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बैतूल के 50 बच्चे बनाने जा रहे हैं सुपर मेमोरी टेस्ट का विश्व रिकॉर्ड

News18 Madhya Pradesh
Updated: January 20, 2019, 3:06 PM IST
बैतूल के 50 बच्चे बनाने जा रहे हैं सुपर मेमोरी टेस्ट का विश्व रिकॉर्ड
शतावधान की क्रिया करता बच्चे

शतावधान की क्रिया में जो बच्चे सफल होते हैं उन्हें शतावधानी कहा जाता है. योग और ध्यान के माध्यम से इन बच्चों की तैयारी करवाई जाती है. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि ब्रायन ने व्यक्तिगत कीर्तिमान बनाए हैं, लेकिन एक साथ 50 या उससे भी ज्यादा बच्चों द्वारा इस क्रिया को अंजाम देने का रिकॉर्ड बैतूल में बनाने की तैयारी की जा रही है.

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मध्यप्रदेश के बैतूल में एक निजी स्कूल के 50 से ज्यादा छात्र सुपर मेमोरी टेस्ट में जल्द ही नया विश्व कीर्तिमान बनाने जा रहे हैं. इस मेमोरी पावर टेस्ट को शतावधान कहा जाता है और यह एक दुर्लभ विधा है. स्कूल के 6 से 15 वर्ष के छात्रों की याददाश्त इतनी मजबूत हो चुकी है कि ये एक बार में 100 चीजों को देखने या उनके नाम सुनने के बाद बिना देखे एक बार में पूरी 100 वस्तुओं के नाम बिना रुके दोहरा सकते हैं. वस्तुओं के नाम क्रमबद्ध या क्रम से हटकर भी बताने में इन बच्चों को महारथ हासिल हो गई है. फिलहाल इस विधा का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड डोमिनिक ओ ब्रायन के नाम है.

एक सामान्य व्यक्ति एक बार में 5 से 10 वस्तुओं के नाम बिना देखे दोहरा सकता है, लेकिन बैतूल के ये बच्चे सामन्य व्यक्तियों से भिन्न है. बच्चों के ट्रेनर ललित गुप्ता का कहना है कि इन बच्चों को योग और ध्यान के जरिए शतावधान की क्रिया में माहिर बनाया गया है. स्कूल के छात्र 100 से ज्यादा वस्तुओं के नाम बिना देखे बता सकते हैं. ब्रिटेन के डोमिनिक ओ ब्रायन एक बार में 2808 चीजों के नाम याद रख सकते हैं, और इसी से प्रेरित होकर स्कूल ने इन बच्चों को शतावधान की क्रिया में तैयार करने का फैसला लिया है.

शतावधान की क्रिया में जो बच्चे सफल होते हैं उन्हें शतावधानी कहा जाता है. योग और ध्यान के माध्यम से इन बच्चों की तैयारी करवाई जाती है. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि ब्रायन ने व्यक्तिगत कीर्तिमान बनाए हैं, लेकिन एक साथ 50 या उससे भी ज्यादा बच्चों द्वारा इस क्रिया को अंजाम देने का रिकॉर्ड बैतूल में बनाने की तैयारी की जा रही है. सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी का कहना है कि भारत के प्राचीन इतिहास पर नजर डालें तो इस तरह से बच्चों को शिक्षा देने के प्रमाण मिल जाते हैं, लेकिन आधुनिक युग में यह एक दुर्लभ घटना है.

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First published: January 20, 2019, 3:01 PM IST
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