Home /News /madhya-pradesh /

MP: फूलन देवी-निर्भय गुर्जर आखिर क्यों थे आतंक का दूसरा नाम? अब जान सकेंगे इन खूंखार डाकुओं की कहानी

MP: फूलन देवी-निर्भय गुर्जर आखिर क्यों थे आतंक का दूसरा नाम? अब जान सकेंगे इन खूंखार डाकुओं की कहानी

चंबल दस्युओं की कहानियां बताने भिंड में संग्रहालय बनाया जाएगा.

चंबल दस्युओं की कहानियां बताने भिंड में संग्रहालय बनाया जाएगा.

Initiative of Bhind Museum: फूलन देवी, निर्भय गूजर सहित चंबल के कई खूंखार डाकू आतंक का दूसरा नाम थे. इनका नाम ही किसी भी आदमी को डराने के लिए काफी था. पुलिस अब इनके साथ-साथ उन पुलिसवालों की भी कहानी सुनाने जा रहा है जिन्होंन इन डाकुओं को खत्म किया.

अधिक पढ़ें ...

भिंड. ‘यहां से पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रात को रोता है तो मां कहती है सो जा बेटे, नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा…’ ये डायलॉग भले ही शोले फिल्म का हो, लेकिन चंबल के डाकुओं ( Dacoits of Chambal) का आतंक वाकई ऐसा ही था. फूलन देवी, मलखान सिंह, निर्भय गुर्जर, पान सिंह तोमर…ये कुछ ऐसे नाम हैं, जिनका नाम सुनते ही लोगों में दहशत फैल जाती थी. ये आतंक और खौफ(Terror and Fear) का दूसरा नाम थे. ये इतने ज्यादा कुख्यात नहीं थे, जितना इनका नाम. इन खूंखार दस्युओं की दिलचस्प कहानियां देश में आज भी सुनाई जाती हैं.

अगर आपको भी खूंखार दस्युओं की कहानियों का शौक है, तो ये शौक जल्द पूरा होने वाला है. दरअसल, चंबल के बीहड़ों में कभी आतंक का पर्याय रहे कुछ कुख्यात डाकुओं और इस दस्यु आतंक का खात्मा करने के पुलिस के प्रयासों की दास्तान को भिंड जिले के एक संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा. भिंड के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह बताते हैं कि भिंड पुलिस चंबल के डाकुओं के इतिहास को एक संग्रहालय के जरिए लोगों को बताना चाहती है और संदेश देना चाहती है कि हिंसा से हमेशा नुकसान ही होता है. इससे किसी का फायदा नहीं होता है. इन डाकुओं से लड़ने वाले पुलिस बल के नायक भी गुमनाम बने हुए हैं. यह सब संग्रहालय में, सार्वजनिक डोमेन में लाया जाएगा।

इसलिए लोगों ने उठाईं बंदूकें
गौरतलब है कि आम लोगों के दस्यू बनने के पीछे कई कहानियां हैं. इन पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं. गरीबी और जातिवाद, जुल्म इसके पीछे मुख्य कारण थे, जो बागी बनाते थे. चंबल की जो जमीन थी वो जल्दी ही बंजर हो जाती थी. इससे लोग जीवन-यापन नहीं कर पाते थे. दूसरी ओर जमींदार और ऊंची जाति के लोगों के जुर्म इतने बढ़ जाते थे कि लोगों के पास बगावत करने और बदला लेने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होता था.

1990 में बड़ी संख्या में हुआ था सरेंडर

बता दें, 90 के दशक में कई खूंखार डाकुओं ने सरेंडर किया था. जेपी नारायण और विनोबा भावे के सामने कई दस्युओं ने हथियार डाले थे. उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में करीब एक हजार डाकुओं ने समर्पण किया था. 1982 में खूंखार मलखान सिंह ने सरेंडर किया था, जबकि ठीक अगले साल 1983 में फूलन देवी ने भी सरेंडर कर दिया था.

मलखान सिंह ने खड़े किए थे सवाल

मामले को लेकर पूर्व डाकू मलखान सिंह ने कई बार सवाल खड़े कर चुके हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि आखिर सिस्टम से पूछो तो कि किसने आम लोगों को डाकू बनाया. और डाकुओं के सरेंडर के बाद आखिर उनके पुनर्वास के लिए किया क्या गया.

एसपी ने कहा- बहादुर पुलिसवाले गुमनामी में क्यों जिएं

भिंड के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस संग्रहालय के अगले महीने खुलने की संभावना है और मध्य प्रदेश पुलिस के जवान इसकी स्थापना के लिए धन दान कर रहे हैं. उन्होंने कहा-अब तक चंबल के बीहड़ों के डाकुओं का महिमामंडन किया जाता रहा है. अब इन डाकुओं के आतंक के पीड़ितों के साथ-साथ उन पुलिसकर्मियों को सुर्खियों में लाया जाएगा, जिन्होंने इस आतंक का खात्मा करने के लिए लड़ाई लड़ी.

एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह आम धारणा बन चुकी है कि कुछ लोग अत्याचार एवं यातनाएं झेलने के बाद निराश होकर डाकू बने. लेकिन इस दस्यु आतंक के पीड़ितों को जो परेशानी झेलनी पड़ी, वह अब तक प्रकाश में नहीं आई हैं. इन डाकुओं से लड़ने वाले पुलिस बल के नायक भी गुमनाम बने हुए हैं. यह सब संग्रहालय में, सार्वजनिक डोमेन में लाया जाएगा।

सिंह ने बताया कि भिंड पुलिस चंबल के डाकुओं के इतिहास को एक संग्रहालय के जरिए लोगों को बताना चाहती है और संदेश देना चाहती है कि हिंसा से हमेशा नुकसान ही होता है. इससे किसी का फायदा नहीं होता है. इसके अलावा, इसका उद्देश्य अपराध की दुनिया में कदम रखने वालों को सबक और संदेश देना भी है. चंबल रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक राजेश हिंगणकर ने कहा- इस संग्रहालय में चंबल से डाकुओं को खत्म करने में जान गंवाने वाले 40 से अधिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का डेटाबेस होगा. उनकी तस्वीरों और पदकों को भी इसमें दिखाया जाएगा.

Tags: Dacoit

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर