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Padmaavat Review: शिवाजी की तरह पद्मावती के पराक्रम को बयां करती 'पद्मावत'

Padmaavat Review: शिवाजी की तरह पद्मावती के पराक्रम को बयां करती 'पद्मावत'

फाइल- PTI

फाइल- PTI

फ़िल्म में रानी पद्मावती कहती हैं कि युद्ध तलवार से नहीं नीति से जीते जाते हैं. ज़ाहिर है ये युद्ध कला में दक्ष और राजधर्म को समझने वाली नारी ही बोल सकती है.

    फ़िल्म पद्मावत को लेकर जारी विरोध अपने अंतिम पड़ाव पर आ चुका है. देश के कुछ राज्यों को छोड़कर अन्य सभी जगहों पर फ़िल्म रिलीज हो चुकी है. सबसे खास बात ये है कि फ़िल्म देखकर हैरत होती है कि आखिर विरोध किस बात को लेकर है जबकि फ़िल्म पूरी तरह से देश के गौरवशाली राजपूताना इतिहास को एक आदरांजलि है.

    सबसे पहले तो फ़िल्म के उस विषय की बात करें जिसे लेकर विवाद हुआ है. कहा गया था कि फ़िल्म में कुछ ऐसे ड्रीम सीक्वेंस ( स्वप्न दृश्य) गढ़े गए हैं जिनमें खिलजी और रानी पद्मावती (पद्मिनी) को एक साथ दिखाया गया है लेकिन फ़िल्म के मौजूदा वर्जन में ऐसा कोई दृश्य नहीं. दूसरा आरोप ये था कि इतिहास को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है. अगर इस आरोप को मान भी लिया जाए तो भी देश के समृद्ध राजपूताना इतिहास का ही महिमामंडम हुआ है. पूरी फिल्म वीरांगना माता पद्मावती के अद्वितीय पराक्रम और राजधर्म को दर्शाती है.

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    सन 1330 ईस्वी की इस घटना के 224 साल बाद सन 1540 में सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने "पद्मावत" जैसी कालजयी रचना की थी जो मूल रूप से पर्सियन भाषा मे थी और जायसी ने उसका अवधी भाषा में भी अनुवाद किया था. उपलब्ध इतिहास के मुताबिक रानी पद्मावती मूल रूप श्रीलंका के सिंघल राजघराने की राजकुमारी थी जिनके अद्वितीय सौंदर्य की खबर चित्तौड़ के महाराजा रतन सिंह को मिली तो उन्होंने रानी पद्मावती से विवाह कर उन्हें राजपूताना की पुत्रवधू बनाया.

    इस दौरान दिल्ली की गद्दी पर खिलजी वंश के एक क्रूर दुर्दांत शासक अलाउद्दीन खिलजी का शासन हुआ जिसने रानी पद्मावती के विषय मे जानकर उन्हें हासिल करने में आसक्ति दिखाई और इसके लिए युद्ध तक किया लेकिन वो अपने इस प्रयास में नाकामयाब रहा क्योंकि माता पद्मावती ने इस दुष्ट को अपने तक पहुंचने से पहले ही जौहर कर लिया और इतिहास में उन्हें एक देवी का दर्जा मिल गया जो बिल्कुल वाजिब है.

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    कम ही लोग जानते हैं कि संजय लीला भंसाली ने लगभग 20 साल पहले इसी रचना पद्मावत को लेकर कई नाटक और बैले भी मंचित किये हैं. वहीं श्याम बेनेगल ने दूरदर्शन पर प्रसारित हुए "भारत एक खोज" के कुल 53 में से दो एपिसोड में अलाउद्दीन खिलजी की रानी पद्मावती को लेकर आसक्ति का संक्षिप्त उल्लेख किया था जिसके लिए बेनेगल ने देश के प्रसिद्ध इतिहासकारों से गहन विमर्श किया था. लेकिन मौजूदा समय मे जब "पद्मावत" को लेकर पूरे देश मे आग लगी है तो लोग इतिहास के पन्ने पलटने की बजाय उन बातों को लेकर विरोध कर रहे हैं जो फ़िल्म में दिखाया ही नहीं गया.

    Padmaavat
    पद्मावत फिल्म विवाद.


    फ़िल्म पद्मावत में जिस तरह से चित्तौड़ की महारानी पद्मावती की बुद्धिमानी, वीरता और राजधर्म को प्रदर्शित किया गया है उसे देखकर निश्चित ही हर देशवासी को भारतीय नारी पर गर्व होगा. हालांकि अब जौहर नहीं किये जाते लेकिन फ़िल्म पद्मावत बताती है कि एक भारतीय स्त्री अपनी अस्मिता के लिए किस हद तक त्याग कर सकती है.

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    फ़िल्म में खिलजी शासक अलाउद्दीन और रानी पद्मावती को कहीं भी साथ नहीं दिखाया गया है बल्कि हर दृश्य में रानी पद्मावती खिलजी को उसकी असल औकात याद दिलाते नज़र आई हैं. वो अपने पति महाराज रतन सिंह को खिलजियों से छुड़ाकर वापस लाती हैं जो एक राजपूत महिला के शौर्य को दर्शाता है.

    फ़िल्म में रानी पद्मावती कहती हैं कि युद्ध तलवार से नहीं नीति से जीते जाते हैं. ज़ाहिर है ये युद्ध कला में दक्ष और राजधर्म को समझने वाली नारी ही बोल सकती है. फ़िल्म पद्मावती रानी पद्मावती की वीरगाथा उसी तरह कहती है जिस तरह से वीर मराठा शिवाजी के पराक्रम को लोग जानते हैं.

    रणबीर सिंह ने खिलजी का किरदार जीवंत कर दिया जो फ़िल्म की मांग थी. उन्होंने कमाल का अभिनय किया है. दीपिका पादुकोण ने पर्दे पर माता पद्मावती के जीवन को जिया है. जैसा कि फ़िल्म की मांग थी दीपिका ने अपनी सुंदर और गरिमामय प्रस्तुति से मन मोह लिया. अन्य कलाकारों में राजा मुराद और अदिति राव हैदरी भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं.

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    फ़िल्म का उत्तरार्ध( फर्स्ट हाफ) थोड़ा धीमा है लेकिन इसके बाद का घटनाक्रम अंत तक काफी दर्शकों को बांधे रखता है. फ़िल्म में स्पेशल इफेक्ट भी अच्छे हैं खास तौर पर युद्धभूमि के कुछ दृश्य. स्क्रिप्ट पर भंसाली कुछ और भी काम कर सकते थे लेकिन इन विषयों में ज़्यादा प्रयोग घातक होते हैं. कुल मिलाकर फ़िल्म पद्मावत माता पद्मावत की शौर्यगाथा है जिसे देशवासी को देखना चाहिए. फ़िल्म देखने के बाद शायद ही किसी को कोई शिकवा शिकायत होगी. बल्कि लोग राजपूताना इतिहास और मां पद्मावत जैसी वीरांगना पर गर्व करेंगे.

    Tags: Deepika padukone, Ranveer Singh, Sanjay leela bhansali

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