लोकसभा चुनाव में कांग्रेस रिटर्न...? इन 10 सीटों पर आसान जीत का भरोसा

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

विधानसभा चुनाव के परिणाम और मोदी की लहर नहीं होने की वजह से इस चुनाव में सियासी समीकरण पूरी तरह से बदले हुए हैं.बीजेपी के सामने अपने किले बचाने की चुनौती है, तो कांग्रेस को उसके फेवर में चल रही हवा पर भरोसा है

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15 साल बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में लौटते ही सियासी समीकरण भी बदल गए हैं. 2014 की मोदी लहर में जिन सीटों पर कांग्रेस नेता कम अंतर से चुनाव हार गए थे, अब वहां पार्टी बल्ले-बल्ले कर रही है. उसे भरोसा है कि अब तो हवा बदल गयी है, इसलिए जीतेगी तो कांग्रेस ही.

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 2 सीट पर सिमट गयी थी. बाद में उपचुनाव में रतलाम-झाबुआ सीट उसके पाले में आई थी. तब मोदी लहर थी. इस बार सीन चेंज हैं. कांग्रेस मानकर चल रही है कि अब इन पर जीत तय है. बाकी 19 सीटों पर मुकाबला कड़ा होगा. इन आसान 10 सीटों में 3 तो पहले से उसके पास हैं. पिछले चुनाव में बाकी 7 पर वो कम अंतर से हारी थी.

इन सीटों पर कांग्रेस को उम्मीद
1–सतना - कांग्रेस उम्मीदवार अजय सिंह बीजेपी के गणेश सिंह से 8,688 वोट से हारे थे.
2–ग्वालियर-कांग्रेस के अशोक सिंह बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर से 29,699 वोट से हारे थे.


3–बालाघाट - बीजेपी उम्मीदवार अजय बोध सिंह भगत ने कांग्रेस की हिना कांवरे को 96,041 वोट से हराया था.
4-धार -कांग्रेस प्रत्याशी उमंग सिंघार 1,04,328 वोट से हारे थे.बीजेपी की सावित्री ठाकुर जीती थीं...अब उमंग मंत्री हैं...सावित्री ठाकुर की स्थिति भी ठीक नहीं है.
5-सीधी-बीजेपी प्रत्याशी रीति पाठक 1,08,046 वोट से जीती थीं.कांग्रेस प्रत्याशी इंद्रजीत पटेल हार गए थे.इंद्रजीत का निधन हो चुका है और उनके बेटे कमलेश्वर मंत्री बन गए हैं.
6-मंडला - बीजेपी के फग्गन सिंह कुलस्ते ने 1,10,469 से ओंकार सिंह मरकाम को हराया था.अब ओंकार मंत्री हैं.विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस मजबूती स्थिति में आ गई है.

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गुना, छिंदवाड़ा और झाबुआ कांग्रेस के कब्ज़े में हैं. शहडोल सीट से 2014 में बीजेपी के दलपति सिंह 2,42,302 वोट से जीते थे.कांग्रेस की राजेश नंदिनी की हार हुई थी. बाद में दलपत के निधन के बाद बीजेपी ने ज्ञान सिंह को मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाकर 2016 में ये सीट फिर से हथिया ली. हालांकि जीत का अंदर घटकर 60 हजार 383 हो गया था. अब कांग्रेस इस सीट को आसान मानकर चल रही है.

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ये बात तो सही है कि विधानसभा चुनाव के परिणाम और मोदी की लहर नहीं होने की वजह से इस चुनाव में सियासी समीकरण पूरी तरह से बदले हुए हैं.बीजेपी के सामने अपने किले बचाने की चुनौती है, तो कांग्रेस को उसके फेवर में चल रही हवा पर भरोसा है.

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