महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश बॉर्डर पर सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने किया हंगामा, CM शिवराज ने की ये अपील
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महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश बॉर्डर पर सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने किया हंगामा, CM शिवराज ने की ये अपील
मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल में बताया कि पिछले तीन दिन में सेंधवा के पास सीमा से लगभग 15,000 प्रवासी मजदूरों को अन्य स्थानों पर भेजा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में मुंबई-आगरा राजमार्ग पर महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश की बॉर्डर पर सेंधवा कस्बे के पास सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने परिवहन और भोजन की व्यवस्था की मांग करते हुए गुरुवार को पथराव किया.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में मुंबई-आगरा राजमार्ग पर महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश की बॉर्डर पर सेंधवा कस्बे के पास सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने परिवहन और भोजन की व्यवस्था की मांग करते हुए गुरुवार को पथराव किया. वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मजदूरों से अपील की है कि वे धैर्य रखें, उनको भोजन और चिकित्सा जांच के उपरांत बसों में नि:शुल्क पहुंचाया जाएगा. उन्होंने अनुरोध किया, ‘‘संकट की इस घड़ी में घबराए नहीं, मध्य प्रदेश सरकार एक-एक मजदूर को घर पहुंचाएगी.’’

इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल में बताया कि पिछले तीन दिन में सेंधवा के पास सीमा से लगभग 15,000 प्रवासी मजदूरों को अन्य स्थानों पर भेजा गया है. प्रदेश सरकार ने यह भी कहा कि यहां महाराष्ट्र से प्रवासियों की भारी तादाद में आमद होने से सीमा पर श्रमिकों का दबाव बना हुआ है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों ने यहां गुरुवार को कई बार हंगामा किया और आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा उनके परिवहन और भोजन की व्यवस्था नहीं की गई है. नाराज होकर मजदूरों ने दोपहर में पथराव कर हंगामा कर दिया हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ.



पुणे से यहां पहुंचे शैलेश त्रिपाठी ने कहा कि प्रवासियों में गर्भवती महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और बच्चे शामिल हैं, इनको यहां भोजन, पानी और परिवहन के अभाव में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यहां एमपी-महाराष्ट्र की सीमा पर बड़ी संख्या में प्रवासी कई घंटे से बैठे हैं लेकिन उनके लिए परिवहन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सतना, रीवा, अनूपपुर और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही अन्य प्रदेशों के लोग भी यहां फंसे हुए हैं.
वहीं, बड़वानी के जिलाधिकारी अमित तोमर ने कहा कि प्रवासियों को यहां से 135 बसों से विभिन्न जिलों में बने ट्रांजिट प्वाइंट पर भेजा गया है. जिला प्रशासन और बसों की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है ताकि प्रवासियों को उनके घरों तक भेजा जा सके.

प्रवासियों द्वारा पथराव और हंगामा किये जाने के सवाल पर तोमर ने कहा कि कुछ बसों के रवाना होने के बाद शेष बचे प्रवासी श्रमिकों को यह लगा कि उनके लिए और बसें नहीं आएंगी लेकिन अधिकारियों के आश्वासन पर वह शांत हो गए

इस बीच, प्रदेश सरकार ने भोपाल में जारी अपने बयान में कहा कि प्रवासियों का सबसे अधिक दबाव सेंधवा के निकट मध्य प्रदेश महाराष्ट्र की सीमा पर पड़ रहा है और वहां हर दिन पांच से हजार प्रवासी कामगार पहुंच रहे हैं.

प्रदेश सरकार ने कहा कि इन श्रमिकों को भोजन, मेडिकल परीक्षण के बाद नि:शुल्क बसों के माध्यम से देवास के ट्रांजिट सेंटर पर पहुंचाया जा रहा है. वहां से बसों द्वारा सागर, छतरपुर, गुना और शिवपुरी पहुंचाया जाता है. इन स्थानों से प्रदेश के दूसरे जिलों के श्रमिकों को उनके जिले में और उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार के मजदूरों को उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंचाया जा रहा है. सेंधवा सीमा पर पिछले तीन दिनों में लगभग 15 हजार श्रमिकों को भोजन करवा कर उन्हें बसों के माध्यम से देवास होते हुए उनके गंतव्य की ओर भेजा गया है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव आईसीपी केशरी ने बताया कि मध्यप्रदेश के 2.26 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को अन्य राज्यों से सड़कों द्वारा प्रदेश में लाया गया है. इसके अलावा गुरुवार तक 86 हजार प्रवासियों को विशेष ट्रेनों से प्रदेश में लाया गया हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर अब तक प्रदेश के 3.12 लाख प्रवासी श्रमिकों को अन्य प्रदेशों से मध्यप्रदेश में लाया गया है.

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