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मां को ठेलागाड़ी पर गांव से ज़िला अस्पताल लाते हैं कलयुग के श्रवण कुमार, ये है कारण

Pankaj Shukla | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 15, 2019, 12:49 PM IST
मां को ठेलागाड़ी पर गांव से ज़िला अस्पताल लाते हैं कलयुग के श्रवण कुमार, ये है कारण
मां के इलाज के लिए उन्हें ठेलागाड़ी पर बिठाकर शहर लाते हैं राधू

राधू इलाज के लिए अपनी मां को ठेलागाड़ी (Cart)पर बिठाकर गांव से 12 किमी दूर बड़वानी ज़िला अस्पताल (Barwani District Hospital)लाते और ले जाते हैं. गांव में पर्याप्त स्वास्थ सुविधा और बस (Bus) की कमी ने इन्हें श्रवण कुमार बना दिया है.

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बड़वानी जिला मुख्यालय (Barwani) की सड़कों पर पिछले कुछ दिनों से एक व्यक्ति ठेला गाड़ी (Cart) पर बुजुर्ग महिला को बिठाकर लाते और ले जाते हैं. आज जब परिवहन के अनेक साधन हैं, ऐसे में इन्हें इस तरह से आता जाता देखकर कौतुहल होना स्वाभाविक है. पता चला कि ये वृद्ध महिला इनकी मां हैं, और वो उन्हें इलाज कराने के लिए 12 किमी दूर गांव से उन्हें लेकर ज़िला अस्पताल आते हैं. गांव में चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, गांव से बस भी नहीं चलती इसलिए ये इस तरह से अपनी मां को इलाज के लिए लेकर आते हैं.

मां के इलाज के 24 किमी ठेलागाड़ी चलाते हैं
कलयुग में अपनी मां के पांव में हुए घाव को लेकर इलाज के लिए उनके बेटे राधू 12 किमी की दूरी ठेला गाड़ी पर बिठाकर तय करते हैं. राधू इस ठेलागाड़ी को पैदल धकाते हुए ग्राम लोनसरा खुर्द से बड़वानी ले जा रहे हैं. पिछले 20 दिनों में 4 बार इन्होंने 24 किमी का सफर पैदल तय किया है. राधू की मां रेवा के पैर में कांटा लगने के बाद से घाव बढ़ता जा रहा था. घाव की ड्रेसिंग के लिए राधू मां को पिछले 20 दिनों में 4 बार गांव से ज़िला अस्पताल ले जा चुके हैं. राधू और उसके भाई रामू की माली हालत ठीक नहीं है, और गांव से कोई बस भी नहीं गुजरती. ऐसे में सिवाय हाथ ठेले के उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

News - राधू श्रवण कुमार की तरह अपनी मांग का ध्यान रखते हैं
राधू श्रवण कुमार की तरह अपनी मांग का ध्यान रखते हैं


मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव
गांव ग्राम लोनसरा खुर्द के निवासी कालूराम ने बताया कि इस गांव के लिए बस की सुविधा नहीं है. साथ ही गांव में केवल मामूली उप स्वास्थ्य केंद्र है, जहां केवल प्रारंभिक इलाज ही हो पाता है, इस कारण ईलाज व अन्य कामों के लिए अंजड़ और बड़वानी के लिए पैदल जाना पड़ता है. गांव से बस नहीं गुजरने के कारण वहां की पूरी आबादी स्वास्थ्य समेत अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस मामले में जहां मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की नाकामी साफ नज़र आती है वहीं बेटे का मां के प्रति लगाव लोगों को चकित कर देता है. लोग उनमें श्रवण कुमार को देखते हैं.

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First published: September 15, 2019, 12:49 PM IST
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