सरदार सरोवर बांध के कारण बड़वानी जिले में बिगड़े हालात, ये है वजह

Pankaj Shukla | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 12, 2019, 8:23 PM IST
सरदार सरोवर बांध के कारण बड़वानी जिले में बिगड़े हालात, ये है वजह
सरदार सरोवर बांध की वजह से बड़वानी में हाहाकार.

सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के बढ़ते जलस्तर से बड़वानी जिले (Barwani District) के ग्रामीणों में चिंता की लकीरें छाई हुई हैं.

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बड़वानी. मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी जिले (Barwani District) में डूब का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों में चिंता की लकीरें छाई हुई हैं. हालत यह है कि एक ही दीवार से लगे दो घरों में से एक को पात्रता में लेते हुए डूब का मुआवजा दे दिया गया, तो दूसरे को अपात्र मानकर डूब से बाहर कर दिया. ग्रामीणों ने बताया कि पत्र जारी कर प्रशासन ने पूरे गांव को ही डूब के बाहर कर दिया और दूसरी तरफ गांव की लाइट काटने भी कर्मचारियों को पहुंचा दिया. हालांकि ग्रामीणों के विरोध के बाद लाइट को जोड़ दिया गया है. जबकि नित नई डूब की तस्वीरें सरकार और जिला प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं.

सोंदुल की ये है परेशानी
सरदार सरोवर के डूब प्रभावित गांव सोंदुल के ग्रामीण आज तक यह तय नहीं कर पाए कि वह डूब में हैं या डूब से बाहर, क्योंकि प्रशासन कभी तो उन्हें डूब में मान लेता है और कभी उन्हें डूब से बाहर होने का पत्र जारी कर देता है. ग्रामीण इस असमंजस में है कि आखिर वो करें तो क्या करें. एक तरफ प्रशासन इस गांव को डूब में मानते हुए इसकी बिजली काटने पहुंच जाता है जिसे हंगामा होने के बाद फिर से जोड़ देता है,वहीं गांव के लोगों नर्मदा का मटमैला और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. अब तो पानी ही गांव की दहलीज तक पहुंच चुका है. गांव के ही लोगों ने बताया कि एक ही परिवार के दो भाईयों के पास-पास बने मकान में एक भाई को सरकार ने डूब में मानते हुए मुआवजा देकर उसकी दीवार पर लाभान्वित परिवार होना लिख दिया और पड़ोस में ही एक ही दीवार से चिपके मकान को डूब से बाहर बता दिया.

जबकि गांव के ही 70 वर्षीय मूल सिंह के परिवार में उनके पिता और भाई को तो डूब का लाभ मिल गया, लेकिन सरकार उनसे पूछती है कि क्या तुम अपने पिता के वयस्क पुत्र हो. अब भला इस शख्स को देख कर के तो आप भी समझ गए होंगे कि 70 साल की उम्र वाला बुजुर्ग आज से 52 साल पहले ही वयस्क हो गया था, लेकिन उसे अवयस्क पुत्र मानकर डूब से बाहर कर दिया. अब यह गरीब और अशिक्षित आदिवासी पेट भरने की जुगाड़ करे या सिस्टम के चक्कर लगाए और कैसे सिद्ध करे की वह वयस्क ही नहीं अब तो बुजुर्ग हो चुका है.

70 वर्षीय मूल सिंह


भगवान पर भी है पानी का असर
नर्मदा किनारे बने भगवान के वर्षों पुराने मंदिर भी जलमग्न हो गए है जिन्हें न तो मुआवजा मिला और न जमीन. सभी मंदिरों में मूर्तिया स्थापित हैं जो जलमग्न हो चुकी है. जब सरकार और प्रशासन ने भगवान को डूबोने से नहीं छोड़ा तो इंसान की क्या बिसात. ग्रामीण महिलाओं को अब इस बात का भी डर है कि नर्मदा का पानी गांव के बिल्कुल करीब आ चुका है,जिससे जानवरों का खतरा भी अब बहुत बढ़ गया है. ग्रामीणों की मांग है कि अगर बसाया जाए तो पूरे गांव को एक साथ एक ही जगह पर बसा कर उचित मुआवजा दे दिया जाए. वैसे सैकड़ों परिवारों से बसा गांव डूबेगा या बचेगा इसका फैसला बढ़ता पानी जल्द ही कर देगा.
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First published: September 12, 2019, 8:14 PM IST
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