जानिए क्यों, यह गांव सोलर विलेज के नाम से देश-विदेश में मशहूर है

बैतूल जिले में गांव बाचा सोलर विलेज के नाम से देश विदेश में मशहूर हो गया है. इस गांव में खाना पकाने से लेकर अन्य सभी ज़रूरतों के लिए 100 फीसदी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल हो रहा है.

Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 1, 2019, 2:12 PM IST
जानिए क्यों, यह गांव सोलर विलेज के नाम से देश-विदेश में मशहूर है
यह गांव सोलर विलेज के नाम से देश-विदेश में मशहूर है
Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 1, 2019, 2:12 PM IST
पूरी दुनिया जहां प्रदूषण, बिजली और पानी के संकट से घिरती जा रही है, वहीं भारत में एक ऐसा गांव भी है जो ऊर्जा और पानी की ज़रूरतों के लिए अब किसी का मोहताज नहीं है. ये गांव कहीं और नहीं बल्कि एमपी के बैतूल जिले का आदिवासी बाहुल्य गांव बाचा है. यह गांव सोलर विलेज के नाम से देश विदेश में मशहूर हो गया है. इस गांव में खाना पकाने से लेकर अन्य सभी ज़रूरतों के लिए 100 फीसदी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल हो रहा है. सोलर एनर्जी की वजह से ग्राम बाचा 100 फीसदी प्रदूषण मुक्त भी हो गया है. इसके साथ ही गांव के आदिवासी मिलकर जलसंरक्षण में भी जुटे हुए हैं. इससे बिजली सहित पानी की ज़रूरतों में भी बाचा गांव देश का इकलौता आत्मनिर्भर गांव बन गया है.

पूरे गांव ने दिया योगदान

सतपुड़ा की सुरम्य वादियों के बीच बसा है बैतूल जिले का आदिवासी बाहुल्य गांव बाचा


सतपुड़ा की सुरम्य वादियों के बीच बसे बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य बाचा गांव में न तो चूल्हों से निकलने वाले धुएं का प्रदूषण है, ना बिजली गुल होने का तनाव और न ही पीने के साफ पानी की कोई किल्लत. ये देश का ऐसा गांव है जिसे दुनिया आज सोलर विलेज के नाम से जानने लगी है. गांव में हर घर के आंगन या आसपास सोलर पैनल नज़र आते हैं. ऊर्जा की सभी ज़रूरतें यहां सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं. इस आदिवासी बाहुल्य गांव के सोलर विलेज बनने की शुरुआत साल 2018 में हुई थी. इसमें पूरे गांव के लोगों ने अपना योगदान दिया.

सौर ऊर्जा से पूरी हो रही जरूरतें

आज गांव का हर परिवार सौर ऊर्जा से अपनी सारी ज़रूरतें पूरी कर रहा है. गांव के आसपास जंगलों में अवैध कटाई पर लगाम लगी है. गांव की महिलाएं अब लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर नहीं बल्कि सोलर इंडक्शन चूल्हों पर मिनटों में खाना पका लेती हैं. सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से प्रदूषण नहीं होता और गाँव में स्वच्छ वातावरण दिखाई देता है.

हर परिवार सौर ऊर्जा से अपनी सारी ज़रूरतें पूरी कर रहा है.

Loading...

पानी को लेकर भी बना आत्मनिर्भर

दरअसल साल 2018 में जिले के भारत भारती शिक्षा संस्थान ने आईआईटी मुम्बई और ओएनजीसी को एक प्रस्ताव भेजकर ग्राम बाचा को सोलर विलेज बनाने की बात कही गई थी. इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही गांव को 100 फीसदी सोलर विलेज बनाने की शुरुआत हुई और केवल 10 महीनों के अंदर ये देश का पहला सोलर विलेज बन गया. वहीं अब इस गांव को वाटर विलेज की उपाधि भी मिलने जा रही है, क्योंकि पानी के मामले में भी बाचा पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है.

गांव में सभी घरों के सामने ऐसी जलसंरचनाएं बनाई गई हैं जिससे पानी की एक बूंद को भी सहेज लिया जाए.


पहले सोलर विलेज और अब वाटर विलेज बन चुके ग्राम बाचा को देखने देश विदेश से लोग आ रहे हैं. सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के अलावा गांव में सभी घरों के सामने ऐसी जलसंरचनाएं बनाई गई हैं जिससे पानी की एक बूंद को भी सहेज लिया जाए. गांव के लोगों ने ये साबित कर दिखाया है कि सामूहिक प्रयासों से कुछ भी असम्भव नहीं है. अगर सभी मिलकर प्रयास करें तो दुनिया को प्रदूषण ,बिजली और पानी की समस्याओं से बाहर निकाला जा सकता है.

ये भी पढ़ें - नकली घी की फैक्ट्री चला रहा डॉक्टर गिरफ्तार, 800 KG घी बरामद

ये भी पढ़ें - क्या ये है MP का सबसे बड़ा घोटाला?3.50 लाख ई-टेंडर्स की जांच

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए बैतूल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 1, 2019, 2:12 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...