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मोदी नहीं राहुल दिला सकता थे वर्ल्ड कप, पढ़ें- टीम इंडिया का कांग्रेस कनेक्शन

Pradesh18
Updated: April 1, 2016, 8:05 PM IST
मोदी नहीं राहुल दिला सकता थे वर्ल्ड कप, पढ़ें- टीम इंडिया का कांग्रेस कनेक्शन

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भारत के करोड़ों प्रेमियों का दिल गुरुवार की रात को टूट गया. वर्ल्ड कप जीतने का सपना एक बार फिर पूरा नहीं हो सका. वानखेड़े के स्टेडियम में मौजूद सचिन तेंदुलकर भी इस हार के बाद मायूस नजर आए. विराट कोहली भावुक हो उठे और उनकी आंखे नम हो गईं. मैदान से लेकर घर में मैच देख रहे हर क्रिकेट प्रेमी के लिए इस हार का सदमा झेलना आसान नहीं था. मुकाबले के पहले टीम इंडिया को फेवरेट माना जा रहा था, लेकिन कमजोर वेस्टइंडीज ने शक्तिशाली टीम को हराकर उलटफेर दिया. इस हार को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ काफी माथापच्ची कर रहे है, लेकिन टीम की असल वजह का रहस्य इस खास कनेक्शन में छुपा है.
भारत के करोड़ों प्रेमियों का दिल गुरुवार की रात को टूट गया. वर्ल्ड कप जीतने का सपना एक बार फिर पूरा नहीं हो सका. वानखेड़े के स्टेडियम में मौजूद सचिन तेंदुलकर भी इस हार के बाद मायूस नजर आए. विराट कोहली भावुक हो उठे और उनकी आंखे नम हो गईं. मैदान से लेकर घर में मैच देख रहे हर क्रिकेट प्रेमी के लिए इस हार का सदमा झेलना आसान नहीं था. मुकाबले के पहले टीम इंडिया को फेवरेट माना जा रहा था, लेकिन कमजोर वेस्टइंडीज ने शक्तिशाली टीम को हराकर उलटफेर दिया. इस हार को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ काफी माथापच्ची कर रहे है, लेकिन टीम की असल वजह का रहस्य इस खास कनेक्शन में छुपा है.


दरअसल, भारतीय टीम ने अब तक जितने बार भी वर्ल्ड कप जीता है देश में कांग्रेस की सरकार रही है. ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ जब देश में कांग्रेस सरकार के रहते हुए भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जीता हैं. देश में 10 साल तक राज करने वाले मनमोहन सिंह के नेतृत्व में टीम इंडिया को यह गौरव दो बार हासिल हुआ.
दरअसल, भारतीय टीम ने अब तक जितने बार भी वर्ल्ड कप जीता है देश में कांग्रेस की सरकार रही है. ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ जब देश में कांग्रेस सरकार के रहते हुए भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जीता हैं. देश में 10 साल तक राज करने वाले मनमोहन सिंह के नेतृत्व में टीम इंडिया को यह गौरव दो बार हासिल हुआ.


भारत ने पहली बार 1983 में वर्ल्ड कप जीता था. उस वक्त देश में कांग्रेस का शासन था. टीम इंडिया ने 183 रन का मामूली स्कोर बनाने के बावजूद शक्तिशाली वेस्टइंडीज टीम को आसानी से हरा दिया था. इस जीत के बाद से ही देश में क्रिकेट को लेकर माहौल बदला. वर्ल्ड कप जीतने के बाद स्वदेश लौटने पर टीम इंडिया का जोरदार स्वागत हुआ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने सरकारी आवास पर पूरी टीम के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया था.
भारत ने पहली बार 1983 में वर्ल्ड कप जीता था. उस वक्त देश में कांग्रेस का शासन था. टीम इंडिया ने 183 रन का मामूली स्कोर बनाने के बावजूद शक्तिशाली वेस्टइंडीज टीम को आसानी से हरा दिया था. इस जीत के बाद से ही देश में क्रिकेट को लेकर माहौल बदला. वर्ल्ड कप जीतने के बाद स्वदेश लौटने पर टीम इंडिया का जोरदार स्वागत हुआ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने सरकारी आवास पर पूरी टीम के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया था.


 भारत के पास दूसरी बार 2003 में वर्ल्ड कप जीतने का मौका था. इस टूर्नामेंट में सचिन तेंदुलकर शानदार फार्म में चल रहे थे. भारत ने आसानी से सभी विपक्षी टीम को शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थीं. देश की बागड़ोर उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी. एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान खेले गए फाइनल में करोड़ों भारतवासियों की उम्मीदें टूट गई थी. वर्ल्ड कप बस एक जीत से दूर रह गया. फाइनल में रिकी पोटिंग के शतक और सचिन की नाकामी से दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना बिखर गया.


भारत के पास दूसरी बार 2003 में वर्ल्ड कप जीतने का मौका था. इस टूर्नामेंट में सचिन तेंदुलकर शानदार फार्म में चल रहे थे. भारत ने आसानी से सभी विपक्षी टीम को शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थीं. देश की बागड़ोर उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी. एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान खेले गए फाइनल में करोड़ों भारतवासियों की उम्मीदें टूट गई थी. वर्ल्ड कप बस एक जीत से दूर रह गया. फाइनल में रिकी पोटिंग के शतक और सचिन की नाकामी से दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना बिखर गया.


