बाढ़ पीड़ितों से मिलने भिंड पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ सरकार को दी नसीहत

ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे से मालवा की सियासत में गर्माहट
ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे से मालवा की सियासत में गर्माहट

ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने भिंड (Bhind) के अटेर में बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात की और आपकी लड़ाई भोपाल तक लड़ूंगा. बाढ़ पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि देने और अन्य सहायता पहुंचाने की कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) से की अपील.

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भिंड. कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) गुरुवार को बाढ़ पीड़ितों से मिलने भिंड (Bhind) पहुंचे. उन्होंने यहां पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत की और बाढ़ पीड़ितों की सहायता में हरसंभव मदद करने की अपील की. इस दौरान सिंधिया ने कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) को भी नसीहत दी. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने गांव की जनता से कहा है कि संकट की इस घड़ी में मैं उनके साथ खड़ा हूं, लेकिन सरकार को भी जनता के साथ खड़ा रहना ही होगा. सिंधिया के इस बयान को सियासी हलके में प्रदेश सरकार पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है. इस बयान के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं.

कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी
भिंड के अटेर इलाके में बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी कई समस्याएं रखीं. सिंधिया ने इन समस्याओं को कागज पर नोट किया और उनके समाधान का आश्वासन दिया. यही नहीं, सिंधिया सभी कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत तौर पर भी मिले. कार्यक्रम में दिग्विजय गुट के कैबिनेट मिनिस्टर डॉक्टर गोविंद सिंह, विधायक ओपीएस भदौरिया, विधायक रणवीर जाटव, पूर्व विधायक हेमंत कटारे सहित कई पार्टी नेता मौजूद रहे. हेमंत कटारे ने सिंधिया के समक्ष कई मांगें रखीं, जिस पर सिंधिया ने अटेर में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यहां पर कई गांवों में बिल्कुल इस प्रकार की स्थिति बन गई थी जैसे समुद्र में छोटा सा टापू हो. यहां के एक दर्जन गांव में तो सर्वे कराने की भी जरूरत नहीं है. इन गांव में शत-प्रतिशत नुकसान मानकर मुआवजा देना चाहिए.

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नसीहत दर नसीहत


ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाढ़ प्रभावितों को संबोधित करते हुए कहा, 'मैंने राजस्व अधिकारियों, कलेक्टर एवं एसपी से भी कह दिया है कि इन गांव में सौ प्रतिशत नुकसान की लिखाई होनी चाहिए. जल्द से जल्द राजस्व विभाग के अधिनियम के तहत हमारे किसानों को मुआवजा राशि मिलनी चाहिए. सरकार की जिम्मेदारी है कि संकट के समय में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे. इस सरकार की पहली जिम्मेदारी प्रदेश के अन्नदाताओं के प्रति है.' सिंधिया ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने कमलनाथ जी को भी कहा है कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को राजस्व विभाग के नियमानुसार आठ से लेकर 30 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा राशि मिलनी चाहिए. राजस्व विभाग के साथ ही जिन बीमा कंपनियों ने अन्नदाताओं के खातों से बीमा के पैसे काटे हैं, उन कंपनियों से भी मुआवजा राशि किसानों को मिलना चाहिए.'

पीएम को लिखी चिट्ठी
कांग्रेस के पूर्व सांसद ने राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने को कहा. सिंधिया ने कहा, 'बाढ़ पीड़ितों की सहायता केंद्र सरकार की भी जिम्मेदारी है. मैंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है कि मध्यप्रदेश में जहां-जहां नुकसान हुआ है, उसके लिए प्रदेश को साढ़े सात हजार करोड़ रुपए की सहायता राशि देनी चाहिए.' सिंधिया ने मनमोहन सरकार में बाढ़ एवं सूखा के दौरान दी गई सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि मनमोहन सरकार के समय दो-दो हजार करोड़ की सहायता राशि हमने दो बार दिलवाई है. उन्होंने कहा, 'मैं खाद्यान्न मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर से कहूंगा कि नियमानुसार जितना खाद्यान्न बाढ़ प्रभावित गांवों को मिलना चाहिए, उससे ज्यादा जितना भी सरकार कर पाए वो आपको उपलब्ध हो.' इस दौरान पुलों की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर की गई मांग पर उन्होंने कहा, 'बाढ़ जब आती है तो उस में या तो पुल ढह जाते हैं या फिर वह डूब में आ जाते हैं. आप यहां से प्रस्ताव बनाकर भेजें मैं भोपाल जाकर उस प्रस्ताव के लिए आप की लड़ाई लडूंगा.'

(अनिल शर्मा की रिपोर्ट)

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