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Navratra 2022: 11वीं सदी के पावई माता मंदिर की महिमा अपरंपार, मुगल भी खोज नहीं पाए थे मां की प्रतिमा 

पावई माता मंदिर

पावई माता मंदिर

मां करोली की छोटी बहन के रूप में पूज्‍यनीय माता की प्रतिमा खंडित करने आए मुगल भी इसे देखकर चकित रह गए थे. मुगल आततायियो ...अधिक पढ़ें

    भिंड. मध्य प्रदेश के भिंड जिला स्थित पावई माता मंदिर का इतिहास कई रहस्‍यों से भरा है. बीहड़ों के बीच बसा यह क्षेत्र ग्यारहवीं सदी से अस्तित्‍व में आया. गुर्जर प्रतिहार राजाओं के वंशजों ने तब यहां पावई वाली माता के मंदिर की स्‍थापना की थी. मां करोली की छोटी बहन के रूप में पूज्‍यनीय माता की प्रतिमा खंडित करने आए मुगल भी इसे देखकर चकित रह गए थे. मुगल आततायियों ने पूरा मंदिर छान मारा था, लेकिन माता की प्रतिमा नहीं मिली थी. कहा जाता है कि माता रानी ने कुएं में छलांग लगा दी थी, बाद में जब पुजारी को भविष्‍यवाणी हुई तब कुएं से प्रतिमा को बाहर निकाला गया था.

    यज्ञाचार्य पंडित सुखदेव शास्‍त्री बताते हैं कि जमींदारी का समय था, उस समय एक ग्‍वाला जंगल में गायों को चराने जाता था. गाय चराकर जब वो वापस आता तो उसकी काली गाय शाम को दूध नहीं देती थी, जबकि सुबह पूरा दूध देती थी. ग्वाले को चिंता हुई कि काली गाय का दूध आखिर शाम को जाता कहां है. ग्‍वाला ने एक दिन गाय का पीछा किया, तो देखा कि काली गाय जंगल में एक बामी के ऊपर पैर फैलाकर खड़ी हो गई. उसका सारा दूध बामी में चला गया. ग्‍वाला यह दृश्‍य देखकर आश्‍चर्यच‍कित रह गया और उसने लौटकर गांववालों को पूरी घटना बताई.

    तब गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने निर्णय लिया कि जमीन के अंदर खुदाई की जाए, ताकि पता चले कि आखिर यह क्या राज है. ग्रामीणों ने बामी को खोदना शुरू किया तो करीब 50 फीट अंदर भू-गर्भ में माता की मूर्ति विराजमान थी. बाद में पावई में इस प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्‍ठा कराई गई. खेरा यहां का बहुत ही प्रसिद्ध थान है, जहां सिद्ध आज भी रहते हैं.

    मुगलों ने वार किया तो माता ने कुएं में लगा दी छलांग
    पावई में काली माता के रूप में पूजा की जा रही भगवती के मंदिर में एक बार मुगलों ने आक्रमण कर दिया था. औरंगजेब के द्वारा सभी हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा को खंडित किया जा रहा था. पावई मंदिर में आज भी कई प्रतिमाओं के खंडित होने के प्रमाण मिलते हैं. मुगल जैसे ही मां की ओर बढ़े, मूर्ति गर्भगृह से छिटक कर कुएं में जा गिरी. मुगलों ने जब कुएं में प्रतिमा को निकालने के लिए जाल डाला, लेकिन मूर्ति नहीं निकली, तो गोताखोरों को उतारा गया किंतु वो मां की खोज नहीं कर सके. जब थक-हार कर मुगल वापस लौटे तब ग्रामीण कुएं में उतरे और मां प्रकट हो गईं. उसके बाद उन्‍हें कुएं वाली मां भी कहा गया. बताते हैं कि दोबारा मंदिर में मां की प्रतिमा को विधि-विधान के साथ स्‍थापित कराया गया था. इसके बाद मां की महिमा का डंका हर जगह बजने लगा था.

    करौली वाली मां की छोटी बहन के रूप में पूज्‍य
    करौली वाली मां की छोटी बहन मां पावई हैं जहां आदि शक्ति का सारे जगत में कर गिरे हैं वहां करोली बनी, और जहां पैर गिरे वहां पावई बनी. पित्त या देवता रूठ जाते हैं तो करौली या पावई से निकाले जाते हैं. एक अद्भुत चमत्‍कार यह भी है कि पावई वाली माता का मुख पश्चिम की ओर है जबकि गांव पूर्व में है. सभी देवी-देवताओं की प्रतिमा का मुंख गांव की ओर होता है. इसके पीछे मान्‍यता है कि माता राजा को प्रत्‍यक्ष दर्शन देती थीं, और उसके साथ चौपर (चौसर) खेलती थीं. उसी समय मंदिर के पुजारी नदी में जल भरने गए थे, वहां अचानक राक्षस आया और उसने पुजारी को पकड़ कर मारना चाहा, लेकिन पुजारी ने चिल्‍ला कर मदद की गुहार लगाई. मगर मैया चौपर खेलने में लीन थीं, राजा पासा जीत रहा था.

    आखिर में भक्‍त की पुकार सुन कर मैया चल दीं, तब राजा ने कहा- तुम कहां जा रही हो, हारने वाली हो. तभी मुंह घूम गया, इतने में करोली वाली मां ने दैत्‍य को मार दिया. उसी समय से उनका मुंह पश्चिम से घूम गया. मंदिर में जलाधि भी पीछे की ओर है.

    मंदिर में नहीं जाती तलवार, भक्‍त ने काट दिया था शीश

    किदवंती है कि पावई वाली माता मंदिर में भक्‍त तलवार लेकर नहीं पहुंच पाते. परंतु कमलपुरा गांव के एक व्‍यक्ति ने अपना सिर काटकर मैया के चरणों में अर्पित कर दिया था. मैया के प्रभाव से भक्‍त का सिर जुड़ गया था, उसी दिन से कमलपुरा गांव की तलवारें मंदिर में प्रवेश करने लगीं.

    पुलिसकर्मियों की पलट जाती थी चारपाई
    पंडित जी ने एक किस्‍सा यह भी बताया कि डकैतों से ग्रामीणाें की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी स्‍थापित की गई थी. पुलिसवाले रास्‍ते में चारपाई डालते थे तो वो पलट जाती थी, क्‍योंकि इस क्षेत्र में सिद्धों का वास था, लेकिन मां का नाम लेते ही सुरक्षाकर्मी भयमुक्‍त हो जाते थे. इस क्षेत्र में सिद्धों का इस तरह वास है कि 10 साल पूर्व ओमप्रकाश पुरोहित जौरी वाले ने 100 बीघा जमीन का पट्टा करवाया था, उसे समतल करने के ल‍िए बुल्‍डोजर चलवाए गये. इस दौरान टीले से हजारों सर्प निकल पड़े, आखिर में उन्‍हें काम बंद करना पड़ा, तब सिद्ध की स्‍थापना की और भागवत कथा करवाई गई.

    Tags: Bhind news, Durga Puja festival, Mp news, Navratri festival

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