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एक श्मशान घाट, 71 दिन और 3500 अंतिम संस्कार, जानिए क्यों हुई ये मौतें, फिर क्या हुआ

भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर ढाई महीने में ही तीन हजार से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया. (File)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का भदभदा श्मशान घाट. कोरोना काल में यह घाट सबसे चर्चित रहा. यहां कई कोरोना मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया. वास्तविक मौतों के आंकड़े डराने वाले हैं.

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    भोपाल. भोपाल में कोरोना की लहर भले ही धीरे-धीरे कम हो रही है. लेकिन, जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो काफी चिंता जनक हैं. कोरोना की दूसरी लहर में  सरकारी आकड़ों के मुताबिक़ 5 जून तक भोपाल में 948 लोगों की कोरोना से मौत हुई. जबकि भोपाल के भदभदा श्मशान घाट प्रबंधन के मुताबिक 27 मार्च से लेकर 5 जून तक महज़ 71 दिन में 3500 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें से 2800 शवों का दाह संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया.

    इस मामले में ANI ने भदभदा विश्रामघाट के कर्मी से बात की. उन्होंने बताया कि भदभदा विश्राम घाट में 27 मार्च से कल तक 5 जून तक करीबन 3500  दाह संस्कार हो चुके हैं. इसमें 2800 दाह संस्कार कोरोना संक्रमित शवों के थे, बाकी शव सामान्य मृतकों के थे.

    प्रभारी मंत्री ने कहा- संदिग्धों को भी कोरोना मृतक माना गया

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री और भोपाल के कोरोना प्रभारी विश्वास सारंग ने इस मामले पर कहा कि कोरोना काल में हुई मौतों और इस दौरान हुई संदिग्ध मौतों (भले ही उन्हें कोरोना न हो) का दाह संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल से ही किया गया. ताकि, संक्रमण ज्यादा न फैले.  जो सरकार के और हॉस्पिटल के आंकड़े हैं, वही कोरोना पॉजिटिव के आंकड़े हैं.

    और भी डरावने हो सकते हैं आंकड़े

    गौरतलब है कि ये महज़ एक विश्रामघाट का आकड़ा है, जो सरकारी आंकड़े से कई गुना है. जबकि, भोपाल में इसके अलावा 3 अन्य विश्रामघाट और एक क़ब्रिस्तान भी हैं, जहां कोरोना काल के दौरान अंतिम संस्कार किए गए और शवों को दफनाया गया. ये आंकड़े डराने वाले हैं, लेकिन सरकार अपने आंकड़ो को ही सही मान कर चल रही है. दूसरी ओर, कई लोग इस वजह से भी परेशान हैं कि संक्रमण से मौत होने के बाद भी सरकार उन्हें कोरोना मृतक नहीं मान रही. वे सरकारी लाभ मिलने वंचित रह जाएंगे.
    Published by:Nikhil Suryavanshi
    First published: