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MP News : क्या आपने अजगर का ऑपरेशन देखा है? नहीं, तो ये Video जरूर देखें

अजगर के पेट में 12 टांके आए हैं.

अजगर के पेट में 12 टांके आए हैं.

Madhya Pradesh Python Operation Viral Video : 7 फुट का अजगर खेती किसानी के किसी उपकरण में फंस गया था. इसमें उसका पेट फट गया था और आंत बाहर आ गयी थीं. अजगर का ऑपरेशन कर आंतें अंदर डाली गयीं और 12 टांके लगाए गए.

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बैतूल. बैतूल (betul) में एक अजगर (python) की जान बचाने के लिए उसकी दो घंटे तक सर्जरी की गई. उसे एनस्थीसिया देकर बेहोश किया गया और ऑपरेशन (operation) के बाद मरहम पट्टी की गयी. प्रयास सफल हुआ. अजगर की जान बच गयी. फिलहाल डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे हैं. ठीक होते ही अजगर को सतपुड़ा के जंगल में छोड़ दिया जाएगा.

ये वाकया बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के मोरडोंगरी गांव का है. यहां एक 7 फुट का अजगर  खेती किसानी के किसी उपकरण में फंस गया था. इसमें उसका पेट फट गया था. वो बुरी तरह जख्मी था. इसकी सूचना मिलते ही सर्प विशेषज्ञ और वन विभाग ने अजगर को रेस्क्यू किया और उसे सीधे घोड़ाडोंगरी के पशु चिकित्सालय ले आए.

समय पर मिला इलाज
घोड़ाडोंगरी के पशु चिकित्सालय में अजगर की जांच की गयी और फिर उसके ऑपरेशन की तैयारी शुरू हुई. उसे एनेस्थीसिया देकर उसकी सर्जरी शुरू की गई. ऑपरेशन करीब दो घंटे चला. इतनी लंबी चली सर्जरी के बाद आखिरकार अजगर की जान बच गई. हालांकि उसे अभी ऑब्जर्वेशन में ही रखा गया है. सर्प विशेषज्ञ ने बताया कि अजगर के स्वस्थ्य होते ही उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाएगा.

खेत में फट गया पेट
29 जून 2021 की शाम को सारणी निवासी पर्यावरणविद आदिल खान को सूचना मिली कि मोरडोंगरी गांव में खेत की जुताई करते समय एक अजगर का पेट कट गया है और उसकी आंतें बाहर आ गई हैं. आदिल ने फौरन सारणी रेंजर अमित साहू को इसकी सूचना दी. अमित साहू ने भी तत्परता दिखाते हुए वन विभाग से वन रक्षक करण सिंह मर्सकोले को आदिल के पास पहुंचाया. फिर अपने दो सहयोगी अपूर्व, अर्पित सिंह और वन विभाग के आरक्षक के साथ वो खुद भी मोरडोंगरी गांव पहुंच गए और अजगर को सारणी ले लाए.

आधी रात में ऑपरेशन
पर्यावरणविद आदिल खान ने वेटरनरी डॉक्टर सीमा ठाकुर और एसडीओ फॉरेस्ट सारणी विजय कुमार मौर्य को सूचना दी. रात लगभग 9:30 बजे घोड़ाडोंगरी पशु चिकित्सालय में 7 फीट लंबे अजगर का वेटरनरी डॉक्टर सीमा ठाकुर, डिस्पेंसरी अटेंडेड दशरथ गीत ने ऑपरेशन शुरू किया, जो रात को 11 बजे तक चला.

बाहर आ गयी थीं आंत
सर्प विशेषज्ञ आदिल खान  ने बताया कि लगभग डेढ़ घंटे तक वो खुद और वन रक्षक करन सिंह मर्सकोले और एक अन्य व्यक्ति अजगर को पकड़े खड़े रहे. अजगर बहुत ताकतवर होता है इसलिए उसे संभालने के लिए तीन लोग लगे. ऑपरेशन शुरू करते समय पहले जहां चोट लगी थी वहां पर एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया. उसके बाद अजगर का आंतों का जो हिस्सा बाहर आ गया था उसकी सफाई की गई और उसे वापस शरीर में डाला गया. अजगर बार-बार गहरी सांस ले रहा था. इस वजह से अंदर डाला हिस्सा बाहर आ रहा था, धीमे धीमे कर के अजगर को अंदर और बाहर दोनों तरफ टांके लगाए गए और फिर उसकी सफाई करके ड्रेसिंग की गई.

दो लेयर में 12 टांकें
सात फीट लंबे अजगर की आंतें बाहर आ गई थीं जिसे अंदर करके दो लेयर में लगभग बारह टांके लगाए गए. अजगर को अभी वन विभाग, सर्प विशेषज्ञ आदिल खान और वेटरनरी डॉक्टर सीमा ठाकुर की निगरानी में रखा गया है. स्वस्थ होने पर उसे सतपुड़ा के घने जंगलों में छोड़ दिया जाएगा।. आदिल खान ने कहा वन विभाग और वेटरनरी विभाग से बहुत सहयोग मिला और तत्परता के साथ सब कुछ हुआ जिससे अजगर की जान बच गई. यह गर्व की बात है कि सारणी जैसे छोटे शहर में भी अब वन्य प्राणियों के लिए बेहतर उपचार संभव हैं.

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