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95 साल की चंदा दादी ज़िंदाबाद, मैदान में और भी हैं कई कोरोना वॉरियर्स, पढ़िए इनकी कहानी

इंदौर में ९५ साल की महिला ने कोरोना को दी मात

इंदौर में ९५ साल की महिला ने कोरोना को दी मात

इंदौर (indore) में आरक्षक महमूद ने उस मिथक को भी तोड़ा है कि हाई ब्लड प्रेशर समेत दूसरी बीमारियों के साथ कोरोना (corona) वायरस जानलेवा हो जाता है

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    भोपाल. कोरोना (corona) ये नाम अगर आपके लिए भी दहशत बना हुआ है तो कोरोना वॉरियर्स (Corona warriors) की ये कहानी आप ज़रूर पढ़ें. इसके बाद आप कोरोना से डरना भूल जाएंगे. ये कहानियां कोरोना को लेकर सारे मिथक तोड़ती हैं. वो कहती हैं कि रोग प्रतिरोक्षक क्षमता (resistance capacity) और मजबूत इच्छा शक्ति के ज़रिए इस बीमारी को आसानी से मात दी जा सकती है.

    95 साल की बेमिसाल चंदा दादी

    इंदौर की बुजुर्ग चंदा दादी बेमिसाल हैं. उनकी कोरोना कहानी सुनकर आपकी ये धारणा टूट जाएगी कि बुजुर्गों पर कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा है. दादी की उम्र 95 साल है. यानि सरकार की गाइड लाइन 60 साल से ठीक 35 साल ज्यादा. ये दादी अम्मा चंदा परमार उम्र संबंधी तमाम बीमारियों से घिरी हुई हैं. चंदा बाई जो ठीक से सुन भी नहीं सकतीं, लेकिन इस उम्र में कोरोना से लड़कर जीत कर लौट आई हैं. ये इंदौर की सबसे ज्यादा उम्र की कोरोना पॉ़जीटिव मरीज़ थीं. उम्र का शतक लगाने के पहले वो कोरोना को मात देकर घर लौटी हैं.

    दादी ज़िंदाबाद
    इंदौर में 90 साल से ज्यादा उम्र की दो और दादियां कोरोना को मात देकर मुस्कुराती हुई घर लौटीं. इनमें से एक हैं 93 साल की शारदा बेन तलाटी और दूसरी हैं कोहिनूर पैलेस कॉलोनी की 90 वर्षीय केहरुन्निशा. नाती-पोते वाली ये महिलाएं ज़बरदस्त इच्छा शक्ति के बल पर कोरोना को हराने में कामयाब रहीं. शारदा बेन तो अस्पताल में योग करती थीं. इन दादियों के परिवारवालों का कहना है ज़िंदगी के प्रति पॉजिटिव सोच, व्यवस्थित दिनचर्या और पौष्टिक खान-पान के कारण ये वयोवृद्ध महिलाएं कोरोना को हरा पायीं.

    कॉस्टेबल महमूद ने दी कोरोना को मात
    इंदौर में आरक्षक महमूद ने उस मिथक को भी तोड़ा है कि हाई ब्लड प्रेशर समेत दूसरी बीमारियों के साथ ये वायरस जानलेवा हो जाता है. महमूद को कई बीमारियां हैं और फिर कोरोना का हमला भी हो गया. लेकिन हौसले और हिम्मत से उन्होंने कोरोना की जंग जीत ली. चौदह दिन में वो वायरस के संक्रमण से बाहर आ गए. इंदौर के सबसे ज्यादा संक्रमित खजराना इलाके में ड्यूटी दे चुके आरक्षक महमूद खुद ब्लड प्रेशर समेत उम्र के साथ आने वाले कई बीमारियों से पीड़ित हैं. इंदौरियों को संभालने के लिए वो डंडे भी चला सकते हैं, लेकिन सुरों के साथ समझाईश दी. उन्होंने एक ही पैगाम दिया- सावधानी रखिए, कोरोना से निपटने के लिए डर नहीं हौसला चाहिए.



    पर्वतारोही ने हासिल की फतह
    भोपाल के सतीष नामदेव पर्वतारोही हैं. फेफड़ों का इस्तेमाल आम लोगों से ज्यादा किया है. लेकिन अस्पताल में ड्यूटी के दौरान कोरोना वायरस की चपेट में आ गए.गैस राहत विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर सतीश नामदेव, देश भर के ऊंचे पर्वतों की बर्फीली चोटियां फतह कर चुके हैं. ऐसे में वायरस को हराना कौन सा मुश्किल था. कोरोना को हराने के बाद वो फिर तैयार हैं पर्वतों के शिखर छूने के लिए.



    कोरोना मरीज का सफल ऑपरेशन
    ये एमपी की दूसरी कोरोना पॉजीटिव मरीज हैं जिनकी इस संक्रमण के दौरान हुई सर्जरी कामयाब रही है.हमीदिया अस्पताल में पहली बार कोरोना मरीज़ का सफल ऑपरेशन हुआ.38 वर्षीय महिला के दाहिनी बांह का यहां ऑपरेशन किया गया.इनके हुमैरस में फ्रैक्चर हुआ था.उस पर कोरोना संक्रमण भी.सागर में इलाज के दौरान हमीदिया रेफर किया गया और यहां ऑपरेशन के बाद अब वो पूरी तरह स्वस्थ हैं.

    जिन्दगी के उतार चढ़ाव ..और परेशानियों को पीछा छोड़ते हुए ज़िन्दगी की जीत हुई

    (इंदौर से विकास सिंह चौहान, जबलपुर से पवन पटेल और भोपाल से पूजा माथुर की साझा रिपोर्ट)

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