कैसे लड़ेंगे कोरोना की तीसरी लहर से: MP में डॉक्टरों के 5000 पद खाली, 1000 की होगी भर्ती

कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने में मध्य प्रदेश को परेशानी हो सकती है. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने में मध्य प्रदेश को परेशानी हो सकती है. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

Third Battle Of Corona: मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है. प्रदेश में 5000 से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली हैं, जबकि शिवराज सरकार की कैबिनेट ने महज 1000 डॉक्टरों की भर्ती को मंजूरी दी है.

  • Last Updated: May 27, 2021, 9:28 AM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था (Health System) चरमरा सकती है. प्रदेश में 5000 से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली हैं, जबकि शिवराज सरकार की कैबिनेट ने (State Cabinet) महज एक हजार डॉक्टरों की भर्ती को मंजूरी दी है. अब सवाल ये उठ रहा है कि स्वास्थ्य दुरुस्त कैसे होंगी, जबकि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा चुकी है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कैबिनेट ने जिन 1000 डॉक्टरों के पदों को भरने की मंजूरी दी है. इनमें 800 मेडिकल ऑफिसर (Medical Officer) और 200 विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialist Doctors )की भर्ती की जाएगी. इन एक हज़ार पदों की भर्ती की मंजूरी के बाद भी प्रदेश में 4000 और डॉक्टरों की जरूरत है. बता दें, 13 मेडिकल कॉलेजो में 1000 और सरकारी अस्पतालों में 4000 डॉक्टरों के पद खाली हैं. मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टरों के 800 पद खाली हैं.

विशेषज्ञ डॉक्टरों के 3000 पद खाली

प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialist Doctors ) के करीब 3700 पदों पर भर्ती का रास्ता खुल गया है. वर्तमान में केवल 700 पदों पर विशेषज्ञ काम कर रहे हैं, इस तरह तीन हजार पद खाली हैं. अभी तक यह पद विभागीय पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान था. लेकिन, अब नई व्यवस्था के तहत इन पदों में से 25 फीसदी पद सीधी भर्ती से भरे जा सकेंगे. हालांकि, विशेषज्ञ डॉक्टरों के 75 फ़ीसदी पद विभागीय पदोन्नति से भरे जाने का रास्ता अभी भी खुला हुआ है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती नियमों में संशोधन से करीब 800 से 900 विशेषज्ञ पद भरे जा सकेंगे. इससे प्रदेश के अस्पतालों में 1600 विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता हो सकेगी.
इस तरह लटका है मामला

डॉक्टरों का कहना है कि करीब 700 से ज्यादा मेडिकल ऑफिसर हैं, जो पोस्ट ग्रेजुएशन किए हुए हैं. उनकी 30 साल की सेवा भी हो गई है. इसके बाद भी उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद पर पदोन्नति नहीं दी जा रही है. हालांकि सरकार ने डॉक्टरों को प्रोत्साहन देने के लिए 5400 से 6000 रुपये ग्रेड-पे दिए जाने की बात जरूर कही है.

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