्चे के पिता ने वहां मौजूद नर्स को उस ओर ध्यान दिलाया. इसपर नर्स झल्लाने लगी. फिर जबतक दूसरे ऑक्सीजन सिलेण्डर को बच्चा वार्ड में लाया जाता, तबतक जिस मशीनरी से बच्चे को ऑक्सीजन दिया जा रहा था उससे सही ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण बुखार से पीड़ित बच्चे ने दम तोड़ दिया.

इस घटना के बाद मृत बच्चे का पिता अस्पताल में घंटो रोता बिलखता रहा. उसकी सुध किसी ने नहीं ली. बच्चे के पिता कल्लू केवट ने साफ कहा कि उसके बच्चे को दिया जा रहा ऑक्सीजन खत्म हो गया था. इसके बाद करीब आधे घंटे तक उसके बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिल पाया. उसने साथ में यह भी कहा कि तब उसके बच्चे को देखने के लिए अस्पताल में कोई डॉक्टर भी नहीं था.

मासूम पुत्र की मौत से व्यथित पिता पुत्र का शव कंधे पर रख जिला चिकित्सालय से बाहर पैदल लेकर निकल पड़ा.




पुत्र के शव को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा पिता
फिर मासूम पुत्र की मौत से व्यथित पिता पुत्र का शव कंधे पर रख जिला चिकित्सालय से बाहर पैदल लेकर निकल पड़ा. कुछ दूर पैदल चलने के बाद वह ऑटो से पुत्र के शव को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा. कलेक्ट्रेट में समय-सीमा की बैठक ले रहे कलेक्टर ने अपर कलेक्टर व्ही.डी. सिंह व एसडीएम अमन वर्मा को तत्काल मामले के संबंध में बात करने को कहा. एसडीएम व अपर कलेक्टर ने दुखी पिता कल्लू केवट की बात धैर्य के साथ सुनी. मृत बच्चे के पिता ने स्पष्ट कहा कि ऑक्सीजन खत्म होने के बाद आधे घण्टे तक ऑक्सीजन देने की व्यवस्था मौजूद नर्सों द्वारा की जाती रही. पिता ने कहा कि उनके पुत्र को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई. दुखी पिता ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि वे चिकित्सालय में व्याप्त लापरवाही को दूर करें ताकि आगे किसी और मासूम की इस प्रकार मौत न हो.

सिविल सर्जन ने कहा - कमजोर था बीमार बच्चा

लेकिन दूसरी तरफ सिविल सर्जन (civil surgeon) इस मामले में अपने आपको व पदस्थ चिकित्सकों को पाक साफ बताते रहे. उन्होंने कहा कि पाइप लाइन से जैसे ही ऑक्सीजन खत्म हुई, बच्चे को वैक्यूम के माध्यम से ऑक्सीजन दी जाती रही. उन्होंने कहा कि मासूम कमजोर था, जिस वजह से उसकी मौत हो गई. ऑक्सीजन सिलेण्डर लाने में हुई देरी के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. एस.आर. परस्ते ने कहा कि सिलेण्डर वहीं मौजूद था, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सिलेण्डर अस्पताल के नीचे से लाने में वक्त लगा. इस पूरे मामले में अपर कलेक्टर व एसडीएम ने दुखी पिता कल्लू केवट को जांच के उपरांत दोषी पाए गए कर्मियों पर कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया. फिर उन्होंने रेडक्रास सोसायटी (Red Cross Society) से पीड़ित पिता को 11000 रु. का चेक देकर एंबुलेंस के माध्यम से उसे उसके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की.

सिविल सर्जन डॉ. एस.आर. परस्ते इस मामले में अपने आपको व पदस्थ चिकित्सकों को पाक साफ बताते रहे.


बता दें कि जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की लापरवाही के कई ऐसे गंभीर मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती. इस मामले में शिशु गहन चिकित्सा इकाई में पूरे समय एक चिकित्सक की ड्यूटी रहती है. इस केस में चिकित्सक बृजेश पटेल की ड्यूटी थी, वह बच्चे को भर्ती करने व दवाइयां लिखने के बाद भोपाल में मीटिंग के लिए निकल गए. जब तक दूसरे चिकित्सक को वहां बुलाया जाता और खुद सिविल सर्जन एस.आर. परस्ते वहां पहुंचते तब तक ऑक्सीजन पूरे समय न मिलने के कारण भर्ती रहे 2 साल के मासूम रामकृपाल केवट की मौत हो गई.

(अनूपपुर से राजनारायण की रिपोर्ट)

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