देखें बैतूल का भूतों का मेला, विदेश से भी लोग आते हैं यहां

मध्य प्रदेश के बैतूल में 300 साल से हर वर्ष भूतों का मेला लगता है. इस मेले में शामिल होने इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षाविदों से लेकर विदेशी पर्यटक भी आते हैं.

Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 25, 2019, 7:34 AM IST
Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 25, 2019, 7:34 AM IST
बैतूल के मलाजपुर गांव में भूत- प्रेत लोगों के शरीर के अंदर से कथित रूप से भूत- प्रेत बातें करते हैं और इंटरव्यू भी देते हैं. दरअसल मलाजपुर गांव में गुरुसाहब बाबा नाम के एक संत की समाधि है जहां पिछले 305 वर्षों से लगातार भूतों का मेला लगते आ रहा है. यहां कथित तौर पर भूतों का इलाज होता है. इसलिए इसे भूतों का हॉस्पिटल भी कहा जाता है. भूतों का इलाज किसी दवा से नहीं बल्कि एक झाड़ू से किया जाता है. अंधी आस्था के इस महाकुंभ में हर साल हजारों लोग आते हैं जिनमें इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षाविदों से लेकर विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं.

300 साल से लग रहे भूतों के मेले में दूर-दूर से आते हैं लोग


समाधि स्थल पर मेला हर साल माघ पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है. जिन लोगों को ए भ्रम होता है कि उनके शरीर में किसी बुरी आत्मा या पिशाच ने प्रवेश कर लिया है वे इनसे छुटकारा पाने के लिए इस मेले में आते हैं. लेकिन ए भूत प्रेत न केवल नाचते- गाते झूमते दिखाई देते हैं बल्कि इंटरव्यू भी देते हैं.

एक तरह से भूत-प्रेतों का हॉस्पिटल नजर आता है जहां के डॉक्टर हैं स्थानीय पुजारी जो दवाओं से नहीं बल्कि झाड़ू से पीट- पीटकर इन भूत प्रेतों को लोगों के शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं . देखने में ए नजारे बेहद अमानवीय नजर आते हैं लेकिन पुजारियों के मुताबिक भूत प्रेत इसी प्रक्रिया से बाहर निकलते हैं और दोबारा कभी वापस नहीं आते .

सदियों से यहां आस्था और अंधविश्वास को लेकर बहस छिड़ी हुई है लेकिन ए आयोजन इसलिए जारी है क्योंकि समाज का एक बड़ा शिक्षित वर्ग भी इस मेले में शामिल होता है और इसे अंधविश्वास मानने के लिए तैयार नहीं है .

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First published: July 25, 2019, 6:31 AM IST
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