लाइव टीवी

मेधा पाटकर ने समर्थकों के साथ खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे 26 पर किया चक्‍का जाम, ये है वजह

Pankaj Shukla | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 17, 2019, 11:25 PM IST
मेधा पाटकर ने समर्थकों के साथ खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे 26 पर किया चक्‍का जाम, ये है वजह
मेधा पाटकर ने PM मोदी और गुजरात सरकार पर साधा निशाना.

नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) की नेत्री मेधा पाटकर (Medha Patkar) ने डूब प्रभावितों के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और गुजरात सरकार पर निशाना साधा है.

  • Share this:
बड़वानी. नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) की नेत्री मेधा पाटकर (Medha Patkar) ने डूब प्रभावितों के साथ बड़वानी से गुजर रहे खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे 26 (Khandwa-Baroda State Highway 26) पर चक्का जाम कर दिया. शहर के कारंजा चौराहे से रैली के रूप में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत करते हुए डूब प्रभावित नर्मदा नदी पर बने कसरावद पुल पर पहुंचे, जहां उन्‍होंने नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले जाम लगा दिया. इसकी वजह से दोनों और लगभग 3 से 4 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई.

मेधा पाटकर ने पीएम मोदी और गुजरात सरकार पर साधा निशाना
मेधा पाटकर ने जाम लगाने के कारणों को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात सरकार पर निशाना साधा. उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने के लिए सरदार सरोवर बांध में पूरा पानी भरा गया. जबकि यही जलस्तर 15 अक्टूबर तक भरना था. हम पीएम के जन्मदिवस का जश्न मनाने का धिक्कार करते हैं. उनको लंबी जिंदगी मिले, लेकिन लोगों को भी जीने देने का कर्तव्य और जवाबदेही वो समझें. साथ ही मेधा पाटकर ने कहा कि हमें इस बात से शर्म आती है जो 'सबका साथ, सबका विकास' की बात करते हैं, उन्‍होंने डूब प्रभावितों का पूर्ण पुनर्वास नहीं किया है.

नर्मदा के बहाने कही ये बात

मेधा पाटकर ने कहा कि जहां एक ओर अयोध्या के राम मंदिर के लिए इतना हंगामा किया जा रहा है, वहीं नर्मदा घाटी के सालों पुराने हजारों मंदिर डूब चुके हैं. जबकि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और उनकी हजारों एकड़ जमीन नर्मदा में डूब चुकी है. यही नहीं, कई खेत और गांव टापू में तब्दील हो गए हैं. जबकि गुजरात के केवड़िया में भी सैकड़ों कार्यकर्ताओं को विरोध करने पर गिरफ्तार किया गया.

मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासियों को यह लूटना चाह रहे हैं. कानूनन पूर्ण पुनर्वास के बगैर डूब लाना अनुचित है और 15 अक्टूबर तक जो पानी भरा जाना था उसे 17 सितंबर तक ही पूरा भर दिया गया. इसमें कितना बड़ा व्यक्तिवाद है और यह संविधान के भी खिलाफ है. केवड़िया के भाषण में यह सुना गया है कि यह प्रकृति पर्यावरण और विकास का समन्वय साध रहे हैं, लेकिन ये किसान, केवट मछुआरे, कुम्हार, मजदूर किसान और गांव की हत्या करने जैसा हैं. मध्य प्रदेश के 178 गांव डूबने जा रहा हैं.

जबकि पूर्व सरकार के जीरो बैलेंस बता कर गांव खाली होने और पूर्ण पुनर्वास के दावे की पोल खोल हो गई. 28,000 परिवारों की संख्या आज भी आ रही है जो प्रभावित हैं. मध्य प्रदेश सरकार को भी सशक्त रूप से खड़े होकर संघर्ष करना चाहिए क्योंकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है जो कि केंद्र के विरोधी दल के रूप में है. उन्होंने यह भी कहा कि यह आवाज बड़े स्तर पर उठानी चाहिए. पीएम मोदी का जन्मदिवस है, लेकिन घाटी मरण भुगत रही है इसलिए धिक्कार दिवस मना रहे हैं.
Loading...

ये भी पढ़ें-लोकसभा चुनाव में शिकस्‍त से मायूस 'महाराज' गुना को कहेंगे अलविदा! यह हो सकता है नया ठिकाना

राजा हरिशचन्द्र’ से शुरू हुआ रीगल टॉकीज का सफर ‘ड्रीम गर्ल’ पर खत्म, 85 साल बाद निगम ने किया कब्‍जा

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए बड़वानी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 17, 2019, 8:59 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...