अस्पताल की लापरवाही: 10 दिन बाद महिला के गर्भ से निकाला गया कपड़े का टुकड़ा

एक महिला की प्रसूति के बाद उसके पेट में कपड़े का टुकड़ा छोड़ दिया गया. 10 दिन बाद इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब महिला के शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा. उसके शरीर से बदबू आने लगी.

Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 18, 2019, 11:29 PM IST
अस्पताल की लापरवाही: 10 दिन बाद महिला के गर्भ से निकाला गया कपड़े का टुकड़ा
बैतूल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने कहा कि शिकायत मिली तो जांच होगी.
Rishu Naidu | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 18, 2019, 11:29 PM IST
मरीजों के साथ लापरवाही बरतने के लिए कुख्यात बैतूल के जिला अस्पताल का एक नया कारनामा उजागर हुआ है. यहां के नर्सिंग स्टाफ ने एक महिला की प्रसूति के बाद उसके पेट में कपड़े का टुकड़ा छोड़ दिया. 10 दिन बाद इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब महिला के शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा. उसके शरीर से बदबू आने लगी. इससे महिला की हालत बिगड़ गई और उसकी जान पर बन आई. वापस जिला अस्पताल आने पर महिला के पेट से कपड़ा तो निकाल दिया गया, लेकिन साथ ही महिला को अपनी जुबान बंद रखने की धमकी भी दी गई.

बता दें कि बैतूल के पाढर गांव की संतोषी नागले की जिला अस्पताल में 7 जुलाई को सामान्य डिलिवरी हुई थी. जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे. लेकिन संतोषी को नहीं मालूम था कि वो घर लौटते समय अपने साथ जिला अस्पताल की लापरवाही लेकर जा रही है. प्रसूति के बाद नर्सिंग स्टाफ ने गलती से उसके पेट में कपड़े का एक टुकड़ा छोड़ दिया था. जब कुछ दिनों बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी, तब 16 जुलाई को वह वापस जिला अस्पताल आई. तब नर्सिंग स्टाफ ने चुपचाप उसके पेट से कपड़ा निकालकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की.

पति ने कहा- पत्नी की जा सकती थी जान

इस मामले में महिला के पति प्रदीप नागले ने कहा कि इस लापरवाही से उसकी पत्नी की जान जा सकती थी. इसलिए दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उसने कहा कि उसकी पत्नी अभी भी इलाजरत है. वहीं बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है. फिर उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई शिकायत आई तो निश्चितरुप से उसकी जांच की जाएगी. मामले में कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

बैतूल जिला अस्पताल - पति ने दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.


बता दें कि पिछले दिनों बैतूल की भैंसदेही तहसील के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिलने से एक मासूम बच्ची की जान खतरे में पड़ गई थी. तब निजी डॉक्टरों ने उसे किसी तरह बचाया था. अब ये मामला भी स्वास्थ्य महकमे की घोर लापरवाही का बड़ा सबूत है.

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First published: July 18, 2019, 11:12 PM IST
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