1983 के बाद भारत को वर्ल्ड कप जीतने के लिए 24 साल का इंतजार करना पड़ा. शाइनिंग इंडिया कैम्पैन फ्लॉप हो चुका था. देश की राजनीति के साथ ही क्रिकेट में भी बदलाव का दौर था. 2007 जहां देश की बागडोर मनमोहन सिंह के हाथों में थीं. वहीं अब 50 ओवर की जगह 20-20 ओवर का फटाफट क्रिकेट आ गया था. दिग्गज क्रिकेटरों के इनकार के बाद युवा महेंद्र सिंह धोनी को इस फटाफट क्रिकेट की इंडियन टीम का कप्तान बनाया गया. यह प्रयोग सफल रहा और टीम इंडिया फटाफट क्रिकेट के पहले वर्ल्ड कप का सरताज बन गया. जोगिंदर शर्मा का आखिरी ओवर और पाकिस्तान के खिलाफ बोल्ड आउट भारतीय क्रिकेट के ऐतिहासिक पलों में शुमार हो गया. इस तरह एक बार फिर देश में कांग्रेस सरकार के दौरान टीम इंडिया वर्ल्ड चैंपियन बन गई.
1983 के बाद भारत को वर्ल्ड कप जीतने के लिए 24 साल का इंतजार करना पड़ा. शाइनिंग इंडिया कैम्पैन फ्लॉप हो चुका था. देश की राजनीति
के साथ ही क्रिकेट में भी बदलाव का दौर था. 2007 जहां देश की बागडोर मनमोहन सिंह के हाथों में थीं. वहीं अब 50 ओवर की जगह 20-20ओवर का फटाफट क्रिकेट आ गया था. दिग्गज क्रिकेटरों के इनकार के बाद युवा महेंद्र सिंह धोनी को इस फटाफट क्रिकेट की इंडियन टीम का
कप्तान बनाया गया. यह प्रयोग सफल रहा और टीम इंडिया फटाफट क्रिकेट के पहले वर्ल्ड कप का सरताज बन गया. जोगिंदर शर्मा का आखिरी
ओवर और पाकिस्तान के खिलाफ बोल्ड आउट भारतीय क्रिकेट के ऐतिहासिक पलों में शुमार हो गया. इस तरह एक बार फिर देश में कांग्रेस
सरकार के दौरान टीम इंडिया वर्ल्ड चैंपियन बन गई.


 क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के नाम पर वर्ष 2011 तक क्रिकेट का हर रिकॉर्ड दर्ज था. लेकिन 2003 में फाइनल में मिली हार की टीस उन्हें हर वक्त वर्ल्ड कप नहीं जीतने की कमी का अहसास दिलाती रहती थी. वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में मिली हार के आठ साल बाद देश और भारतीय क्रिकेट बदल चुका था. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में देश में स्थिरता का माहौल था तो धोनी भी साल 2011 तक एक परिपक्व कप्तान बन चुके थे. इसी दौर में भारत के वर्ल्ड कप जीतने का 28 साल का इंतजार खत्म हुआ. भारत ने फाइनल में श्रीलंका को हराया था. इसके पहले भारत-पाकिस्तान सेमीफाइनल मुकाबले को देखने के लिए खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मोहाली गए थे.

क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के नाम पर वर्ष 2011 तक क्रिकेट का हर रिकॉर्ड दर्ज था. लेकिन 2003 में फाइनल में मिली हार की टीस उन्हें हर वक्त वर्ल्ड कप नहीं जीतने की कमी का अहसास दिलाती रहती थी. वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में मिली हार के आठ साल बाद देश और भारतीय क्रिकेट बदल चुका था. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में देश में स्थिरता का माहौल था तो धोनी भी साल 2011 तक एक परिपक्व कप्तान बन चुके थे. इसी दौर में भारत के वर्ल्ड कप जीतने का 28 साल का इंतजार खत्म हुआ. भारत ने फाइनल में श्रीलंका को हराया था. इसके पहले भारत-पाकिस्तान सेमीफाइनल मुकाबले को देखने के लिए खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मोहाली गए थे.


वर्ष 2016 में अपने ही देश में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में भारत को जीत का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था. 2011 वर्ल्ड कप के पांच साल बाद भारत में सत्ता परिवर्तन हो गया है. अब देश में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है, जिसका नेतृत्व नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. लेकिन टीम इंडिया की कमान मुकद्दर का सिकंदर बन चुके एमएस धोनी के हाथों में ही थी. लेकिन देश में एक बार फिर भाजपा की सरकार थी और एक बार फिर टीम इंडिया के हाथ से वर्ल्ड कप फिसल गया.
वर्ष 2016 में अपने ही देश में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में भारत को जीत का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था. 2011 वर्ल्ड कप के पांच साल बाद भारत में सत्ता परिवर्तन हो गया है. अब देश में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है, जिसका नेतृत्व नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. लेकिन टीम इंडिया की कमान मुकद्दर का सिकंदर बन चुके एमएस धोनी के हाथों में ही थी. लेकिन देश में एक बार फिर भाजपा की सरकार थी और एक बार फिर टीम इंडिया के हाथ से वर्ल्ड कप फिसल गया.

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First published: April 1, 2016, 7:10 PM IST
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