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आखिर अशोक नगर आने से क्‍यों कतराते हैं मुख्‍यमंत्री, शिवराज पर भी संशय

मध्यप्रदेश के अशोकनगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उन्हें अपने पद गंवाने पड़े हैं.

मध्यप्रदेश के अशोकनगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उन्हें अपने पद गंवाने पड़े हैं.

मध्यप्रदेश के अशोकनगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उन्हें अपने पद गंवाने पड़े हैं.

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    मध्य प्रदेश के अशोक नगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा है. इस सूची में लालू प्रसाद यादव से लेकर दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह का भी नाम शामिल हैं. ये ही वजह है कि पिछले 10 साल से राज्य की सत्ता पर काबिज शिवराज सिंह चौहान एक बार भी अशोक नगर नहीं पहुंचे हैं.

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अशोक नगर नहीं जाने का सवाल एक बार फिर इसलिए उठ रहा है, क्योंकि यहां पिछले आठ महीने से तैयार कलेक्टर भवन के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री का इंतजार किया जा रहा है. करोड़ों की लागत से बना यह भवन कई महीनों से धूल खा रहा है. ऐसे में स्थानीय लोगों ने कांग्रेसियों के साथ मिलकर सुंदरकांड के पाठ आयोजन किया. उनका दावा है कि सुंदरकांड के बाद अब मुख्यमंत्री यहां आएंगे तो उनकी कुर्सी पर किसी तरह का कोई संकट नहीं आएगा.

    जिला मुख्यालय अशोक नगर में अभी तक जिन मुख्यमंत्रियों ने दौरा किया उन्हें छह माह के भीतर अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी और अभी तक कई मुख्यमंत्री अशोक नगर का दौरा करने के बाद अपनी कुर्सी गवां चुके हैं.

    सुंदरलाल पटवा कॉलेज का उद्धाटन करने आए और 15 दिन बाद कुर्सी गंवानी पड़ी. उमा भारती जिला मुख्यालय के बायपास से गुजरी और तीन बाद उनकी कुर्सी पर संकट आ गया. दिग्विजय सिंह अशोक नगर को जिला मुख्यालय घोषित करने पहुंचे, जिसके बाद कांग्रेस आज तक सत्ता में नहीं लौटी. लालू प्रसाद यादव भी बतौर बिहार के मुख्यमंत्री यहां कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जिसके कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी को गद्दी सौंपनी पड़ी.

    माना जा रहा है कि अशोकनगर से जुड़े इस मिथक को देखते हुए पिछले दस साल से शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर यहां नहीं आए. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कई बार अशोकनगर का दौरा बना लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा या तो स्थगित कर दिया गया अथवा स्थान बदल दिया गया.

    मुख्यमंत्री के लिए हैलीपेड भी तैयार रहा, लेकिन ऐनवक्त पर मुख्यमंत्री का दौरा निरस्त होने से सारी तैयारियां धरी रह गई. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 50 में से 49 जिला मुख्यालयों पर अटल ज्योति अभियान की शुरुआत की लेकिन वे अशोकनगर नहीं गए और जिले के मुंगावली में इस अभियान की शुरुआत की.

    पिछले दिनों जिला मुख्यालय से दूर एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शामिल होने के लिए पहुंचे थे, तो उनसे अशोक नगर नहीं आने को लेकर सवाल भी पूछा गया था. तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि वो जल्द ही यहां का दौरा करेंगे, लेकिन अब तक ऐसा हुआ नहीं.

    मुख्यमंत्री के अशोक नगर नहीं आने को लेकर कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया कई बार चुटकी ले चुके हैं. उन्होंने एक बार कहा था कि हमारे मुख्यमंत्री अशोक नगर कभी नहीं आते, मैं उन को न्योता देता हूं कि वह अशोकनगर आएं, आपकी कुर्सी नहीं हिलेगी.

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