स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर MP में 37 प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर, देखें लिस्ट
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर MP में 37 प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर, देखें लिस्ट
शिवराज सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश सरकार (MP Government) ने 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों का ट्रांसफर किया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार (MP Government) ने स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) की पूर्व संध्या पर प्रशासनिक अमले में भारी फेरबदल करते हुए 37 अधिकारियों के ट्रांसफर (Transfer) कर दिए हैं. मध्य प्रदेश में इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी को आगामी विधानसभा उपचुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. शिवराज सरकार ने राज्य आज शुक्रवार को प्रशासनिक सेवा के 37 अधिकारियों के तबादले किए हैं. इन तबादलों में सागर नगर निगम के आयुक्त भी ट्रांसफर किए हैं. नगर निगम सागर के आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को गुना अपर कलेक्टर बना कर भेजा गया है. इसके साथ ही कई जिलों के अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर बदले गए हैं.

बता दें कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले से पहले 2018 बैच के 10 आईएएस अधिकारियों को दूसरे टर्म के प्रशिक्षण के बाद नई पोस्टिंग के आदेश जारी हुए हैं.

आईएएस अधिकारियों की पदस्थापना सूची
प्रथम कौशिक, एसडीएम, मण्डला
सिद्धार्थ जैन, एसडीएम, लखनादौन


तपस्या परिहार, एसडीएम, सेंधवा
शिशिर गेमावत, एसडीएम, पेटलावद
अभिषेक चौधरी, एसडीएम, पुष्पराजगढ़
संघ प्रिय, एसडीएम, सीहोर
अमन वैष्णव, एसडीएम, नरसिंहगढ़
हरसिमरनप्रीत कौर, एसडीएम, चंदेरी
श्यामवीर, एसडीएम, जोबट
अक्षय कुमार तेम्रावाल, एसडीएम, राघोगढ़

ट्रांसफर लिस्ट
ट्रांसफर लिस्ट


हालांकि आज शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज विधायकों और सांसदों को खुश करने का भी फार्मूला तलाश लिया है. शुक्रवार को हुई कैबिनेट की वर्चुअल बैठक (Cabinet Meeting) में सहकारी सोसायटी संशोधन अध्यादेश को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इस अहम फैसले पर मुहर लगने के बाद अब प्रदेश में सांसद (MP) और विधायक (MLA) सहकारी संस्थाओं के सदस्य और पदाधिकारी बन सकेंगे. अभी तक इसको लेकर प्रदेश में रोक लग हुई थी. माना जा रहा है कि बीजेपी में ऐसे विधायक जो मंत्री नहीं बन पाए हैं, उन्हें सहकारी समितियों में एडजस्ट कर खुश करने की कोशिश की जाएगी.

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हालांकि कैबिनेट के इस फैसले पर विपक्ष ने आपत्ति भी जताई है. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों को सहकारी संस्थाओं में नियुक्त करने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा. हालांकि बीजेपी ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया है. वहीं ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी शिवराज सरकार बहुत सावधानी बरत रही है.
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