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सिंहस्थ घोटाला में सांसद डामोर के बाद अब अगला नंबर किसका? 100 FIR दर्ज होंगी!

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 15, 2019, 2:50 PM IST
सिंहस्थ घोटाला में सांसद डामोर के बाद अब अगला नंबर किसका? 100 FIR दर्ज होंगी!
उज्जैन में सिंहस्थ घोटाला, 100 से ज़्यादा FIR होने का अनुमान

EOW की उज्जैन इकाई सिंहस्थ घोटाले (simhastha scam) की जांच कर रही है.अभी एक दर्जन से ज्यादा ऐसी शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसमें करीब सौ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती हैं.ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि सिंहस्थ में 1500 करोड़ का घोटाले का आरोप है.

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भोपाल.EOW ने शिवराज सरकार (Shivraj government) के दौरान हुए सिंहस्थ घोटाले (simhastha scam) की जांच तेज़ कर दी है. सवाल ये उठ रहा है कि अब बीजेपी सांसद जी एस डामोर के बाद किसका नंबर आने वाला है. कांग्रेस का दावा है कि अभी आगे कई नेता और अफसर फंसने वाले हैं. जिस हिसाब से सिंहस्थ में हर खरीद में घोटाला किया गया, उसके अनुसार EOW एक के बाद एक करीब 100 एफआईआर (FIR) दर्ज कर सकता है.

EOW की उज्जैन इकाई सिंहस्थ घोटाले की जांच कर रही है.अभी एक दर्जन से ज्यादा ऐसी शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसमें करीब सौ एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं.ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि सिंहस्थ में 1500 करोड़ का घोटाले का आरोप है. कांग्रेस पहले ही इसकी शिकायत कर चुकी है.हर खरीदी में घोटाला होना बताया जा रहा है.अपने चहेतों को टेंडर रेवड़ी की तरह बांटे गए.छोटे से लेकर बड़े काम तक सबमें बंदरबांट की गयी.जब कांग्रेस विपक्ष में थी, तो उसने उज्जैन में 2016 में हुए सिंहस्थ में 1500 करोड़ घोटाले का आरोप लगाया था.अब इस घोटाले की जांच भी चल रही है.

इन शिकायतों की जांच 
EOW जिन मामलों की जांच कर रहा है उनमें करोड़ों रुपए की ख़रीद शामिल है. 5 करोड़ की स्वास्थ्य सामग्री के लिए 60 करोड़ रुपए चुकाए गए. बाजार में 3500 रुपए में जो कूलर मिल सकते थे, स्थानीय नगर निगम ने उसे 5600 रुपए प्रति कूलर के हिसाब से किराए पर लगवाया.सिंहस्थ मेला क्षेत्र में कुल 40 हजार शौचालय बनाए गए लेकिन कागजों पर 90 हजार लिखे.पूरे आयोजन स्थल, साधुओं की छावनियों में 35 हजार शौचालय, 15 हजार बाथरूम और 10 हजार मूत्रालय बनाए जाना थे. इसके लिए 18 अगस्त, 2015 को टेंडर क्रमांक 1415 निकाला गया, जो मात्र 36 करोड़ रुपए का था.इसमें लल्लूजी एंड संस, सुलभ और 2004 के सिंहस्थ में अधूरा काम छोड़कर भागने वाली ब्लैक लिस्टेड कंपनी सिंटेक्स ने भी भाग लिया.इस तरह 36 करोड़ का ठेका 117 करोड़ में दिया गया.

प्याऊ में भी घोटाला
नगर निगम ने आर-ओ के पानी की 750 प्याऊ 2.50 लाख रुपए प्रति प्याऊ की लागत से बनवायीं.प्रतिदिन के मान से 40 करोड़ रुपए में कचरा प्रबंधन का ठेका दिया.5 करोड़ के पुल के लिए 15 करोड़ भुगतान किया गया, वहीं 66 करोड़ का अस्पताल बनाने के लिए 93 करोड़ भुगतान किया गया. गर्मी में 30 लाख रुपए की वैसलीन खरीद ली गयी.शहर और मेला क्षेत्र में 120 और 150 वॉट की 11,330 एलईडी लाइट लगाने का दावा किया था.इसमें 3 करोड़ 60 लाख का घोटाला हुआ.पीने के पानी के लिए 100 रुपए का मटका 750 में खरीदा गया.

बीजेपी ने बदले की कार्रवाई बतायाबीजेपी विधायक विश्वास सारंग का कहना है कांग्रेस सरकार बदले की भावना से काम कर रही है.सरकार तबादला उद्योग के अलावा कुछ नहीं कर रही है.अपनी नाकामी छुपाने के लिए ऐसी कार्रवाई की जा रही है.वहीं कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल का कहना है घोटाले में सांसद जीएस डामोर पर कार्रवाई हुई है.अभी आगे कई नेता और अफसर फंसने वाले हैं.अभी जिन शिकायतों की जांच में पीई दर्ज की गई, उनमें सबूत जुटाए जा रहे हैं.तमाम विभाग से दस्तावेज तलब किए गए हैं.ऐसी कई शिकायते हैं, जिनमें खरीदी और टेंडर के साथ चहेतों को काम देने के गंभीर आरोप हैं.शिकायतों के मिले सबूतों की जांच भी कराई जा रही है.ये घोटाला व्यापम की तरह लंबा खींचने वाला है.

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First published: December 15, 2019, 2:49 PM IST
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