बालाघाट लोकसभा सीट: बागी प्रत्याशी ने इस बार दिलचस्प बनाया मुकाबला

यहां 1998 में बीजेपी ने अपना पहला चुनाव जीता और तबसे वह लगातार पांच चुनाव जीत चुकी है.

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 6:10 PM IST
बालाघाट लोकसभा सीट: बागी प्रत्याशी ने इस बार दिलचस्प बनाया मुकाबला
बालाघाट
Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 6:10 PM IST
मध्य प्रदेश की बालाघाट सीट पर चुनाव सबसे दिलचस्प नज़र आ रहा है. मैदान में बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के साथ बीजेपी से बागी होकर निर्दलीय लड़ रहे बोधसिंह भगत ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. यहां 1998 में बीजेपी ने अपना पहला चुनाव जीता और तबसे वह लगातार पांच चुनाव जीत चुकी है.

नक्सल प्रभावित बालाघाट सीट पर इस बार चुनाव रोचक है. एक तरफ जहां बीजेपी और कांग्रेस ने पंवार जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है तो वहीं बीजेपी से बागी होकर मौजूदा सांसद बोध सिंह भगत निर्दलीय मैदान में उतर आए हैं. बोध सिंह भगत की दावेदारी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.



बीजेपी की ओर से ढाल सिंह बिसेन उम्मीदवार हैं
ढाल सिंह बिसेन बरघाट से चार बार विधायक रह चुके हैं, पूर्व में मंत्री भी रहे हैं

कांग्रेस ने इस बार मधु भगत को मैदान में उतारा है
मधु भगत कांग्रेस का युवा चेहरा हैं और परसवाड़ा से एक बार विधायक रहे हैं
खास बात ये है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही उम्मीदवार पंवार जाति से आते हैं
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वहीं बीजेपी से बागी होकर बोधसिंह भगत ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है
बोध सिंह भगत मौजूदा वक्त में बालाघाट से बीजेपी के सांसद हैं
बालाघाट सीट 1998 के बाद लगातार 5 बार से बीजेपी के खाते में है

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बीजेपी और कांग्रेस ने मैदान में भले पंवार उम्मीदवार उतारे हों लेकिन बालाघाट सीट पर आदिवासी और लोधी जाति के वोटर ही निर्णायक भूमिका में होते हैं
बालाघाट लोकसभा सीट पर कुल 17 लाख 56 हजार 715 वोटर हैं
इनमें से 8 लाख 79 हजार 539 पुरुष और 8 लाख 77 हजार 164 महिला वोटर हैं
18-19 साल के मतदाताओं की संख्या 58182, 20-29 साल के 446427, 30-39 साल के 436778, 40-49 साल के 344667, 50-59 साल के 236107, 60-69 साल 132601, 70-79 साल के 54275 औप 80 साल से ज्यादा के 14063 मतदाता हैं

2014 लोकसभा चुनाव में बालाघाट सीट बीजेपी के खाते में गई थी
2014 में बालाघाट सीट पर 68.32 फीसदी मतदान के साथ 11 लाख 13 हजार 364 वोट पड़े थे
इसमें बीजेपी उम्मीदवार बोधसिंह भगत को 43.2 फीसदी के साथ 4 लाख 80 हजार 594 वोट मिले
जबकि कांग्रेस उम्मीदवार हिना कांवरे को 34.5 फीसदी के साथ 3 लाख 84 हजार 553 वोट मिले
नोटा पर 6 हजार 922 वोट पड़े थे.

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बालाघाट लोकसभा सीट के तहत 8 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें बैहर, बालाघाट, बारघाट, लांजी, वारसिवनी, सिवनी, पारसवाडा, कटांगी के नाम शामिल हैं. 2018 विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो.
लोकसभा क्षेत्र की 8 विधान सभाओं में कांग्रेस का पलड़ा भारी है
कांग्रेस के खाते में 4, बीजेपी के कब्जे में 3 जबकि 1 सीट निर्दलीय के खाते में है
यहां की 84.79 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 15.21 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है

जातिगत समीकरण के आधार पर देखें तो, एससी-एसटी 55.7 फीसदी, सामान्य 13.4 फीसदी, ओबीसी 21.2 फीसदी, अल्पसंख्यक 8.4 फीसदी जबकि अन्य 6.7 फीसदी हैं.

बालाघाट सीट पर चुनावी मुद्दों और सियासी गणित की बात करें तो मौजूदा सांसद बोधसिंह भगत का टिकट काटकर बीजेपी ने कांग्रेस को ही थोड़ी राहत दी है. 2008 और 2013 में विधानसभा चुनाव हार चुके ढालसिंह बिसेन को टिकट दिया जाना पूरी तरह से बोधसिंह भगत और गौरीशंकर बिसेन के बीच आपसी लड़ाई का नतीजा रहा. बोधसिंह भगत निर्दलीय मैदान में आकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना चुके हैं.

जहां तक बात मुद्दों की है तो कर्जमाफी सबसे बड़ा मुद्दा है. एक ओर बीजेपी जहां इसे छलावा बता रही है, वहीं कांग्रेस लोकसभा चुनाव के बाद 2 लाख रुपए तक की कर्ज माफी और न्याय योजना के तहत गरीबों को 72 हजार सालाना आमदनी का सपना दिखा रही है. देखना ये होगा कि आखिर जनता अपना फैसला किसके पक्ष में सुनाएगी.

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