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सरदार सरोवर बांध: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात, MP और महाराष्ट्र को जारी किया नोटिस, पुनर्वास को लेकर मांगा जवाब

Pankaj Shukla | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 18, 2019, 11:56 PM IST
सरदार सरोवर बांध: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात, MP और महाराष्ट्र को जारी किया नोटिस, पुनर्वास को लेकर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बिना पुनर्वास डूब के मुद्दे पर मांगा जवाब.

सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के विस्थापितों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुजरात, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए पुनर्वास के मुद्दे पर जवाब मांगा है.

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बड़वानी. सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के विस्थापितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर याचिका पर आज न्यायाधीश एनवी रामन्ना व अजय रस्तोगी (Justice NV Ramanna & Ajay Rastogi ) की खण्डपीठ के समक्ष सुनवाई हुई. विस्थापितों की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कोर्ट को बताया कि नर्मदा न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2000 एवं 2005 के फैसलों के खिलाफ सरदार सरोवर में जल स्तर बढ़ाने के निर्णय से हजारों परिवरों को अन्याय और अत्याचार सहना पड़ रहा है. अप्रैल, 2019 में ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार पुनर्वास की बात करने के बावजूद मात्र सभी राज्यों के प्रभावितों को हटाने की योजना प्रस्तुत करने को कहा गया और 15 अक्टूबर 2019 तक 138.68 मीटर यानी पूर्ण जलाशय स्तर तक पानी सरदार सरोवर में भरने की मंजूरी दी गई, जो कि फैसलों का उल्लंघन था.

संजय पारिख ने कोर्ट के सामने रखी ये बात
अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि बाद में इस समयपत्रक को भी बदलकर 17 सितंबर 2019 को लक्ष्य बनाकर उस दिन तक पूर्ण जलस्तर तक पानी भरा गया. 138.68 मीटर के नीचे तथा उसके असर से हजारों परिवारों के घर, गांव, खेत, मंदिर कई धार्मिक स्थल, हजारों पेड़, चारागाह, दुकान, शासकीय भवन आदि डूब गए हैं. बिना पुनर्वास, खेतीहर मजदूर, कुम्हार, दुकानदार सहित हजारों परिवारों की आजीविका छीन ली गई है. पुनर्वास 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार भी अधूरा रखकर जल भराव हुआ है और सर्वोच्च अदालत ने आज गुजरात, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश को नोटिस जारी कर उनसे इस मुद्दे पर जवाब मांगा है. जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर 2019 को होगी.

मेधा पाटकर ने किया आंदोलन

नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) की नेता मेधा पाटकर (Medha Patkar) ने डूब प्रभावितों के लिए आंदोलन भी किया, जो कि अब समाप्‍त हो चुका है. इस दौरान उन्‍होंने कहा था कि सरदार सरोवर डैम अधिक पानी भरने के कारण मध्य प्रदेश के 178 गांव डूबने की कगार पर पहुंच गए हैं. इनमें रह रहे 25 से 30 हजार लोगों के बेघर होने का खतरा बढ़ गया है. ये अन्याय पूर्ण और अमानवीय है. बावजूद इसके मध्य प्रदेश सरकार इनकी लड़ाई ठीक से नहीं लड़ रही है. जबकि पुनर्वास का पूरा खर्च गुजरात सरकार को देना है. वहीं 1857 करोड़ रुपए के मुआवजे में से सिर्फ 69 करोड़ रुपए ही गुजरात सरकार ने दिए हैं और ऐसे में एमपी सरकार को पूरे मुआवजे की लड़ाई लडनी होगी.

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First published: September 18, 2019, 8:23 PM IST
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