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Ground Zero: भिंड में जिस पानी के लिए नदियों पर घर बसाया, उसी ने किया तबाह, जानिए क्या है हाल

Ground Zero: भिंड में जिस पानी के लिए नदियों पर घर बसाया, उसी ने किया तबाह, जानिए क्या है हाल

एमपी के भिंड जिले में बाढ़ का पानी भले ही उतर रहा है, लेकिन ये चारों ओर बर्बादी और तबाही का मंजर छोड़ गया है.

एमपी के भिंड जिले में बाढ़ का पानी भले ही उतर रहा है, लेकिन ये चारों ओर बर्बादी और तबाही का मंजर छोड़ गया है.

MP Flood News: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बाढ़ के बाद हर तरफ बर्बादी का मंजर है. यहां सैकड़ों गांवों के लोग गंभीर संकट से जूझ रहे हैं. नदी की बाढ़ का पानी उतर तो रहा है, लेकिन तबाही ने इन लोगों को बेबस और लाचार कर दिया है.

भिंड. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के भिंड जिले में बाढ़ का प्रकोप कम होने लगा है. गंभीर संकट से जूझ रहे सैकड़ों गांवों में लोगों को बाढ़ के पानी से राहत तो मिल रही है, लेकिन तबाही ने इन लोगों को बेबस और लाचार कर दिया है. प्रशासन की तरफ से इन हजारों लोगों के रुकने के लिए गिनती के राहत कैंप बनाए गए हैं. जिनके घरों में अभी भी पानी भरा है वे राहत कैंप में रहने को मजबूर हैं. जिनके घरों को पानी खाली करके चला गया है वे अब धीरे-धीरे लौट रहे हैं. लेकिन फिलहाल उनकी जिंदगी पटरी पर लौटती नजर नहीं आ रही. क्योंकि, बाढ़ के पानी ने उनका सब कुछ तबाह और बर्बाद कर दिया है.

News 18 की टीम ने Ground Zero का जायजा लिया तो तबाही का मंजर साफ दिखाई दिया. भिंड के चंबल और सिंध नदी के किनारे बसे किसानों को इस बात का कतई इल्म नहीं था कि जिस पानी के लिए नदियों के किनारे घरौंदे बनाए हैं वही पानी उन्हें इतना दर्द दे जाएगा कि उनकी आंखों में हमेशा के लिए पानी भर जाएगा. इतने सालों तक नदी किनारे बसे गांव में सुकून की जिंदगी बसर करने वाले इन ग्रामीणों की खुशहाल जिंदगी को बाढ़ ने पानी में डुबो दिया. बाढ़ का पानी नदियों से निकलकर घरों में घुस गया और लाचार किसानों को अपनी रातें खुले आसमान में गुजारनी पड़ीं.

25 राहत कैंपों में हजारों लोग
प्रशासन ने 25 राहत कैंप भी बनाए हैं, लेकिन हजारों किसानों के लिए ये नाकाफी साबित हुए. पुलिस प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना ने रेस्क्यू करके करीब 8000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया. यहां सब की जान तो बच गई, लेकिन जीवन भर तिनका-तिनका करके जमा की गई गृहस्थी उजड़ गई. घर में पानी का ऐसा प्रकोप हुआ कि सब कुछ बह कर बाढ़ के साथ ही चला गया. नदियों के रौद्र रूप में अब नरमी आ रही है तो इनके घरों से पानी भी विदा ले रहा है. जिन लोगों के घर पानी खाली कर चुका है वे अपने घरों को वापस लौट रहे हैं, लेकिन यहां फिलहाल आबादी के सिर्फ निशान ही बाकी रह गए हैं.

मलबे में तब्दील हुए घर
ज्यादातर घर गिर चुके हैं या मलबे में तब्दील हो चुके हैं. जो कुछ थोड़े बहुत मकान बचे हैं, उनमें इतनी सूखी जमीन भी नहीं बची कि वहां सिर रखकर किसान रात की नींद भी ले सकें. बूढ़ी आंखों में भी यह नजारा देखकर आंसू भर आते हैं. जिंदगी भर जो इकट्ठा किया वह बाढ़ के पानी में समा गया. घर आकर देखा तो सब कुछ आंखों की तरह ही गीला था. ककहरा और जखमोली गांव के लोग अपना दर्द कैमरे के सामने भी बयां कर रहे हैं, लेकिन जुबां से ज्यादा आंखें उनका दर्द बता रही हैं.

इस बात से डर रहे ग्रामीण
बाढ़ प्रभावितों का कहना है कि सरकार पेट भरने का फिलहाल इंतजाम कर रही है, लेकिन जब सरकार यह इंतजाम करना बंद कर देगी तो काम कैसे चलेगा. क्योंकि, जो कुछ था वह सब तो खत्म हो गया. बाढ़ का पानी तो उतर गया, गीली जमीन भी सूख जाएगी, लेकिन अब इन लोगों को दरकार उस मदद की है जिसके लिए वे सरकार पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं. वही, भिण्ड विधायक संजीव सिंह संजू व पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह  ग्रामीणों के बीच पहुँचकर मदद करने का भरोषा दिला रहे हैं.

Tags: Heavy rain, Mp news, Rivers flooded

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