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एमपी की बिजली कंपनियों का बुरा हाल, घाटे के कारण देश में सबसे ज्यादा पिछड़ीं

एमपी की बिजली कंपनियों का बुरा हाल, घाटे के कारण देश में सबसे ज्यादा पिछड़ीं

MP . केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की एनुअल रेटिंग एंड रैंकिंग में प्रदेश की दो बिजली कंपनियां सबसे ज्यादा पिछड़ी बताई गई हैं.

MP . केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की एनुअल रेटिंग एंड रैंकिंग में प्रदेश की दो बिजली कंपनियां सबसे ज्यादा पिछड़ी बताई गई हैं.

MP News. केंद्र की बिजली कंपनियों के बारे में जारी इस रिपोर्ट में गुजरात की बिजली कंपनियों को टॉप फाइव में शामिल किया गया है. इनमें मध्य प्रदेश की 2 बिजली कंपनियां सबसे ज्यादा पिछड़ी कंपनियों में शामिल हैं. यूनाइटेड फोरम ने अफसरों की संख्या बढ़ाने के साथ तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती करने और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की जरूरत बताई है. कुल मिलाकर प्रदेश की बिजली कंपनियों पर साल दर साल घाटा बढ़ता जा रहा है. लाइन लॉस कम नहीं हो रहा है. बिजली कंपनियां लगातार कर्ज लेकर घाटे की भरपाई करने में लगी हैं. अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की रिपोर्ट ने सरकार और बिजली कंपनियों की पोल खोल कर रख दी है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश की सियासत में बिजली बड़ा मुद्दा रही है. अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की बिजली कंपनियों की हकीकत सामने ला दी है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की एनुअल रेटिंग एंड रैंकिंग में प्रदेश की दो बिजली कंपनियां सबसे ज्यादा पिछड़ी बताई गई हैं. इसमें मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी और पूर्व क्षेत्र बिजली कंपनी शामिल हैं. देश की 52 बिजली कंपनियों के लिए जारी केंद्र सरकार की एनुअल रिपोर्ट में पूर्व क्षेत्र कंपनी को 47 और मध्य क्षेत्र कंपनी को 48 रेटिंग दी गई है. जो नीचे से टॉप फाइव में शामिल हैं.

इस मामले को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने बिजली कंपनियों के लगातार बढ़ रहे घाटे और शिकायतों के साथ लाइन लॉस के मामले पर सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा बिजली व्यवस्था सुधारने में बिजली विभाग फेल साबित हुआ है.

लाइन लॉस से बिगड़ी हालत
दूसरी तरफ केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने न्यूज़ 18 से बातचीत में माना कि लाइन लॉस और घाटे में कंपनियां बिगड़ रही हैं. लेकिन सुधार कार्यक्रमों के जरिए बिजली कंपनियों की व्यवस्था बदलने की कोशिश की जा रही है. ट्रिपिंग में कमी आई है. मेंटेनेंस के समय में भी कमी आई है. सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. बिजली कंपनियों में गुजरात मॉडल लागू करने की मांग पर ऊर्जा मंत्री ने कहा तकनीकी अमले की कमी को पूरा किया जाएगा, ताकि प्रदेश की बिजली कंपनियों की रेटिंग में सुधार हो सके.

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गुजरात मॉडल लागू करने की मांग
दूसरी तरफ मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम ने भी बिजली कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यूनाइटेड फोरम ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर बिजली कंपनियों के संगठन ढांचे में सुधार के लिए गुजरात मॉडल लागू करने की मांग की है. इसके जरिए बिजली कंपनियों में आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारियों की जगह नियमित कर्मचारियों को नियुक्त करने की मांग की गई है.

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गुजरात टॉप फाइव में
केंद्र की बिजली कंपनियों के बारे में जारी इस रिपोर्ट में गुजरात की बिजली कंपनियों को टॉप फाइव में शामिल किया गया है. इनमें मध्य प्रदेश की 2 बिजली कंपनियां सबसे ज्यादा पिछड़ी कंपनियों में शामिल हैं. यूनाइटेड फोरम ने अफसरों की संख्या बढ़ाने के साथ तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती करने और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की जरूरत बताई है. कुल मिलाकर प्रदेश की बिजली कंपनियों पर साल दर साल घाटा बढ़ता जा रहा है. लाइन लॉस कम नहीं हो रहा है. बिजली कंपनियां लगातार कर्ज लेकर घाटे की भरपाई करने में लगी हैं. अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की रिपोर्ट ने सरकार और बिजली कंपनियों की पोल खोल कर रख दी है.

Tags: Madhya Pradesh Electricity Board, Madhya pradesh latest news

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