3 साल की बच्ची में दिखा ब्लैक फंगस, संभवतः यह प्रदेश का पहला मामला, जानिए डॉक्टर क्या कर रहे प्लानिंग

मध्य प्रदेश में 3 साल की बच्ची में ब्लैक फंगस के लक्षण देख डॉक्टर हैरान हैं. (File)

मध्य प्रदेश में 3 साल की बच्ची में ब्लैक फंगस के लक्षण देख डॉक्टर हैरान हैं. (File)

मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस फैलता जा रहा है. अब 3 साल की बच्ची में ये बीमारी दिखी है. मंत्री का कहना है कि यह शोध का विषय हो गया है. डॉक्टर्स लगातार बच्ची पर नजर रखे हुए हैं.

  • Last Updated: June 3, 2021, 3:01 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 साल की बच्ची में ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए हैं. संभवतः यह पहला मामला है, जब इतनी कम उम्र में किसी को ये बीमारी हुई हो. बच्ची का इलाज हमीदिया अस्पताल में चल रहा है. इस मामले को लेकर चिकित्सा शिक्षा मंत्री का कहना है कि यह शोध का विषय है.

जानकारी के मुताबिक, बच्ची को टाइप वन डायबिटीज भी है. जन्म के एक साल बाद उसमें बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे थे. तभी से उसे एंटीबायोटिक दवाई दी जा रही है. इसलिए उसमें ब्लैक फंगस दिखाई दे रहे हैं. डॉक्टरों ने बच्ची के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं. डॉक्टरों की टीम ने बच्चे के आगे के इलाज की प्लानिंग भी कर ली है.

18 से कम उम्र के चार बच्चे

डॉक्टरों का कहना है कि यह सबसे कम उम्र की बच्ची है जिसमें ब्लैक फंगस के लक्षण सामने आए हैं. इससे पहले शहर में 18 साल के 2 बच्चों में ब्लैक फंगस के लक्षण मिले थे. प्रदेश में अब तक 18 से कम उम्र के 4 मरीज सामने आ चुके हैं.
सीएम खुद कर रहे समीक्षा

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ब्लैक फ़ंगस के मरीज़ों की समीक्षा मुख्यमंत्री खुद करते हैं. वे डॉक्टर से लगातार बात करते हैं. इसके साथ ही इस बीमारी में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन का प्रोडक्शन भी इंदौर और जबलपुर में शुरू होगा. दोनों जगहों पर फार्मा कंपनी को लाइसेंस भी मिल गया है.

प्रदेश मे ही मिलेगी ब्लैग फंगस की संजीवनी



अब प्रदेश मे ही मिलेगी ब्लैग फंगस की संजीवनी , प्रदेश की निरर्भता होगी खत्म ... पढ़िए ये खास खबर मध्यप्रदेश में कोरोना के साथ बढ़ते ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए राहत भरी खबर हैं. कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों और इलाज के लिए जरूरी एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का उत्पादन अब जबलपुर में शुरू होने जा रहा है.

20 जून से मिल सकते है इंजेक्शन

जबलपुर की रेवा क्योर लाइफ साइंसेज दवा कंपनी इंजेक्शन बनाएगी. कंपनी को सरकार की तरफ से उत्पादन संबंधी लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है. ब्लैक फंगस  के इलाज में सबसे बड़ी बाधा इसके इंजेक्शन की कमी को बताया जा रहा है. सरकारी स्तर पर इसकी खरीदी कर मेडिकल कॉलेज को इंजेक्शन तो उपलब्ध कराए जा रहे है. लेकिन फिर भी बढ़ते मामलों के चलते कमी लगातार बनी हुई है. लिहाजा इमरजेंसी को देखते हुए रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी सामने आई. उमरिया-डुंगरिया स्थित रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी एंटी कैंसर इंजेक्शन बनाती है. देश की कई बड़ी व नामी कंपनियों से उनका टाइअप है.

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