विश्व पर्यावरण दिवस: देश में सूखे की खबर के बीच इन महिलाओं के तालाब लबालब

बैतूल में जलसंकट से पार पाने के लिए 16 महिलाओं ने तालाब खोद डाले. देश जब सूखे की मार से लोग परेशान हैं तब इनके तालाब लबालब हैं.

Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 5, 2019, 5:09 PM IST
Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 5, 2019, 5:09 PM IST
भीषण गर्मी के चलते जहां बैतूल जिले में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है. इसी स्थिति को देखते हुए जिले की कुछ महिलाओं ने बगैर किसी सरकारी मदद के जलसंरक्षण के साथ-साथ वृक्षारोपण की अनूठी मिसाल पेश की है. इस काम मे उनके पतियों ने भी पूरा योगदान दिया. गोपीनाथपुर गांव की इन 16 महिलाओं ने महज दो साल में तीन तालाब खोद डाले जिसमें अब साल भर लबालब पानी भरा रहता है. तालाब के पानी से खेती-किसानी के साथ पूरे गांव में जलापूर्ति भी होती है.

इन महिलाओं ने वसुंधरा महिला मंडल के नाम से एक समूह बनाकर रजिस्ट्रेशन करवाया और तालाब खुदाई में लग गई. अथक प्रयासों से दो साल में तीन तालाब बनकर तैयार हो गए. उसके बाद जैसे ही अगली बारिश आई ये तालाब लबालब भर गए. ये महिलाएं आज इन तालाब के पानी से खेती कर रही है और साल में सब्जी से 1 से 2 लाख , फलो की बिक्री से भी लगभग 2 लाख और इतना ही मछली पालन से कमा रही है.

असंभव को कर दिखाया संभव

ये तालाब 4 से 6 हैक्टेयर में फैले हुए है. तालाब खुदाई के दौरान किसी भी प्रकार की कोई सरकारी मदद इन महिलाओं को नही मिली उसके बावजूद भी इन महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी जिसका नतीजा आज सबके सामने है.

इन महिलाओं ने 150 आंवले, 70 सन्तरे, 110 कटहल और अनार सहित कई फलदार पेड़ लगाए है. इसके साथ ही इनका लक्ष्य सालाना 1500 आम के पौधे लगाने का है. वहीं ककोड़ा, परमल, मिर्ची सहित अन्य सब्ज़ियों का भी उत्पादन हो रहा है. समूह को सिर्फ इतना ही मलाल है की सरकार ने इनकी पहल को अभी तक नजरअंदाज किया, पर इस समूह ने साबित कर दिखाया कि अगर हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने की ठान ली जाए तो सरकारी मदद के बिना भी बहुत कुछ किया जा सकता है.
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First published: June 5, 2019, 4:37 PM IST
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